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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 11

अध्याय 1 · श्लोक 11

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अयनेषु च सर्वेषु यथाभागमवस्थिताः | भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्तः सर्व एव हि ||११||

ayaneṣu ca sarveṣu yathābhāgamavasthitāḥ | bhīṣmamevābhirakṣantu bhavantaḥ sarva eva hi ||11||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अयनेषु: मोर्चों पर; च: और; सर्वेषु: सब; यथाभागम्: यथायोग्य विभाग में; अवस्थिताः: स्थित होकर; भीष्मम्: भीष्म को; एव: ही; अभिरक्षन्तु: पूरी तरह सुरक्षित करें; भवन्तः: आप लोग; सर्व: सभी; एव: ही; हि: निश्चय ही।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

अतः सब मोर्चों पर यथायोग्य स्थित होकर आप सब लोग भीष्म की ही सुरक्षा करें।

English Translation

Therefore, stationed in your respective positions on all fronts, all of you must protect Bhishma at all costs.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

दुर्योधन यहाँ अपने सैनिकों को निर्देश देता है कि वे भीष्म की रक्षा पर ध्यान दें, क्योंकि भीष्म ही उनकी सेना के मुख्य आधार हैं। Duryodhana orders everyone to protect Bhishma, recognizing him as the cornerstone of their army.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।