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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 10

अध्याय 1 · श्लोक 10

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अपर्याप्तं तदस्माकं बलं भीष्माभिरक्षितम् | पर्याप्तं त्विदमेतेषां बलं भीमाभिरक्षितम् ||१०||

aparyāptaṃ tadasmākaṃ balaṃ bhīṣmābhirakṣitam | paryāptaṃ tvidameteṣāṃ balaṃ bhīmābhirakṣitam ||10||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अपर्याप्तम्: अपरिमित; तत्: वह; अस्माकम्: हमारी; बलम्: सेना; भीष्म: भीष्म द्वारा; अभिरक्षितम्: सुरक्षित; पर्याप्तम्: परिमित; तु: तो; इदम्: यह; एतेषाम्: इन (पाण्डवों) की; बलम्: सेना; भीम: भीम द्वारा; अभिरक्षितम्: सुरक्षित।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

भीष्म द्वारा सुरक्षित हमारी सेना अपरिमित है, जबकि भीम द्वारा सुरक्षित इनकी सेना परिमित है।

English Translation

Our army, protected by Bhishma, is unlimited; but their army, protected by Bhima, is limited.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

दुर्योधन यहाँ आत्मविश्वास दिखा रहा है कि भीष्म जैसे योद्धा के कारण उसकी सेना अजेय है, जबकि पाण्डव सेना सीमित है। Duryodhana expresses confidence in Bhishma's protection, though his comparison is flawed because Bhima is also a great warrior.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।