आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 13

अध्याय 1 · श्लोक 13

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

ततः शङ्खाश्च भेर्यश्च पणवानकगोमुखाः | सहसैवाभ्यहन्यन्त स शब्दस्तुमुलोऽभवत् ||१३||

tataḥ śaṅkhāśca bheryaśca paṇavānakagomukhāḥ | sahasaivābhyahanyanta sa śabdastumulo'bhavat ||13||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

ततः: उसके बाद; शङ्खाः: शंख; च: और; भेर्यः: नगाड़े; च: और; पणव: पणव (ढोल); आनक: आनक (मृदंग); गोमुखाः: गोमुख (तुरही); सहसा: अचानक; एव: ही; अभ्यहन्यन्त: बजाए गए; स: वह; शब्दः: शब्द; तुमुलः: भयंकर; अभवत्: हो गया।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

उसके बाद अचानक ही शंख, नगाड़े, ढोल, मृदंग और तुरही आदि बजाए गए और वह शब्द अत्यंत भयंकर हो गया।

English Translation

After that, conches, kettledrums, cymbals, drums, and trumpets were suddenly sounded, and the combined sound was tumultuous.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भीष्म के शंख के बाद कौरव सेना के सभी वाद्य यंत्र एक साथ बज उठे, जिससे वातावरण युद्धोन्माद से भर गया। After Bhishma's conch, all instruments of the Kaurava army played together, creating a tumultuous sound.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।