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Krishna Bhajan

ब्रज रस भजन लिरिक्स – बी प्राक | हरि रस बैठक (पूरा हिंदी भजन) | Braj Ras Bhajan B Praak Hari Ras Baithak Lyrics

895 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🙏 ब्रज रस भजन – राधे-राधे गोविन्द राधे

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(बी प्राक – हरि रस बैठक) – पूरा हिंदी भजन

🎵 राधे-राधे गोविन्द राधे – श्याम सुन्दर – वृन्दावन धाम – प्रेम भक्ति का रस

📝 भजन विवरण

🎤 गायक/रचनाकार: बी प्राक (B Praak) – हरि रस बैठक
🏷️ श्रेणी: ब्रज रस भजन / राधा-कृष्ण भक्ति
🎶 भाव: प्रेम, समर्पण, रास, आनंद
📀 विशेषता: राधा-कृष्ण के युगल स्वरूप, वृन्दावन धाम, बरसाना, और पूर्ण समर्पण का अद्भुत संगम

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

राधे-राधे गोविन्द राधे, राधे।
राधे-राधे गोविन्द राधे, राधे।
राधे-राधे गोविन्द राधे, राधे।
राधे-राधे गोविन्द राधे, राधे॥
सा ग म प, मा प नि ध नि प,
मा प नि ध नि म, आ...
नि सा ग म प, मा प नि ध नि प,
मा प नि ध नि म, आ...

मैं तेरे, सिर सिरहाना बन जाऊँ,
तू राधा, मैं कान्हा बन जाऊँ।
तू मेरी दीवानी बन जाए,
मैं तेरा दीवाना बन जाऊँ॥

हो, रखा ही क्या है तेरे-मेरे शहरों में,
वृन्दावन चल सखी कृष्ण के पैरों में।
वो ही नदी, वो ही दरिया,
वो स्वर्गों का ज़रिया, वो इसकी ही माया है।
रातों के तारे वारे सारे, ये पानी के किनारे,
वो चाँद लेके आया है॥

तेरी भूख में खाना बन जाऊँ,
तू शमा, मैं परवाना बन जाऊँ।
तू मेरी दीवानी बन जाए,
मैं तेरा दीवाना बन जाऊँ॥

राधे-राधे गोविन्द राधे, राधे।
राधे-राधे गोविन्द राधे, राधे।
राधे-राधे गोविन्द राधे, राधे।
राधे-राधे गोविन्द राधे, राधे॥

जय-जय राधा रमण हरि बोल,
प्यारो राधा रमण हरि बोल।
जय-जय राधा, राधा,
जय-जय राधा, राधा।
जय-जय राधा रमण हरि बोल,
प्यारो राधा रमण हरि बोल॥

श्याम-श्याम सुन्दर, राधे,
श्याम-श्याम सुन्दर, राधे,
श्यामा-श्याम सुन्दर राधे॥
श्याम सुन्दर, श्याम सुन्दर राधे,
श्याम-श्याम सुन्दर, राधे,
श्याम-श्याम सुन्दर, राधे,
श्यामा-श्याम सुन्दर राधे॥

जय-जय राधे, जय-जय श्याम,
जय-जय श्री वृन्दावन धाम।
जय-जय श्री वृन्दावन धाम॥
श्याम-श्याम सुन्दर, राधे,
श्याम-श्याम सुन्दर, राधे,
श्यामा-श्याम सुन्दर राधे॥

श्यामा प्यारी, कुंज बिहारी,
जय-जय श्री हरिदास दुलारी।
श्यामा प्यारी, कुंज बिहारी,
जय-जय श्री हरिदास दुलारी॥

मन भूल मत जइयो,
राधा रानी के चरण,
राधा रानी के चरण,
महारानी के चरण।
मन भूल मत जइयो,
राधा रानी के चरण॥
राधे-राधे गोविन्द, गोविन्द राधे,
राधे-राधे गोविन्द, गोविन्द राधे।
मन भूल मत जइयो,
राधा रानी के चरण॥

यशोदा नंदन लाल की जय हो।
बाँके बिहारी लाल की जय हो।
राधा बल्लभ लाल की जय हो।
राधा रमण जू लाल की जय हो।
वृषभानु की किशोरी की जय हो।
वृषभानु के जमाई की जय हो।
वृन्दावन धाम की जय हो।
बरसाना धाम की जय हो॥

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
तुझसे ही धरती है,
तुझसे ही अम्बर है।
तेरे इस रूप से ही
रोशन संसार है।
मुझको भी अपना बना ले,
अपने नैनों में बसा ले,
रंग-रंग जाऊँ तेरे रंग में,
अब कोई न मेरे संग में।
मेरा हाथ थाम ले, तू संभाल ले,
ओ जग के पालनहार॥
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा॥

हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे-हरे,
हरे राम, हरे राम, राम राम हरे-हरे।
हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे-हरे,
हरे राम, हरे राम, राम राम हरे-हरे॥

🎵 गायक/रचनाकार : बी प्राक (B Praak) – हरि रस बैठक

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह ब्रज रस में रचित अत्यंत भावपूर्ण भजन है, जिसे बी प्राक ने हरि रस बैठक के अंतर्गत प्रस्तुत किया है। भजन राधा-कृष्ण के प्रेम, वृन्दावन की दिव्यता और शरणागति के भाव से ओतप्रोत है। “राधे-राधे गोविन्द राधे” के जाप से वातावरण भक्तिमय हो जाता है। संगीत में सरगम (सा ग म प...) का प्रयोग इसे और भी रसमय बनाता है।

पहले अंतरे में भक्त कहता है – “मैं तेरे सिर सिरहाना बन जाऊँ, तू राधा, मैं कान्हा बन जाऊँ” – वह कृष्ण के सिरहाने (तकिया) के रूप में सेवा करना चाहता है, और राधा-कृष्ण के युगल रूप में लीन हो जाना चाहता है। वह कृष्ण का दीवाना बनना चाहता है।

दूसरे अंतरे में – “वृन्दावन चल सखी कृष्ण के पैरों में” – शहरों की माया छोड़कर वृन्दावन जाने का आग्रह। वही नदी, दरिया, स्वर्गों का ज़रिया – सब वृन्दावन की महिमा है। चाँद भी वहाँ आया है।

तीसरे अंतरे में – “तेरी भूख में खाना बन जाऊँ, तू शमा, मैं परवाना बन जाऊँ” – पूर्ण समर्पण और प्रेम की मशाल का भाव।

भजन के मध्य में राधा-कृष्ण के विभिन्न नामों का जयघोष है – राधा रमण हरि, श्याम सुन्दर, राधा वल्लभ लाल, बाँके बिहारी। वृन्दावन धाम और बरसाना धाम की जय है।

“मन भूल मत जइयो, राधा रानी के चरण” – यह सबसे महत्वपूर्ण संदेश है – मन राधा रानी के चरणों में ही लगा रहे, कहीं और मत भटके।

अंत में श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी, नाथ नारायण वासुदेव का स्मरण और हरे कृष्ण महामंत्र के साथ भजन समाप्त होता है। यह भजन भक्त को राधा-कृष्ण के प्रेम रस में पूर्ण रूप से डुबो देता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

बी प्राक का हरि रस बैठक: यह भजन बी प्राक के हरि रस बैठक श्रृंखला का हिस्सा है, जहाँ वे पारंपरिक भक्ति को आधुनिक संगीत के साथ प्रस्तुत करते हैं।

राधा चरणों का महत्व: “मन भूल मत जइयो, राधा रानी के चरण” – यह पंक्ति राधा की शरणागति को सर्वोपरि बताती है।

ब्रज के सभी धामों का स्मरण: वृन्दावन, बरसाना, राधा रानी के चरण, सभी का वर्णन कर यह भजन ब्रज भक्ति की पूर्णता को दर्शाता है।

💖 राधा-कृष्ण प्रेम रस का संगम

🎯 संदेश

राधा-कृष्ण का स्मरण, उनके चरणों में मन लगाना, और वृन्दावन धाम की महिमा ही सच्ची भक्ति है। यह भजन हमें प्रेम में पूर्ण समर्पण और राधा रानी की शरण में जाने की प्रेरणा देता है।

✨ आस्था का प्रतीक

बी प्राक के इस भजन ने युवा पीढ़ी को राधा-कृष्ण भक्ति से जोड़ा है। “राधे-राधे गोविन्द राधे” का जप सहजता से भक्ति में लीन कर देता है।

🙏 राधे-राधे ।। जय श्री कृष्ण ।। हरे कृष्ण हरे राम ।।

॥ इति बी प्राक – हरि रस बैठक भजनम् ॥
॥ मन भूल मत जइयो, राधा रानी के चरण – राधे-राधे गोविन्द राधे ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "ब्रज रस भजन लिरिक्स – बी प्राक | हरि रस बैठक (पूरा हिंदी भजन) | Braj Ras Bhajan B Praak Hari Ras Baithak Lyrics" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

श्रेणियां: Krishna Bhajan radha bhajan

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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