फागण में खोखा 4 लागे से
श्याम बाबा श्याम बाबा घणा होशियार लागे से
फागण की त्यारी में खोखा चार लागे स ॥
खाटूवालो श्याम धणी को भोत बड़ो दरबार
फागण मेलो खर्चोलो है खर्चो बेसुमार
काई बोलूं मैं-२ तूँ समझदार लागे स ॥
ठाट बाट स ना जावा तो हो जावे हल्काई
फागण म नहीं नोट उड़वा हो जावे लोग हसाई
तेरे भक्ता की -2 भरमार लागे स ॥
श्याम धणी म्हारो समझ इशारों मतना मुंह खुलवाओ
नहीं बुलाना हो तो कहदे म्हासू क्यों नटववे
बिना पीसा क -2 सब बेकार लागे स ।
क्या ताई म्हारी खोव बाबा, क्या ताई थारी खोव
पिसा को तो काम सावरा, पिसा स ही होवे
दुनिया जाण -2 इज्जतदार लागे स ॥
या मत सोच सेठ सावरा खोखा चार ज्यादा
इतना से मेरो काम चलेना, मैं हूँ सीधा साधा
मिलण ताई दिल -2 बिकार लागे से
हर ग्यारस बारस को खर्चा साराएम आगया
शरम चढ़ बनवारी थासू फेर दुबारा मांग्या
केवल तू ही श्याम रिश्तेदार लागे से
गायक: विकास झा (79806 72853)
लेखक: जय शंकर चौधरी जी
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह एक लोकप्रिय हरियाणवी/राजस्थानी शैली का खाटू श्याम भजन है, जो फाल्गुन (फागण) माह में लगने वाले मेले और उससे जुड़े खर्चों के संदर्भ में रचा गया है। भक्त विनोदी अंदाज में श्याम बाबा से संवाद करता है – "फागण की त्यारी में खोखा चार लागे स" यानी फाल्गुन की तैयारी में चार नोट (पैसे) तो लग ही जाते हैं।
भजन में भक्त कहता है कि खाटू वाले श्याम का दरबार बहुत बड़ा है और फागुन के मेले में खर्चा बेहिसाब है। वह श्याम से निवेदन करता है कि बिना पैसे के सब बेकार है, पैसे से ही काम होता है और दुनिया में इज्जत मिलती है। अंत में वह कहता है कि हर एकादशी-द्वादशी पर खर्चा आ ही जाता है, इसलिए थोड़ा शर्म आने के बावजूद उसे दोबारा मांगना पड़ता है – और इस रिश्ते में केवल श्याम ही उसके सच्चे रिश्तेदार हैं। यह भजन भक्ति के साथ-साथ जीवन की व्यावहारिक समस्याओं को हल्के-फुल्के अंदाज में प्रस्तुत करता है।
🎵 गायक: विकास झा | लेखक: जय शंकर चौधरी
विकास झा लोकप्रिय भोजपुरी और राजस्थानी लोक गायक हैं, जिनकी गाई भक्ति रचनाएँ विशेषकर खाटू श्याम भक्तों में बेहद प्रिय हैं। उनकी दमदार आवाज और अभिव्यक्ति शैली भजनों को जीवंत बना देती है। जय शंकर चौधरी जी एक सुपरिचित गीतकार हैं, जिन्होंने कई लोकप्रिय श्याम भजनों की रचना की है। इस भजन में उन्होंने फागुन के त्योहार और आर्थिक चिंताओं के मिश्रण से एक अनोखा और मनोरंजक भजन लिखा है।