Parvati Stotram

दीनानाथ मेरी बात छानी कोणी तेरे से लिरिक्स (Dinanath Meri Baat Chani Koni Tere Se Lyrics in Hindi) - Khatu SHyam Bhajan - Bhaktilok

176 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

दीनानाथ मेरी बात छानी कोणी तेरे से

दीनानाथ मेरी बात छानी कोणी तेरे से

आँखड़ली चुराकर बाबा जासी कठे मेरे से

आँखड़ली चुराकर बाबा जासी कठे मेरे से


दीनानाथ मेरी बात छानी कोणी तेरे से

आँखड़ली चुराकर बाबा जासी कठे मेरे से


खाटू वाले श्याम तेरी शरण में आ गयो

श्याम प्रभु रूप तेरो नैणां में समां गयो

बिसरावे मत बाबा हार मानी तेरे से

आँखड़ली चुराकर बाबा जासी कठे मेरे से


दीनानाथ मेरी बात छानी कोणी तेरे से

आँखड़ली चुराकर बाबा जासी कठे मेरे से


बालक हूँ मैं तेरो श्याम मुझको निभायले

दुखड़े को मारयो मन कालजे लगायले

पथ दिखलादे बाबा काढ़ दे अँधेरे से

आँखड़ली चुराकर बाबा जासी कठे मेरे से


दीनानाथ मेरी बात छानी कोणी तेरे से

आँखड़ली चुराकर बाबा जासी कठे मेरे से


मुरली अधर पे कदम तल झूमे हैं

भक्त खड़ा तेरे चरणां ने चूमे हैं

खाली हाथ बोल कया जाऊ तेरे-नेरे से

आँखड़ली चुराकर बाबा जासी कठे मेरे से


दीनानाथ मेरी बात छानी कोणी तेरे से

आँखड़ली चुराकर बाबा जासी कठे मेरे से


खाओ हो थे खीर चूरमो लीले ऊपर घूमो हो

सेवका न बाबा थे क़द्दे ही कोनी भूलो हो

टाबरियाँ की झोली भर भेजो थारे डेरे से

आँखडली चुरा के बाबा जासी कठे मेरे से


दीनानाथ मेरी बात छानी कोनी तेरे से

आँखडली चुराकर बाबा जासी कठे मेरे से ||

दीनानाथ मेरी बात छानी कोणी तेरे से लिरिक्स (Dinanath Meri Baat Chani Koni Tere Se Lyrics in English) - 

deenaanaath meree baat achchhee hai tumase

deenaanaath meree baat achchhee hai tumase

aankh churaee baaba jaisee kaahe mere se

aankh churaee baaba jaisee kaahe mere se


deenaanaath meree baat achchhee hai tumase

aankh churaee baaba jaisee kaahe mere se


khaatoo vaale shyaam tere sharan mein aa gayo

shyaam prabhu roop tero nainan mein samaan gayo

bisaraave mat baaba haar man tere se

aankh churaee baaba jaisee kaahe mere se


deenaanaath meree baat achchhee hai tumase

aankh churaee baaba jaisee kaahe mere se


bachcha main tero shyaam mujhako khelaayale

dukhade ko maarayo man kaalaje lagaayale

path dikhalaade baaba kathin de andhere se

aankh churaee baaba jaisee kaahe mere se


deenaanaath meree baat achchhee hai tumase

aankh churaee baaba jaisee kaahe mere se


muralee aadhaar pestep taal jhoome hain

bhakt khade ho gae tere charan ne kaha hain

khaalee haath bol kaaya jaoo tere-nere se

aankh churaee baaba jaisee kaahe mere se


deenaanaath meree baat achchhee hai tumase

aankh churaee baaba jaisee kaahe mere se


khao ho the khed chooramo leele oopar ghoomo ho

sevaka na baaba the qaadade hee konee bhoolo ho

tabariyon kee jholee bhar bhejo thaare dere se

aaeedalee churaee ke baaba jaisee kathe mere se


deenaanaath meree baat achchhee konee tumase

aaeedalee churaekar baaba jaisee kaahe mere se ||


 

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "दीनानाथ मेरी बात छानी कोणी तेरे से लिरिक्स (Dinanath Meri Baat Chani Koni Tere Se Lyrics in Hindi) - Khatu SHyam Bhajan - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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