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राधा चालीसा लिरिक्स (Radha Chalisa Lyrics in Hindi)- Bhaktilok

64 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

Bhaktilok

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

राधा चालीसा लिरिक्स

।। दोहा ।।

श्री राधे वुषभानुजा, भक्तनि प्राणाधार ।

वृन्दाविपिन विहारिणी, प्रानावौ बारम्बार ।।

जैसो तैसो रावरौ, कृष्ण प्रिय सुखधाम ।

चरण शरण निज दीजिये, सुन्दर सुखद ललाम ।।

।। चौपाई ।।

जय वृषभानु कुँवरी श्री श्यामा ।

कीरति नंदिनी शोभा धामा ।।

नित्य बिहारिनी रस विस्तारिणी।

अमित मोद मंगल दातारा ।।

राम विलासिनी रस विस्तारिणी।

सहचरी सुभग यूथ मन भावनी ।।

करुणा सागर हिय उमंगिनी।

ललितादिक सखियन की संगिनी ।।

दिनकर कन्या कुल विहारिनी।

कृष्ण प्राण प्रिय हिय हुलसावनी ।।

नित्य श्याम तुमररौ गुण गावै।

राधा राधा कही हरशावै ।।

मुरली में नित नाम उचारें।

तुम कारण लीला वपु धारें ।।

प्रेम स्वरूपिणी अति सुकुमारी।

श्याम प्रिया वृषभानु दुलारी ।।

नवल किशोरी अति छवि धामा।

द्दुति लधु लगै कोटि रति कामा ।।

गोरांगी शशि निंदक वंदना।

सुभग चपल अनियारे नयना ।।

जावक युत युग पंकज चरना।

नुपुर धुनी प्रीतम मन हरना ।।

संतत सहचरी सेवा करहिं।

महा मोद मंगल मन भरहीं ।।

रसिकन जीवन प्राण अधारा।

राधा नाम सकल सुख सारा ।।

अगम अगोचर नित्य स्वरूपा।

ध्यान धरत निशिदिन ब्रज भूपा ।।

उपजेउ जासु अंश गुण खानी।

कोटिन उमा राम ब्रह्मिनी ।।

नित्य धाम गोलोक विहारिन।

जन रक्षक दुःख दोष नसावनि ।।

शिव अज मुनि सनकादिक नारद।

पार न पाँई शेष शारद ।।

राधा शुभ गुण रूप उजारी।

निरखि प्रसन होत बनवारी ।।

ब्रज जीवन धन राधा रानी।

महिमा अमित न जाय बखानी ।।

प्रीतम संग दे ई गलबाँही।

बिहरत नित वृन्दावन माँहि ।।

राधा कृष्ण कृष्ण कहैं राधा।

एक रूप दोउ प्रीति अगाधा ।।

श्री राधा मोहन मन हरनी।

जन सुख दायक प्रफुलित बदनी ।।

कोटिक रूप धरे नंद नंदा।

दर्श करन हित गोकुल चंदा ।।

रास केलि करी तुहे रिझावें।

मन करो जब अति दुःख पावें ।।

प्रफुलित होत दर्श जब पावें।

विविध भांति नित विनय सुनावे ।।

वृन्दारण्य विहारिनी श्यामा।

नाम लेत पूरण सब कामा ।।

कोटिन यज्ञ तपस्या करहु।

विविध नेम व्रतहिय में धरहु ।।

तऊ न श्याम भक्तहिं अहनावें।

जब लगी राधा नाम न गावें ।।

व्रिन्दाविपिन स्वामिनी राधा।

लीला वपु तब अमित अगाधा ।।

स्वयं कृष्ण पावै नहीं पारा।

और तुम्हैं को जानन हारा ।।

श्री राधा रस प्रीति अभेदा।

सादर गान करत नित वेदा ।।

राधा त्यागी कृष्ण को भाजिहैं।

ते सपनेहूं जग जलधि न तरिहैं ।।

कीरति हूँवारी लडिकी राधा।

सुमिरत सकल मिटहिं भव बाधा ।।

नाम अमंगल मूल नसावन।

त्रिविध ताप हर हरी मनभावना ।।

राधा नाम परम सुखदाई,

भजतहीं कृपा करहिं यदुराई ।।

यशुमति नंदन पीछे फिरेहै,

जी कोऊ राधा नाम सुमिरिहै ।।

रास विहारिनी श्यामा प्यारी,

करहु कृपा बरसाने वारी ।।

वृन्दावन है शरण तिहारी।

जय जय जय वृषभानु दुलारी ।।

।। दोहा ।।

श्री राधा सर्वेश्वरी, रसिकेश्वर धनश्याम ।

करहूँ निरंतर बास मै, श्री वृन्दावन धाम ।।

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "राधा चालीसा लिरिक्स (Radha Chalisa Lyrics in Hindi)- Bhaktilok" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।

भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।

राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?

हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 19 Sep 2026

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