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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 16

अध्याय 1 · श्लोक 16

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अनन्तविजयं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः | नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ ||१६||

anantavijayaṃ rājā kuntīputro yudhiṣṭhiraḥ | nakulaḥ sahadevaśca sughoṣamaṇipuṣpakau ||16||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अनन्तविजयम्: अनन्तविजय नामक शंख; राजा: राजा; कुन्तीपुत्रः: कुन्तीपुत्र; युधिष्ठिरः: युधिष्ठिर; नकुलः: नकुल; सहदेवः: सहदेव; च: और; सुघोषमणिपुष्पकौ: सुघोष और मणिपुष्पक नामक शंख।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

राजा युधिष्ठिर ने अनन्तविजय, नकुल ने सुघोष और सहदेव ने मणिपुष्पक शंख बजाया।

English Translation

King Yudhishthira, son of Kunti, blew his conch Anantavijaya; Nakula and Sahadeva blew their conches Sughosha and Manipushpaka respectively.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अब शेष पाण्डव भी अपने-अपने शंख बजाते हैं – युधिष्ठिर का अनन्तविजय, नकुल का सुघोष, सहदेव का मणिपुष्पक। The remaining Pandavas also blow their conches.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।