आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 14

अध्याय 1 · श्लोक 14

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

ततः श्वेतैर्हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ | माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शङ्खौ प्रदध्मतुः ||१४||

tataḥ śvetairhayairyukte mahati syandane sthitau | mādhavaḥ pāṇḍavaścaiva divyau śaṅkhau pradadhmatuḥ ||14||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

ततः: तब; श्वेतैः: सफेद; हयैः: घोड़ों से; युक्ते: युक्त; महति: विशाल; स्यन्दने: रथ में; स्थितौ: स्थित; माधवः: माधव (श्रीकृष्ण); पाण्डवः: पाण्डव (अर्जुन); च: और; एव: ही; दिव्यौ: दिव्य; शङ्खौ: शंख; प्रदध्मतुः: बजाया।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

तब सफेद घोड़ों से युक्त विशाल रथ पर स्थित माधव (श्रीकृष्ण) और पाण्डव (अर्जुन) ने दिव्य शंख बजाए।

English Translation

Then, from the great chariot yoked with white horses, Madhava (Krishna) and the son of Pandu (Arjuna) blew their divine conches.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अब पाण्डव पक्ष की ओर से भगवान कृष्ण और अर्जुन ने अपने शंख बजाए, जो दिव्य थे। Now Krishna and Arjuna blow their divine conches from the Pandava side.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।