आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 19

अध्याय 1 · श्लोक 19

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

स घोषो धार्तराष्ट्राणां हृदयानि व्यदारयत् | नभश्च पृथिवीं चैव तुमुलो व्यानुनादयन् ||१९||

sa ghoṣo dhārtarāṣṭrāṇāṃ hṛdayāni vyadārayat | nabhaśca pṛthivīṃ caiva tumulo vyanunādayan ||19||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

स: वह; घोष: शब्द; धार्तराष्ट्राणाम्: धृतराष्ट्र के पुत्रों के; हृदयानि: हृदय; व्यदारयत्: विदीर्ण कर दिए; नभ: आकाश; च: और; पृथिवीम्: पृथ्वी; च: और; एव: ही; तुमुल: भयंकर; व्यनुनादयन्: गूंजाते हुए।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

उस भयंकर शब्द ने आकाश और पृथ्वी को गूंजाते हुए धृतराष्ट्र के पुत्रों के हृदय विदीर्ण कर दिए।

English Translation

That tumultuous sound, reverberating through the earth and sky, rent the hearts of Dhritarashtra's sons.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

पाण्डव पक्ष के सामूहिक शंखनाद का प्रभाव कौरवों पर हुआ – उनके हृदय दहल गए। The collective sound of the Pandava conches had a demoralizing effect on the Kauravas.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।