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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 24

अध्याय 1 · श्लोक 24

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

एवमुक्तो हृषीकेशो गुडाकेशेन भारत | सेनयोरुभयोर्मध्ये स्थापयित्वा रथोत्तमम् ||२४||

evamukto hṛṣīkeśo guḍākeśena bhārata | senayorubhayormadhye sthāpayitvā rathottamam ||24||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

एवम्: इस प्रकार; उक्तः: कहे जाने पर; हृषीकेशः: हृषीकेश (श्रीकृष्ण); गुडाकेशेन: गुडाकेश (अर्जुन) द्वारा; भारत: हे भरतवंशी (धृतराष्ट्र); सेनयोः: दोनों सेनाओं के; उभयोः: दोनों; मध्ये: बीच में; स्थापयित्वा: खड़ा करके; रथोत्तमम्: उत्तम रथ को।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे भारत (धृतराष्ट्र)! गुडाकेश (अर्जुन) द्वारा इस प्रकार कहे जाने पर हृषीकेश (श्रीकृष्ण) ने उत्तम रथ को दोनों सेनाओं के बीच में खड़ा कर दिया।

English Translation

O descendant of Bharata (Dhritarashtra), being thus addressed by Gudakesha (Arjuna), Hrishikesha (Krishna) placed that excellent chariot between the two armies.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन के अनुरोध पर कृष्ण ने रथ को दोनों सेनाओं के बीच में ले जाकर खड़ा कर दिया। At Arjuna's request, Krishna placed the chariot between the two armies.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।