मेरे मन मन्दिर में माँ सुबह शाम तुम्हें देखूं लिरिक्स - सुरेश जी शेरावाली माँ भजन
देवी माँ की अगाध भक्ति और समर्पण से ओत-प्रोत 'मेरे मन मन्दिर में माँ सुबह शाम तुम्हें देखूं' एक अत्यंत भावुक और लोकप्रिय शेरावाली माँ का भजन है। सुरेश जी द्वारा गाये गए इस दिव्य भजन में साधक के मन की उस पराकाष्ठा का सुंदर वर्णन किया गया है जहाँ वह अपनी आराध्य देवी माँ को अपने अंतःकरण, कण-कण, रोम-रोम और श्वास-प्रश्वास में अनुभव करता है। भक्ति संगीत की इस अनमोल रचना में साधक और जगतजननी माँ के बीच के अटूट और अनादि संबंध को बहुत ही कोमल शब्दों में पिरोया गया है। प्रातःकालीन वंदना और संध्या कालीन आरती के समय इस भजन का श्रवण और गान भक्तों के मन में असीम शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक आनंद का संचार करता है। यह भजन केवल एक गीत नहीं, बल्कि एक भक्त की अपनी माँ के प्रति वह पुकार है जो उसके भीतर के मंदिर को पावन और जीवंत बना देती है। माता रानी के दरबार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने और उनके अलौकिक स्वरूप का निरंतर दर्शन करने की लालसा रखने वाले भक्तों के लिए यह भजन साधना का एक सशक्त माध्यम है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन - शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
मेरे मन मन्दिर में माँ सुबह शाम तुम्हें देखूं
मेरे मन मन्दिर में माँ सुबह शाम तुम्हे देखूं
कण कण में तुम्हे देखु हर पल मे तुम्हे देखु
मेरे नैनों मे बस जाओ मेरे मन मे समा जाओ
मेरे रोम रोम मे माँ सुबह शाम तुम्हें देखु
कण कण मै तुम्हे देखु हर पल मे तुम्हे देखु
मेरे मन मन्दिर में माँ सुबह शाम तुम्हे देखूं...
ये तन भी तुम्हारा है मेरा मन भी तुम्हारा है
जिसकी हर धड़कन में सुबह शाम तुम्हे देखूं
कण कण मै तुम्हे देखु हर पल मे तुम्हे देखु
मेरे मन मन्दिर में माँ सुबह शाम तुम्हे देखूं...
ये रिश्ता पुराना है कही टूट ना जाए माँ
हर जन्म जन्म में माँ सुबह शाम तुम्हे देखूं
कण कण मै तुम्हे देखु हर पल मै तुम्हे देखु
मेरे मन मन्दिर में माँ सुबह शाम तुम्हे देखूं...
मेरी यादों मे बस जाओ मेरे प्राणो में रम जाओ
मेरे श्वास श्वास मे माँ सुबह शाम तुम्हे देखू
कण कण मै तुम्हे देखु हर पल मे तुम्हे देखु
मेरे मन मन्दिर में माँ सुबह शाम तुम्हे देखूं...
मेरे मन मन्दिर में माँ सुबह शाम तुम्हे देखूं
कण कण में तुम्हे देखु हर पल मे तुम्हे देखु
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस पावन भजन का भावार्थ अतीव गहन और आध्यात्मिक है। भक्त अपनी आराध्य शेरावाली माँ से प्रार्थना करता है कि हे माँ! मेरा यह अंतःकरण जो एक मंदिर की भांति है, उसमें मैं केवल और केवल आपके ही दर्शन सुबह और शाम करना चाहता हूँ। संसार की नश्वरता से परे जाकर भक्त की यह कामना है कि उसकी आंखें बंद हों या खुली हों, उसे सृष्टिकर्ता के हर कण में और समय के हर पल में केवल माता का ही स्वरूप दिखाई दे। भक्त अपने आराध्य से अनुरोध करता है कि वह उसके नेत्रों और मन में इस प्रकार बस जाए कि उसका रोम-रोम माँ की उपस्थिति से पुलकित हो उठे।
भजन के अगले चरण में साधक अपनी पूर्ण शरणागति (Surrender) का परिचय देते हुए कहता है कि हे माँ! यह नश्वर शरीर और यह चंचल मन दोनों ही आपके द्वारा दिए गए हैं और अंततः आपके ही हैं। इस शरीर की हर धड़कन में केवल आपका ही नाम गूंजे। जीव और जगतजननी का यह संबंध किसी एक जन्म का नहीं, बल्कि अनादि और अनंत है। भक्त आर्त स्वर में प्रार्थना करता है कि हे माँ! हमारा यह पवित्र और पुराना रिश्ता कभी कमजोर न पड़े और आने वाले प्रत्येक जन्म में मुझे इसी प्रकार आपके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता रहे। अंत में भक्त अपनी यादों, प्राणों और प्रत्येक श्वास में माता के रम जाने की विनती करता है ताकि जीवन का हर एक स्पंदन देवी की आराधना में समर्पित हो सके।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन शक्ति साधना और भक्त-भगवान के द्वैत भाव को मिटाकर अद्वैत की अनुभूति कराने वाला एक श्रेष्ठ माध्यम है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- सर्वव्यापिनी चेतना का अनुभव: भजन के माध्यम से भक्त कण-कण और हर पल में देवी की उपस्थिति महसूस करता है।
- पूर्ण शरणागति (आत्मसमर्पण): यह भजन साधक को सिखाता है कि उसका तन, मन और प्राण सब कुछ उस जगदम्बा को समर्पित है।
- जन्मांतर का बंधन: यह इस मान्यता को पुष्ट करता है कि सच्चे भक्त और भगवान का रिश्ता केवल इस जन्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शाश्वत है।
- मानसिक शांति और एकाग्रता: सुबह और शाम के समय इस भजन के नियमित गायन से मन के विकारों का शमन होता है और ध्यान केंद्रित करने में सहायता मिलती है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
भक्ति संगीत की पूर्ण फलप्राप्ति के लिए उचित समय और विधि का विशेष महत्व होता है:
- उचित समय: प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में या सूर्योदय के समय तथा संध्याकाल में गोधूलि बेला के समय जब घर में दीपक जलाया जाता है, तब इस भजन का गान अत्यंत फलदायी होता है।
- पूजा स्थल पर अनुष्ठान: माता रानी के चौकी या मंदिर के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करके, पुष्प अर्पित करते हुए इस भजन को भाव-विभोर होकर गाना चाहिए।
- सामूहिक सत्संग: नवरात्रि के पावन अवसरों पर या जागरण और माता की चौकी के दौरान सभी भक्तों द्वारा समवेत स्वर में इसका गायन वातावरण को पूरी तरह से ऊर्जावान और भक्तिमय बना देता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन जगत जननी आदिशक्ति, माँ दुर्गा, माँ शेरावाली और महामाया के विभिन्न स्वरूपों को समर्पित है। सनातन संस्कृति में देवी को प्रकृति, चेतना और ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। सुरेश जी जैसे समर्पित कलाकारों ने अपनी मधुर वाणी से इस भजन को अमर बना दिया है। देवी उपासना की परंपरा में जप, तप, और कीर्तन को चित्त शुद्धि का सबसे सरल मार्ग माना गया है, और यह भजन उसी परंपरा की एक स्वर्णिम कड़ी है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
'मेरे मन मन्दिर में माँ सुबह शाम तुम्हें देखूं' भजन की रचना पारंपरिक लोक शैली और भक्ति संगीत के सुंदर समन्वय पर आधारित है। इसे विशेष रूप से उन भक्तों की भावनाओं को ध्यान में रखकर गढ़ा गया है जो व्यस्त जीवनशैली के बीच भी हर पल माँ का स्मरण करना चाहते हैं। इसकी पंक्तियाँ इतनी सरल और लयबद्ध हैं कि एक सामान्य गृहस्थ भी इसे सहजता से गुनगुना सकता है और ध्यान की अवस्था में उतर सकता है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, सुबोध और ग्राह्य हिंदी (खड़ी बोली) है, जिसमें भोजपुरी और अवधी लोक संगीत की मिठास का हल्का प्रभाव भी देखने को मिलता है। इसमें रूपक अलंकार और पुनरावृत्ति शैली का सुंदर प्रयोग किया गया है जैसे 'कण कण में तुम्हे देखु', 'हर पल मे तुम्हे देखु', जो भजन के प्रभाव को और अधिक तीव्र कर देता है। शब्दों की कोमलता और भावों की गहराई इस रचना को एक उच्च कोटि का काव्य बनाती है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें जीवन के कई गहरे आध्यात्मिक पाठ पढ़ाता है:
- ईश्वर की सर्वव्यापकता: हमें यह सिखाता है कि परमात्मा हमसे दूर किसी आकाश में नहीं, बल्कि हमारे भीतर और इस प्रकृति के कण-कण में विद्यमान है।
- अहंकार का त्याग: जब तन और मन दोनों को माता का मान लिया जाता है, तब अहंकार स्वतः समाप्त हो जाता है।
- सतत स्मरण: 'सुबह शाम', 'हर पल', और 'श्वास-श्वास' जैसे शब्द निरंतर स्मरण (स्मरण भक्ति) का संदेश देते हैं।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| मन मन्दिर | हृदय रूपी मंदिर | वह स्थान जहाँ भक्त अपने इष्ट का वास मानता है। |
| कण-कण | प्रत्येक परमाणु में | ईश्वर की सर्वव्यापकता का द्योतक। |
| रोम-रोम | शरीर का प्रत्येक बाल/अंग | संपूर्ण शारीरिक और मानसिक चेतना। |
| श्वास-श्वास | प्रत्येक सांस के साथ | जीवन की निरंतरता और निरंतर स्मरण। |
| शरणागति | पूर्ण समर्पण | अपने आपको भगवान के चरणों में सौंप देना। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
पंक्ति: "मेरे मन मन्दिर में माँ सुबह शाम तुम्हें देखूं..."
अर्थ: भक्त अपने मन को एक पवित्र मंदिर मानकर उसमें माता रानी की मूर्ति की स्थापना करता है और दिन-रात उनके दर्शन की अभिलाषा रखता है।
पंक्ति: "ये तन भी तुम्हारा है मेरा मन भी तुम्हारा है..."
अर्थ: साधक स्वीकार करता है कि उसकी देह और बुद्धि पर उसका अधिकार नहीं है, बल्कि ये सब आदिशक्ति की कृपा का प्रसाद हैं।
पंक्ति: "ये रिश्ता पुराना है कही टूट ना जाए माँ..."
अर्थ: यह आत्मा और परमात्मा के बीच के जन्म-जन्मांतर के अटूट बंधन को दर्शाता है, जिसे भक्त जीवनभर सहेजकर रखना चाहता है।
पंक्ति: "मेरे श्वास श्वास मे माँ सुबह शाम तुम्हें देखू..."
अर्थ: जीवन की आखिरी सांस तक हर एक स्पंदन में केवल माँ का ही ध्यान रहे, यही इस पंक्ति का सार है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के साथ निम्नलिखित पावन देवी मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:
"या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै నమో नमः॥"
यह श्लोक बताता है कि समस्त ब्रह्मांड की हर योनि और हर वस्तु में देवी शक्ति ही निवास करती है, जो इस भजन के मुख्य भाव 'कण-कण में तुम्हें देखु' से पूर्णतः मेल खाता है।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| भजन का नाम | मेरे मन मन्दिर में माँ सुबह शाम तुम्हें देखूं (Mere Man Mandir Me) |
| आराध्य देवी | माँ शेरावाली, दुर्गा, आदिशक्ति |
| प्रमुख गायक | सुरेश जी एवं अन्य लोकप्रिय कलाकार |
| भाषा | सरल हिंदी / लोक भाषा |
| मुख्य भाव | भक्ति, प्रेम, पूर्ण समर्पण और दर्शन की लालसा |
| गाने का अवसर | नवरात्रि, सुबह-शाम की पूजा, माता की चौकी, जागरण |
| संबंधित श्रेणियां | Morning Bhajan, Evening Bhajan |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
'मेरे मन मन्दिर में माँ सुबह शाम तुम्हें देखूं' भजन के गायक कौन हैं?
यह भजन प्रसिद्ध गायक सुरेश जी द्वारा बहुत ही भावपूर्ण शैली में गाया गया है, जिसे विभिन्न मंचों और भक्ति आयोजनों में बहुत पसंद किया जाता है।
इस भजन को किस समय गाना सबसे उत्तम माना जाता है?
इस भजन को प्रातःकाल पूजा के समय, संध्या वंदना के दौरान या नवरात्रि के पावन दिनों में गाना सबसे उत्तम माना जाता है।
क्या इस भजन को घर पर अकेली पूजा के समय गाया जा सकता है?
हाँ, यह एक व्यक्तिगत साधना और आत्मसमर्पण का भजन है, जिसे घर पर पूजा करते समय या ध्यान लगाते समय आसानी से गाया जा सकता है।
इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
इस भजन का मुख्य संदेश ईश्वर की सर्वव्यापकता और भक्त का माता के प्रति अनन्य प्रेम व पूर्ण समर्पण है।
क्या यह भजन नवरात्रि के लिए उपयुक्त है?
निश्चित रूप से, नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन और ध्यान के लिए यह भजन अत्यंत प्रासंगिक और ऊर्जावान है।
क्या इस भजन के माध्यम से ध्यान (Meditation) किया जा सकता है?
हाँ, इसके बोल इतने शांत और लयबद्ध हैं कि इसका श्रवण करने से मन को एकाग्र करने और मानसिक शांति पाने में मदद मिलती है।
इस भजन को गाने से कौन सा भाव जाग्रत होता है?
इसे गाने से हृदय में भक्ति, करुणा, आत्म-विश्वास और माता के प्रति अगाध प्रेम का भाव जाग्रत होता है।
इस प्रकार के अन्य लोकप्रिय भजन कहाँ मिल सकते हैं?
आप हमारी वेबसाइट Bhaktilok.in पर अन्य सुंदर प्रातःकालीन भजन और संध्या भजन के लिरिक्स पढ़ सकते हैं।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख पूरी तरह से शोधित और भक्तों की आध्यात्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसमें प्रामाणिक शब्दों और पारंपरिक लोक कथाओं के आधार पर भजन के मर्म को समझाया गया है। प्रस्तुत सामग्री 'संपादकीय रूप से तैयार सामग्री' के अंतर्गत सत्यापित है ताकि पाठकों को शुद्ध और उच्च गुणवत्ता वाला भक्ति साहित्य प्राप्त हो सके।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- पारंपरिक लोक भजन संग्रह एवं देवी गीत परंपरा।
- सनातन धर्म की शक्ति उपासना और भक्ति मार्ग के ग्रंथ।
- क्षेत्रीय संकीर्तन और माता के जागरणों में प्रचलित मौखिक एवं लिखित पाठ परंपरा।
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