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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 27

अध्याय 1 · श्लोक 27

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

श्वशुरान्सुहृदश्चैव सेनयोरुभयोरपि | तान्समीक्ष्य स कौन्तेयः सर्वान्बन्धूनवस्थितान् ||२७||

śvaśurānsuhṛdaścaiva senayorubhayorapi | tānsamīkṣya sa kaunteyaḥ sarvānbandhūnavasthitān ||27||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

श्वशुरान्: ससुरों को; सुहृदः: हितैषियों को; च: और; एव: ही; सेनयोः: दोनों सेनाओं में; उभयोः: दोनों; अपि: भी; तान्: उनको; समीक्‍ष्य: देखकर; स: वह; कौन्तेयः: कुन्तीपुत्र (अर्जुन); सर्वान्: सभी; बन्धून्: बांधवों को; अवस्थितान्: खड़े हुए।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

दोनों सेनाओं में ससुर और हितैषी भी थे। उन सब बांधवों को वहाँ खड़ा देखकर अर्जुन के हृदय में करुणा उत्पन्न हुई।

English Translation

He also saw fathers-in-law and well-wishers in both armies. Seeing all these kinsmen standing there, Arjuna was overcome with pity.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन ने अपने ससुराल पक्ष के लोगों (जैसे काशीराज) और अन्य हितैषियों को भी देखा। Arjuna also saw his fathers-in-law and well-wishers on both sides.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।