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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 5

अध्याय 1 · श्लोक 5

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान् | पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुङ्गवः ||५||

dhṛṣṭaketuścekitānaḥ kāśirājaśca vīryavān | purujitkuntibhojaśca śaibyaśca narapuṅgavaḥ ||5||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

धृष्टकेतु: धृष्टकेतु (चेदिराज); च: और; चेकितान: चेकितान; काशिराज: काशीराज; च: और; वीर्यवान: पराक्रमी; पुरुजित्: पुरुजित्; कुन्तिभोज: कुन्तिभोज; च: और; शैब्य: शैब्य; च: और; नरपुङ्गव: नरश्रेष्ठ।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

धृष्टकेतु, चेकितान, पराक्रमी काशीराज, पुरुजित्, कुन्तिभोज और नरश्रेष्ठ शैब्य भी यहाँ हैं।

English Translation

There are also great, heroic, and powerful fighters like Dhrishtaketu, Chekitana, the valiant king of Kashi, Purujit, Kuntibhoja, and Shaibya – the best of men.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

ये सभी राजा पाण्डवों के पक्ष में हैं। दुर्योधन उनकी गिनती कर अपनी चिंता प्रकट कर रहा है। All these kings are allied with the Pandavas; Duryodhana is clearly worried.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।