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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 23

अध्याय 1 · श्लोक 23

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

योत्स्यमानानवेक्षेऽहं य एतेऽत्र समागताः | धार्तराष्ट्रस्य दुर्बुद्धेर्युद्धे प्रियचिकीर्षवः ||२३||

yotsyamānānavekṣe'haṃ ya ete'tra samāgatāḥ | dhārtarāṣṭrasya durbuddheryuddhe priyacikīrṣavaḥ ||23||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

योत्स्यमानान्: युद्ध करने वालों को; अवेक्षे: देखूँ; अहम्: मैं; ये: जो; एते: ये; अत्र: यहाँ; समागताः: एकत्र हुए हैं; धार्तराष्ट्रस्य: धृतराष्ट्र के पुत्र (दुर्योधन) के; दुर्बुद्धेः: दुष्ट बुद्धि वाले; युद्धे: युद्ध में; प्रियचिकीर्षवः: प्रिय करने की इच्छा वाले।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

मैं उन योद्धाओं को देखना चाहता हूँ जो दुष्टबुद्धि दुर्योधन का पक्ष लेकर युद्ध में उसे प्रसन्न करने के लिए यहाँ एकत्र हुए हैं।

English Translation

I desire to see those who have assembled here to fight, wishing to please the evil-minded son of Dhritarashtra (Duryodhana).

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन यहाँ दुर्योधन को "दुर्बुद्धि" कहते हैं, जो दर्शाता है कि वे युद्ध के कारण को जानते थे – दुर्योधन का अधर्म। Arjuna calls Duryodhana "evil-minded," indicating his awareness of the adharma behind the war.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।