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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 1

अध्याय 1 · श्लोक 1

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

धृतराष्ट्र उवाच | धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः | मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय ||१||

dhṛtarāṣṭra uvāca | dharma-kṣetre kuru-kṣetre samavetā yuyutsavaḥ | māmakāḥ pāṇḍavāś caiva kim akurvata sañjaya ||1||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

धृतराष्ट्र: राजा धृतराष्ट्र; उवाच: बोले; धर्मक्षेत्रे: धर्मभूमि में; कुरुक्षेत्रे: कुरुक्षेत्र में; समवेताः: एकत्रित; युयुत्सवः: युद्ध की इच्छा वाले; मामकाः: मेरे पुत्र; पाण्डवाः: पाण्डु के पुत्र; च: और; एव: निश्चय ही; किम्: क्या; अकुर्वत: उन्होंने किया; सञ्जय: हे संजय।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

धृतराष्ट्र बोले: हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में युद्ध की इच्छा से एकत्र हुए मेरे तथा पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया?

English Translation

Dhritarashtra said: On the holy plain of Kurukshetra, gathered together, eager to fight, what did my sons and the sons of Pandu do, O Sanjaya?

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

धृतराष्ट्र का यह प्रश्न उनके पुत्र-मोह को दर्शाता है। "धर्मक्षेत्र" शब्द यह संकेत देता है कि यह युद्ध केवल राजनीतिक नहीं, अपितु धार्मिक महत्व का भी है। The word "dharma-kshetra" signifies that this battlefield is sacred.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।