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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 18

अध्याय 1 · श्लोक 18

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

द्रुपदो द्रौपदेयाश्च सर्वशः पृथिवीपते | सौभद्रश्च महाबाहुः शङ्खान्दध्मुः पृथक्पृथक् ||१८||

drupado draupadeyāśca sarvaśaḥ pṛthivīpate | saubhadraśca mahābāhuḥ śaṅkhāndadhmaḥ pṛthak pṛthak ||18||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

द्रुपद: राजा द्रुपद; द्रौपदेयाः: द्रौपदी के पुत्र; च: और; सर्वशः: सभी ने; पृथिवीपते: हे पृथ्वीपति (धृतराष्ट्र); सौभद्र: अभिमन्यु; च: और; महाबाहुः: महाबाहु; शङ्खान्: शंख; दध्मुः: बजाए; पृथक् पृथक्: अलग-अलग।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

द्रुपद, द्रौपदी के पुत्र, और महाबाहु अभिमन्यु – इन सबने अलग-अलग अपने-अपने शंख बजाए।

English Translation

Drupada, the sons of Draupadi, and the mighty-armed son of Subhadra (Abhimanyu), O king, all blew their conches separately.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अब द्रुपद, द्रौपदी के पाँचों पुत्र और अभिमन्यु का शंखनाद हुआ। Now Drupada, the five sons of Draupadi, and Abhimanyu blow their conches.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।