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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 12

अध्याय 1 · श्लोक 12

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

तस्य सञ्जनयन्हर्षं कुरुवृद्धः पितामहः | सिंहनादं विनद्योच्चैः शङ्खं दध्मौ प्रतापवान् ||१२||

tasya sañjanayan harṣaṃ kuruvṛddhaḥ pitāmahaḥ | siṃhanādaṃ vinadyoccaiḥ śaṅkhaṃ dadhmau pratāpavān ||12||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

तस्य: उस (दुर्योधन) के; सञ्जनयन्: उत्पन्न करते हुए; हर्षम्: हर्ष; कुरुवृद्धः: कुरुवंश के वृद्ध; पितामहः: पितामह; सिंहनादम्: सिंह की गर्जना के समान; विनद्य: गर्जना करके; उच्चैः: ऊँचे स्वर से; शङ्खम्: शंख; दध्मौ: बजाया; प्रतापवान्: प्रतापी।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

तब कुरुवंश के वृद्ध पितामह प्रतापी भीष्म ने सिंह की गर्जना के समान ऊँचे स्वर से शंख बजाया, जिससे दुर्योधन को हर्ष हुआ।

English Translation

Then the glorious grandsire of the Kuru dynasty, Bhishma, roaring like a lion, blew his conch loudly, infusing joy in Duryodhana.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भीष्म ने अपने शंखनाद से युद्ध का आह्वान किया और दुर्योधन का मनोबल बढ़ाया। Bhishma's conch signaled the start of war and boosted Duryodhana's spirits.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।