Parvati Stotram

मेरी सुबह भी तूँ माता मेरी शाम भी तू माता लिरिक्स (Meri subah bhi tu mata Lyrics in Hindi) - Sherawali ma Bhajan - Bhaktilok

314 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

माँ भवानी की संजीवनी भक्ति यज्ञ

इस भजन के माध्यम से माँ की अनुकंपा और प्रेम का अनुभव करें, उनके चरणों में समर्पण करें।

मेरी सुबह भी तू माता, मेरी शाम भी तू माता, तेरे बिन कोई नहीं, ये तेरा ही है साया। तेरे पाँवों में मैं साक्षात्, सच्चिदानंद का रस, तू है सृष्टि की विधाता, ये तेरा ही है फर्ज। बाहर जहां देखूं, तेरा ही है नज़ारा, जब तू संग हो, जीवन खिलता जैसे नयारा। तेरे दर से जो निकला, सच्ची भक्ति का साथी, माता तू कृपा करे, दे हम सबको लक्ष्मी। तेरी भक्ति की रौशनी, मैं हर ओर फैलाऊँ, तेरे चरणों में पहुँचकर, मैं सदा सुख पाऊँ। माँ तू मेरी दया है, तू ही मेरा सुख है, तेरे बिना कोई नहीं, तू ही मेरा सब कुछ है।
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का प्राथमिक विषय माता दुर्गा की महिमा का गान करना है। इसके बोल भक्त की अटूट श्रद्धा और भक्ति को प्रकट करते हैं। 'मेरी सुबह भी तू माता, मेरी शाम भी तू माता' से यह स्पष्ट होता है कि भक्ति का यह रत्न हर क्षण में माँ की उपस्थिति को अनुभव करता है। यह भजन बताता है कि जीवन की शुरुआत और अंत दोनों में माँ का साया है। जब भक्त कहता है 'तेरे बिन कोई नहीं', तो वह यह स्वीकारता है कि माँ ही उसके जीवन का आधार और प्रेरणा हैं। यह भाव हर लाइन में गूंजता है कि माँ सृष्टि की विधाता हैं और उन्हें प्रणाम करते हुए भक्त अपने हृदय को पूर्णता का अनुभव करते हैं। माता की कृपा के बिना कोई आत्मिक सुख की साधना संभव नहीं है।

इस भजन में भक्त की भावनाएँ गहरी होती हैं, जो जीवन की कठिनाइयों में भी माँ की उपस्थिति की अनुभूति कराती हैं। 'बाहर जहां देखूं, तेरा ही है नज़ारा' का भाव यह दर्शाता है कि जीवन का हर दृश्य माँ का ही दिया हुआ है। जब भक्त कहता है कि 'जब तू संग हो, जीवन खिलता जैसे नयारा', तो यह स्पष्ट होता है कि माँ का आशीर्वाद भक्त के जीवन में खुशियों का संचार करता है। यह भक्ति ना केवल कठिन समय में आश्रय देती है, बल्कि सुख में भी सच्चे मित्र का संज्ञान कराती है। माता की महिमा में भक्त अपनी सारी चिंताओं को भुलाकर सिर्फ माँ की कृपा को अनुभव करता है।

गहन तात्त्विक दृष्टि से देखा जाए तो यह भजन भक्ति मार्ग पर आधारित है, जो भक्त के हृदय में मां की महिमा का पता लगाता है। 'तेरे पाँवों में मैं साक्षात्, सच्चिदानंद का रस' का अर्थ है माता की दिव्यता में पूर्ण समर्पण। यह दर्शाता है कि भगवान की भक्ति करते समय भक्त को अपने अहंकार को छोड़कर समर्पण में आना चाहिए। यह भी दर्शाता है कि सच्चिदानंद की अनुभूति उनके चरणों में ही संभव है। भक्ति का यह मार्ग अहंकार को समाप्त करता है और प्रेम एवं श्रद्धा से जीवन को समर्पित करने की प्रेरणा देता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व शास्त्रों में भी प्रतिपादित होता है। देवी पुराण और देवी भागवत में माँ दुर्गा की अनुकंपा के माध्यम से भक्तों को आशीर्वाद देने की बात कही गई है। देवी का उपासना, विशेषकर Navaratri के समय, भक्तों को मानसिक और आध्यात्मिक शक्तियों से भर देती है। जब भक्त माँ से प्रार्थना करता है, तो वह अध्यात्म के पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा पाता है। इस भजन में माँ का गुणगान करते हुए भक्त अपने हृदय में भक्ति का दीप जलाता है, जिससे उसे सच्चे सुख की प्राप्ति होती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जप करने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और स्वास्थ्य में सुधार की प्राप्ति होती है। माँ दुर्गा की कृपा से भक्त का जीवन मंगलमय हो जाता है। नियमित रूप से इस भजन का गायन करने से भक्ति का एक अद्भुत अनुभव होता है और यह चिंताओं को दूर कर, सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का गायन सुबह या शाम को करना अत्यंत लाभकारी होता है। पूजा की पूजा स्थल में दीप जलाना, फूल और मिठाई का भोग अर्पित करना चाहिए। ध्यान रखें कि गायन करते समय एकाग्रता और भक्ति का भाव मन में दृढ़ होना चाहिए। शरीर को सीधा रखकर मन को शांत कर, ध्यान केन्द्रित करके माँ का स्मरण करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या यह भजन रोज गा सकते हैं?

हाँ, इस भजन को रोजाना गाने से माँ की कृपा प्राप्त होती है और मन को शांति मिलती है।

क्या इस भजन का कोई विशेष अवसर है?

इस भजन का गायन नवरात्रि में विशेष रूप से सौभाग्य लेकर आता है।

क्या इस भजन का प्रभाव जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में होता है?

जी हाँ, इस भजन का नियमित जप करने से सकारात्मक बदलाव, मानसिक शांति, और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Sep 2026

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