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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 29

अध्याय 1 · श्लोक 29

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

सीदन्ति मम गात्राणि मुखं च परिशुष्यति | वेपथुश्च शरीरे मे रोमहर्षश्च जायते ||२९||

sīdanti mama gātrāṇi mukhaṃ ca pariśuṣyati | vepathuśca śarīre me romaharṣaśca jāyate ||29||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

सीदन्ति: शिथिल हो रहे हैं; मम: मेरे; गात्राणि: अंग; मुखम्: मुख; च: और; परिशुष्यति: सूख रहा है; वेपथु: कम्पन; च: और; शरीरे: शरीर में; मे: मेरे; रोमहर्ष: रोमांच; च: और; जायते: हो रहा है।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

मेरे अंग शिथिल हो रहे हैं, मुख सूख रहा है, शरीर में कम्पन हो रहा है और रोमांच खड़ा हो रहा है।

English Translation

My limbs are giving way, my mouth is drying up, my body trembles, and my hair is standing on end.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन अपने शारीरिक लक्षण बता रहे हैं जो भय और विषाद के कारण उत्पन्न हो रहे हैं। Arjuna describes the physical symptoms of his fear and sorrow.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।