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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 28

अध्याय 1 · श्लोक 28

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

कृपया परयाविष्टो विषीदन्निदमब्रवीत् | दृष्ट्वेमं स्वजनं कृष्ण युयुत्सुं समुपस्थितम् ||२८||

kṛpayā parayāviṣṭo viṣīdannidamabravīt | dṛṣṭvemaṃ svajanaṃ kṛṣṇa yuyutsuṃ samupasthitam ||28||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

कृपया: करुणा से; परया: अत्यधिक; आविष्टः: आविष्ट; विषीदन्: विषाद करते हुए; इदम्: यह; अब्रवीत्: बोला; दृष्ट्वा: देखकर; इमम्: इस; स्वजनम्: अपने लोगों को; कृष्ण: हे कृष्ण; युयुत्सुम्: युद्ध की इच्छा से; समुपस्थितम्: उपस्थित।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

अत्यधिक करुणा से आविष्ट और विषाद करते हुए अर्जुन ने यह कहा: हे कृष्ण! युद्ध की इच्छा से उपस्थित अपने इन स्वजनों को देखकर ...

English Translation

Overwhelmed with compassion, Arjuna, in great sorrow, spoke thus: O Krishna, seeing my own kinsmen standing here eager for battle, ...

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन अब अपने मनोभाव प्रकट करते हैं – वे अत्यधिक करुणा से भर गए हैं और विषाद में बोलते हैं। Arjuna now expresses his feelings – he is overwhelmed with compassion and speaks in sorrow.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।