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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 34

अध्याय 1 · श्लोक 34

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

आचार्याः पितरः पुत्रास्तथैव च पितामहाः | मातुलाः श्वशुराः पौत्राः श्यालाः सम्बन्धिनस्तथा ||३४||

ācāryāḥ pitaraḥ putrāstathaiva ca pitāmahāḥ | mātulāḥ śvaśurāḥ pautrāḥ śyālāḥ sambandhinastathā ||34||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

आचार्याः: आचार्य; पितरः: पिता; पुत्राः: पुत्र; तथा: तथा; एव: ही; च: और; पितामहाः: पितामह; मातुलाः: मामा; श्वशुराः: ससुर; पौत्राः: पौत्र; श्यालाः: साले; सम्बन्धिनः: संबंधी; तथा: और।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

आचार्य, पिता, पुत्र, पितामह, मामा, ससुर, पौत्र, साले तथा अन्य संबंधी – ये सभी यहाँ हैं।

English Translation

Teachers, fathers, sons, grandfathers, maternal uncles, fathers-in-law, grandsons, brothers-in-law, and other relatives – all are here.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन अपने सभी संबंधियों को गिना रहे हैं, जो युद्ध में मौजूद हैं। Arjuna enumerates all the relatives present on the battlefield.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।