अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) – श्लोक 2

श्लोक २ में संजय वर्णन करते हैं कि दुर्योधन ने पाण्डवों की सेना देखकर द्रोणाचार्य से क्या कहा। Verse 2: Sanjaya describes Duryodhana approaching Drona after seeing the Pandava army.

संस्कृत श्लोक

सञ्जय उवाच | दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा | आचार्यमुपसङ्गम्य राजा वचनमब्रवीत् ||२||

sañjaya uvāca | dṛṣṭvā tu pāṇḍavānīkaṃ vyūḍhaṃ duryodhanastadā | ācāryamupasaṅgamya rājā vacanamabravīt ||2||

पदच्छेद / शब्दार्थ

सञ्जय: संजय; उवाच: बोले; दृष्ट्वा: देखकर; तु: तो; पाण्डवानीकम्: पाण्डवों की सेना; व्यूढम्: व्यूह रचना किए हुए; दुर्योधन: दुर्योधन; तदा: तब; आचार्यम्: आचार्य (द्रोण) के पास; उपसङ्गम्य: जाकर; राजा: राजा; वचनम्: वचन; अब्रवीत्: बोला।

हिंदी अनुवाद

संजय बोले: तब राजा दुर्योधन ने पाण्डवों की सेना को व्यूहबद्ध देखकर आचार्य द्रोणाचार्य के पास जाकर यह वचन कहे।

English Translation

Sanjaya said: Then, seeing the Pandava army drawn up in battle array, King Duryodhana approached his teacher Dronacharya and spoke these words.

टीका / Commentary

दुर्योधन की आशंका और व्याकुलता यहाँ दिखती है। वह सेना की शक्ति का आकलन कर रहा है और गुरु द्रोण को सचेत करना चाहता है। Duryodhana's anxiety reflects his inner insecurity despite his large army.