आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३० PM | सूर्यास्त: ०५:३१ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 25

अध्याय 1 · श्लोक 25

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

भीष्मद्रोणप्रमुखतः सर्वेषां च महीक्षिताम् | उवाच पार्थ पश्यैतान्समवेतान्कुरूनिति ||२५||

bhīṣmadroṇapramukhataḥ sarveṣāṃ ca mahīkṣitām | uvāca pārtha paśyaitānsamavetānkurūniti ||25||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

भीष्म: भीष्म; द्रोण: द्रोणाचार्य; प्रमुखतः: आगे; सर्वेषाम्: सभी; च: और; महीक्षिताम्: राजाओं के; उवाच: बोले; पार्थ: हे पार्थ (अर्जुन); पश्य: देखो; एतान्: इन; समवेतान्: एकत्रित; कुरून्: कुरुवंशियों को; इति: इस प्रकार।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

भीष्म, द्रोण और सभी राजाओं के सामने कृष्ण ने कहा: हे पार्थ! इन एकत्रित कुरुवंशियों को देखो।

English Translation

In the presence of Bhishma, Drona, and all the other kings, Krishna said: O Partha (Arjuna), behold all the Kurus gathered here!

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

कृष्ण ने अर्जुन को सभी कुरुवंशी योद्धाओं को दिखाया, जिनमें भीष्म, द्रोण आदि थे। Krishna showed Arjuna all the Kuru warriors assembled, including Bhishma, Drona, and others.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।