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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 33

अध्याय 1 · श्लोक 33

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

येषामर्थे काङ्क्षितं नो राज्यं भोगाः सुखानि च | त इमेऽवस्थिता युद्धे प्राणांस्त्यक्त्वा धनानि च ||३३||

yeṣāmarthe kāṅkṣitaṃ no rājyaṃ bhogāḥ sukhāni ca | ta ime'vasthitā yuddhe prāṇāṃstyaktvā dhanāni ca ||33||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

येषाम्: जिनके लिए; अर्थे: लिए; काङ्क्षितम्: इच्छित; नः: हमारे द्वारा; राज्यम्: राज्य; भोगाः: भोग; सुखानि: सुख; च: और; ते: वे; इमे: ये; अवस्थिताः: खड़े हैं; युद्धे: युद्ध में; प्राणान्: प्राण; त्यक्त्वा: त्यागकर; धनानि: धन; च: और।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जिनके लिए हम राज्य, भोग और सुख चाहते थे, वे ही लोग यहाँ प्राण और धन त्यागकर युद्ध में खड़े हैं।

English Translation

Those for whose sake we desire kingdom, enjoyments, and pleasures are now standing here ready to fight, having given up their lives and wealth.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन कहते हैं कि जिन लोगों के लिए वे राज्य चाहते थे (उनके भाई, पुत्र आदि), वे ही अब युद्ध में उनके सामने हैं। Arjuna points out that those for whom he desired the kingdom are now arrayed against him.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।