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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 15

अध्याय 1 · श्लोक 15

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनञ्जयः | पौण्ड्रं दध्मौ महाशङ्खं भीमकर्मा वृकोदरः ||१५||

pāñcajanyaṃ hṛṣīkeśo devadattaṃ dhanañjayaḥ | pauṇḍraṃ dadhmau mahāśaṅkhaṃ bhīmakarmā vṛkodaraḥ ||15||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

पाञ्चजन्यम्: पाञ्चजन्य नामक शंख; हृषीकेशः: हृषीकेश (श्रीकृष्ण); देवदत्तम्: देवदत्त; धनञ्जयः: धनंजय (अर्जुन); पौण्ड्रम्: पौण्ड्र; दध्मौ: बजाया; महाशङ्खम्: महाशंख; भीमकर्मा: भयंकर कर्म करने वाला; वृकोदरः: वृकोदर (भीम)।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हृषीकेश (श्रीकृष्ण) ने पाञ्चजन्य, धनंजय (अर्जुन) ने देवदत्त, और भयंकर कर्म करने वाले वृकोदर (भीम) ने पौण्ड्र नामक महाशंख बजाया।

English Translation

Hrishikesha (Krishna) blew the Panchajanya; Arjuna blew the Devadatta; and Bhima, the voracious eater and performer of herculean tasks, blew the great conch Paundra.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यहाँ तीन प्रमुख पाण्डव योद्धाओं के शंखों के नाम दिए गए हैं – कृष्ण का पाञ्चजन्य, अर्जुन का देवदत्त, और भीम का पौण्ड्र। The names of the conches of the three main Pandava warriors are mentioned.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।