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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 22

अध्याय 1 · श्लोक 22

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

यावदेतान्निरीक्षेऽहं योद्धुकामानवस्थितान् | कैर्मया सह योद्धव्यमस्मिन्रणसमुद्यमे ||२२||

yāvadetānnirīkṣe'haṃ yoddhukāmānavasthitān | kairmayā saha yoddhavyamasmin raṇasamudyame ||22||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

यावत्: जब तक; एतान्: इनको; निरीक्षे: देखूं; अहम्: मैं; योद्धुकामान्: युद्ध की इच्छा वाले; अवस्थितान्: खड़े हुए; कैः: किनके साथ; मया: मुझे; सह: साथ; योद्धव्यम्: युद्ध करना है; अस्मिन्: इस; रणसमुद्यमे: युद्ध के अवसर में।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

मैं उन योद्धाओं को देखना चाहता हूँ जो युद्ध की इच्छा से यहाँ खड़े हैं और जिनके साथ मुझे इस युद्ध में लड़ना है।

English Translation

Let me see those who have come here to fight, wishing to please the evil-minded Duryodhana by fighting this battle.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन उन सभी योद्धाओं को देखना चाहते हैं जो उनके विरुद्ध लड़ने के लिए एकत्र हुए हैं। Arjuna wants to identify all those who have assembled to fight against him.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।