krishna

Main To Radhe Radhe Bolungi Kanha Sang Holi Khelungi Lyrics (मैं तो राधे राधे बोलूँगी कान्हा संग होली खेलूँगी) – Holi Bhajan 2026

159 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
आकार:
कंट्रास्ट:

प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🙏 मैं तो राधे राधे बोलूँगी – कान्हा संग होली खेलूँगी

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

(Main To Radhe Radhe Bolungi Kanha Sang Holi Khelungi Lyrics In Hindi) – Holi Bhajan 2026

राधा-कृष्ण होली भजन

विवरण एवं मुख्य बिंदु

🎤 शैली:होली भजन / राधा-कृष्ण भजन
🏷️ श्रेणी:उत्सव भजन, फाग
📍 भाव:उल्लास, प्रेम, भक्ति

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

मैं तो, राधे राधे बोलूँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ॥
मैं तो, राधे राधे बोलूंगी,
मोहना संग, होली खेलूँगी ॥
कान्हा संग, होली खेलूँगी ।
मोहना संग, होली खेलूँगी ।
मैं तो, राधे राधे, बोलूँगी...

॥ अंतरा १ - नंद गाँव ॥

इक्क दिन, खेलूँगी, नंद गाँव में ।
नंद, गाँव में जी, नंद गाँव में ।
इक्क दिन, खेलूँगी, नंद गांव में ।
माँ, यशोदा से, मिल के आऊँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ।
मैं तो, राधे राधे, बोलूँगी...

॥ अंतरा २ - बरसाने ॥

इक्क दिन, खेलूँगी, बरसाने में ।
बरसाने में जी, बरसाने में ।
इक्क दिन, खेलूँगी, बरसाने में ।
राधा, प्यारी से, मिल के आऊँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ।
मैं तो, राधे राधे, बोलूँगी...

॥ अंतरा ३ - गोवर्धन ॥

इक्क दिन, खेलूँगी, गोवर्धन में ।
गो,वर्धन में जी, गोवर्धन में,
इक्क दिन, खेलूँगी गोवर्धन में ।
गिरी, राज के, दर्शन पाऊँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ।
मैं तो, राधे राधे, बोलूँगी...

॥ अंतरा ४ - बृज मंडल ॥

इक्क दिन, खेलूँगी, बृज मंडल में ।
बृज, मंडल में जी, बृज मंडल में ।
इक्क दिन, खेलूँगी, बृज मंडल में ।
परि, क्रमा, करके आऊँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ।
मैं तो, राधे राधे, बोलूँगी...

॥ अंतरा ५ - वृन्दावन ॥

इक्क दिन, खेलूँगी, वृन्दावन में ।
वृन्दावन में जी, वृन्दावन में ।
इक्क दिन, खेलूँगी, वृन्दावन में ।
बिहारी जी को, रंग लगाऊँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ।
मैं तो, राधे राधे, बोलूँगी...

॥ अंतरा ६ - गोकुल ॥

इक्क दिन, खेलूँगी, मैं गोकुल में ।
मैं गोकुल में, मैं गोकुल में ।
इक्क दिन, खेलूँगी, मैं गोकुल में ।
नंद, बाबा से, मिल के आऊँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ।
मैं तो, राधे राधे, बोलूँगी...

॥ अंतरा ७ - दाऊ जी ॥

इक्क दिन, खेलूँगी, दाऊ जी में ।
दाऊ, जी में बल, दाऊ जी में ।
इक्क दिन, खेलूँगी, दाऊ जी में ।
बल, राम जी से, मिलके आऊँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ।
मैं तो, राधे राधे, बोलूँगी...

मैं तो, राधे राधे बोलूँगी,
कान्हा संग, होली खेलूँगी ॥
मैं तो, राधे राधे बोलूंगी,
मोहना संग, होली खेलूँगी ॥

📤 अपलोडर :- अनिल रामूर्ति, भोपाल

Uploader: Anil Ramurthy, Bhopal

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह होली भजन "मैं तो राधे राधे बोलूँगी, कान्हा संग होली खेलूँगी" एक भक्त की उत्कट अभिलाषा को दर्शाता है जो राधा-कृष्ण के साथ होली खेलने की कल्पना कर रहा है। भक्त कहता है कि वह "राधे राधे" बोलेगा और कान्हा (मोहना) के साथ होली खेलेगा।

"इक्क दिन, खेलूँगी, नंद गाँव में" – भक्त की इच्छा है कि वह एक दिन नंद गाँव में जाकर माँ यशोदा से मिले और फिर कान्हा के साथ होली खेले। इसी प्रकार वह बरसाने (राधा रानी का गाँव), गोवर्धन, बृज मंडल, वृन्दावन, गोकुल और दाऊ जी (बलराम जी) के स्थान पर जाना चाहता है।

"बिहारी जी को, रंग लगाऊँगी" – वृन्दावन में वह बिहारी जी (ठाकुर जी) को रंग लगाएगी। हर स्थान पर वह वहाँ के प्रमुख देवता या व्यक्तित्व से मिलकर उनका आशीर्वाद लेना चाहती है और फिर कान्हा के साथ होली खेलने की कल्पना करती है।

यह भजन ब्रज के सभी प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा का मानसिक चित्रण है और होली के उल्लास को राधा-कृष्ण की लीलाओं से जोड़ता है।

🔍 होली भजन का विशेष महत्त्व

ब्रज के सात पवित्र स्थानों की यात्रा: इस भजन में भक्त ब्रज के सात प्रमुख स्थलों - नंद गाँव, बरसाना, गोवर्धन, बृज मंडल, वृन्दावन, गोकुल और दाऊ जी (बलराम जी के स्थान) की यात्रा की कल्पना करता है। प्रत्येक स्थान राधा-कृष्ण की लीलाओं से जुड़ा है।

"राधे राधे" का नाम जप: पूरे भजन में "राधे राधे" का नाम लेने पर बल दिया गया है। यह बताता है कि राधा नाम का स्मरण ही कृष्ण तक पहुँचने का मार्ग है और उनके साथ होली खेलने की अभिलाषा को पूरा करता है।

होली का उल्लास: होली के अवसर पर गाए जाने वाले इस भजन में रंग-गुलाल, उमंग और उत्साह का भाव है। "बिहारी जी को रंग लगाऊँगी" पंक्ति इस उल्लास को और बढ़ाती है।

परिक्रमा की भावना: "परि, क्रमा, करके आऊँगी" पंक्ति ब्रज मंडल की परिक्रमा के महत्व को दर्शाती है। भक्त ब्रज की यात्रा करके ही कान्हा के साथ होली खेलना चाहता है।

अनिल रामूर्ति द्वारा अपलोड: यह भजन भोपाल निवासी अनिल रामूर्ति द्वारा साझा किया गया है, जो ब्रज भक्ति परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं।

💖 ब्रज की होली का उल्लास

🎯 संदेश

इस भजन का मूल संदेश यह है कि सच्चे भक्त की अभिलाषा होती है कि वह ब्रज के सभी पवित्र स्थानों की यात्रा करे और वहाँ राधा-कृष्ण के साथ होली के उल्लास में सम्मिलित हो। "राधे राधे" का नाम जपते हुए वह इस भावना को साकार करता है।

✨ भक्ति और उत्सव का संगम

मैं तो राधे राधे बोलूँगी कान्हा संग होली खेलूँगी केवल एक होली भजन नहीं, बल्कि भक्ति और उत्सव के अद्भुत संगम का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि भगवान के प्रति प्रेम को उत्सव के रूप में भी व्यक्त किया जा सकता है और होली जैसे पर्व पर यह भाव और अधिक प्रबल हो जाता है।

🙏 राधे राधे !! ब्रज की होली की जय !! श्री राधा-कृष्ण की जय !!

॥ ब्रज होली भजन ॥
॥ मैं तो राधे राधे बोलूँगी, कान्हा संग होली खेलूँगी ।।

Uploader: Anil Ramurthy, Bhopal

साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "Main To Radhe Radhe Bolungi Kanha Sang Holi Khelungi Lyrics (मैं तो राधे राधे बोलूँगी कान्हा संग होली खेलूँगी) – Holi Bhajan 2026" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।

भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।

राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?

हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 20 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!