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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 17

अध्याय 1 · श्लोक 17

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः | धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः ||१७||

kāśyaśca parameṣvāsaḥ śikhaṇḍī ca mahārathaḥ | dhṛṣṭadyumno virāṭaśca sātyakiścāparājitaḥ ||17||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

काश्यः: काशीराज; च: और; परमेष्वासः: अत्यंत धनुर्धर; शिखण्डी: शिखण्डी; च: और; महारथः: महारथी; धृष्टद्युम्नः: धृष्टद्युम्न; विराटः: राजा विराट; च: और; सात्यकिः: सात्यकि; च: और; अपराजितः: कभी न हारने वाला।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

काशीराज (अत्यंत धनुर्धर), महारथी शिखण्डी, धृष्टद्युम्न, विराट और अपराजित सात्यकि – इन सबने भी शंख बजाए।

English Translation

The king of Kashi, an excellent archer; the great warrior Shikhandi; Dhrishtadyumna; Virata; and the invincible Satyaki – all blew their conches.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यहाँ पाण्डव पक्ष के अन्य प्रमुख योद्धाओं के शंखनाद का उल्लेख है। Here the other prominent warriors on the Pandava side blow their conches.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।