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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 2

अध्याय 1 · श्लोक 2

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

सञ्जय उवाच | दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा | आचार्यमुपसङ्गम्य राजा वचनमब्रवीत् ||२||

sañjaya uvāca | dṛṣṭvā tu pāṇḍavānīkaṃ vyūḍhaṃ duryodhanastadā | ācāryamupasaṅgamya rājā vacanamabravīt ||2||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

सञ्जय: संजय; उवाच: बोले; दृष्ट्वा: देखकर; तु: तो; पाण्डवानीकम्: पाण्डवों की सेना; व्यूढम्: व्यूह रचना किए हुए; दुर्योधन: दुर्योधन; तदा: तब; आचार्यम्: आचार्य (द्रोण) के पास; उपसङ्गम्य: जाकर; राजा: राजा; वचनम्: वचन; अब्रवीत्: बोला।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

संजय बोले: तब राजा दुर्योधन ने पाण्डवों की सेना को व्यूहबद्ध देखकर आचार्य द्रोणाचार्य के पास जाकर यह वचन कहे।

English Translation

Sanjaya said: Then, seeing the Pandava army drawn up in battle array, King Duryodhana approached his teacher Dronacharya and spoke these words.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

दुर्योधन की आशंका और व्याकुलता यहाँ दिखती है। वह सेना की शक्ति का आकलन कर रहा है और गुरु द्रोण को सचेत करना चाहता है। Duryodhana's anxiety reflects his inner insecurity despite his large army.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।