आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३० PM | सूर्यास्त: ०५:३१ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 21

अध्याय 1 · श्लोक 21

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

हृषीकेशं तदा वाक्यमिदमाह महीपते | सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत ||२१||

hṛṣīkeśaṃ tadā vākyamidamāha mahīpate | senayorubhayormadhye rathaṃ sthāpaya me'cyuta ||21||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

हृषीकेशम्: हृषीकेश (श्रीकृष्ण) से; तदा: तब; वाक्यम्: वचन; इदम्: यह; आह: बोला; महीपते: हे राजन् (धृतराष्ट्र); सेनयोः: दोनों सेनाओं के; उभयोः: दोनों; मध्ये: बीच में; रथम्: रथ; स्थापय: खड़ा कर; मे: मेरा; अच्युत: हे अच्युत।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

तब अर्जुन ने हृषीकेश (श्रीकृष्ण) से यह वचन कहा: हे अच्युत! मेरे रथ को दोनों सेनाओं के बीच में खड़ा कर दीजिए।

English Translation

Arjuna said: O Achyuta (Krishna), place my chariot between the two armies, O lord of the earth (Dhritarashtra is being addressed by Sanjaya).

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन कृष्ण से रथ दोनों सेनाओं के बीच ले जाने को कहते हैं, ताकि वह युद्ध से पहले अपने विरोधियों को देख सकें। Arjuna asks Krishna to place the chariot between the armies so he can observe the combatants.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।