आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 20

अध्याय 1 · श्लोक 20

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अथ व्यवस्थितान्दृष्ट्वा धार्तराष्ट्रान्कपिध्वजः | प्रवृत्ते शस्त्रसम्पाते धनुरुद्यम्य पाण्डवः ||२०||

atha vyavasthitāndṛṣṭvā dhārtarāṣṭrān kapidhvajaḥ | pravṛtte śastrasampāte dhanurudyamya pāṇḍavaḥ ||20||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अथ: उसके बाद; व्यवस्थितान्: युद्ध के लिए तैयार खड़े; दृष्ट्वा: देखकर; धार्तराष्ट्रान्: धृतराष्ट्र के पुत्रों को; कपिध्वजः: कपिध्वज (अर्जुन, जिनके ध्वज पर हनुमान थे); प्रवृत्ते: होने पर; शस्त्रसम्पाते: शस्त्रों के प्रहार का आरंभ; धनु: धनुष; उद्यम्य: उठाकर; पाण्डवः: पाण्डु पुत्र।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

तब शस्त्र-संपात (बाणों की वर्षा) प्रारंभ होने पर, धृतराष्ट्र के पुत्रों को युद्ध के लिए तैयार देखकर, कपिध्वज अर्जुन ने धनुष उठाया।

English Translation

Then, seeing the sons of Dhritarashtra drawn up for battle, as the exchange of weapons was about to begin, Arjuna, the son of Pandu, whose banner bore the emblem of Hanuman, took up his bow.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

युद्ध आरंभ होने के क्षण में अर्जुन ने अपना गांडीव धनुष उठाया, जो आगे के संवाद की भूमिका तैयार करता है। At the moment of commencement, Arjuna takes up his bow, setting the stage for the dialogue.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।