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बनवारी गिरधारी अब राखो लाज हमारी लिरिक्स (Banwari Girdhari Ab Rakho Laaj Hamari Lyrics in Hindi) - लाज निर्धन की पूँजी Shyam Bhajan Amit Kalra Meetu - BhaktiLok

139 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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बनवारी गिरधारी अब राखो लाज हमारी - परिचय एवं आध्यात्मिक पृष्ठभूमि

"बनवारी गिरधारी अब राखो लाज हमारी" यह अत्यंत ही पावन, भावपूर्ण और हृदय को झकझोर देने वाला श्याम भजन है, जिसे प्रसिद्ध भजन गायक अमित कालरा 'मीतू' (Amit Kalra Meetu) ने अपनी सुमधुर आवाज में गाया है। यह भजन केवल एक संगीत रचना नहीं है, बल्कि कलयुग के जीवों के लिए भगवान श्री बांके बिहारी और खाटू श्याम जी के चरणों में पूर्ण शरणागति (Surrender) का जीवंत दस्तावेज है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप भवसागर से पार उतरने का सबसे सरल और प्रभावी साधन माना गया है। इस भजन की प्रत्येक पंक्ति साधक के अंतर्मन में छिपे अहंकार को गलाकर उसमें भक्ति, करुणा, विनय और अनन्य प्रेम का संचार करती है। जब मनुष्य चारों तरफ से समस्याओं और सांसारिक दुखों से घिर जाता है, तब वह अपनी संपूर्ण दीनता के साथ गिरधारी के दरबार में पुकार लगाता है कि हे प्रभु! अब तो केवल आपकी कृपा ही मेरी लाज बचा सकती है। 'लाज निर्धन की पूँजी' के रूप में इस भजन में यह दर्शाया गया है कि भक्त के पास सांसारिक धन भले ही न हो, किंतु प्रभु का नाम ही उसकी सबसे बड़ी और अमूल्य संपत्ति है। यह भजन सुनने वाले को आत्मिक शांति प्रदान करता है और उसे भगवान श्री कृष्ण के नित्य स्मरण की प्रेरणा देता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थाई (मukhda):

बनवारी गिरधारी, अब राखो लाज हमारी,
लाज निर्धन की पूँजी, सुन लो बंसी वाले मुरारी!
बनवारी गिरधारी, अब राखो लाज हमारी...

अंतरा 1:

दर-दर भटके हम पापी, कोई न अपना साया,
इस झूठी दुनिया में हमने, तुमको ही अपना पाया!
हे नंदन नन्दन गोपाला, हे गोकुल के रखवाले,
चरणों से अपने लगा लो, ओ खाटू के मतवाले!
अब तो दरस दिखा दो, हे संकट हरण बिहारी,
बनवारी गिरधारी, अब राखो लाज हमारी...

अंतरा 2:

कलयुग के इस मेले में, फंसा हुआ मेरा मन है,
पापों के दलदल में देखो, उलझा यह तन-मन है!
तुम ही हो पतवार हमारी, तुम ही खेवैया मेरे,
डूब रही है नैया मेरी, आ जाओ बंसी फेरे!
लाज बचा लो भक्तों की, ओ बांके बिहारी तुम्हारी,
बनवारी गिरधारी, अब राखो लाज हमारी...

अंतरा 3:

द्रौपदी की लाज बचाई, गज की टेर सुनी थी,
सुदामा की तंदुल झोली, तुमने प्रेम से भुनी थी!
वही कृपा आज भी कर दो, हे करुणा के सागर,
बैठा हूँ मैं आस लगाए, तेरे मंदिर की चौखट पर!
अमित पुकारे चरणों में, सुन लो पुकार हमारी,
बनवारी गिरधारी, अब राखो लाज हमारी...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन भक्त और भगवान के बीच के उस अटूट और कोमल रिश्ते को परिभाषित करता है जहाँ भक्त पूरी तरह असहाय होकर अपने आराध्य के सामने समर्पण कर देता है। भजन की पहली पंक्ति "बनवारी गिरधारी, अब राखो लाज हमारी" में साधक भगवान श्री कृष्ण को 'बनवारी' (वृंदावन के वन-विहारी) और 'गिरधारी' (गोवर्धन पर्वत को उठाने वाले) के रूप में संबोधित करता है। वह कहता है कि हे प्रभु! इस संसार में मेरी मान-मर्यादा और प्रतिष्ठा आपके हाथ में है।

आगे की पंक्तियों में 'लाज निर्धन की पूँजी' कहकर इस बात को गहराई से समझाया गया है कि जैसे एक गरीब व्यक्ति के लिए उसकी थोड़ी सी बचत ही उसका सब कुछ होती है, वैसे ही एक भक्त के पास दुनिया दिखाने के लिए भले ही बड़े वैभव न हों, किंतु उसका भगवान के प्रति प्रेम और विश्वास ही उसकी एकमात्र और सबसे बड़ी संपत्ति है।

अंतरा में द्रौपदी की चीरहरण के समय की सभा और गजेंद्र-मोक्ष की ऐतिहासिक पौराणिक घटनाओं का स्मरण करते हुए गायक यह याद दिलाता है कि हे प्रभु! आपने इतिहास में जब-जब पुकारा गया, तब-तब भक्तों की लाज बचाई है। आज कलयुग के इस दौर में जब मनुष्य मानसिक और नैतिक रूप से संकटों से घिरा है, तो वह श्री श्याम और बांके बिहारी से करुणा की भीख मांगता है। यह भावार्थ सिखाता है कि अहंकार का त्याग करके जब कोई दीन भाव से प्रभु को पुकारता है, तो ईश्वर किसी न किसी रूप में सहायता के लिए अवश्य आते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसका मार्मिक और विरह से परिपूर्ण 'भाव' है। यह खाटू श्याम भजन शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है जो सीधे हृदय को स्पर्श करता है।

  • शरणागति का संदेश: यह भजन मनुष्य को सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में घबराने के बजाय भगवान के चरणों में अपनी अर्जी लगानी चाहिए।
  • पौराणिक संदर्भों का सटीक प्रयोग: द्रौपदी, गजेंद्र और सुदामा के प्रसंगों के माध्यम से भगवान की भक्त-वत्सलता को उजागर किया गया है।
  • मानसिक शांति: इस भजन के निरंतर श्रवण या गायन से मन का तनाव कम होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • भक्ति रस की प्रधानता: यह भजन साधक के भीतर भगवान के प्रति प्रेम और आंसुओं के माध्यम से आंतरिक शुद्धि (Katharsis) का मार्ग प्रशस्त करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत के लिए समय और स्थान से अधिक मन की पवित्रता महत्वपूर्ण होती है, तथापि कुछ विशेष अवसरों पर इस भजन का गान अत्यंत फलदायी माना जाता है:

  • ब्रह्म मुहूर्त एवं संध्या बेदी: सुबह उठकर पूजा के समय या शाम को दीपक प्रज्वलित करते समय इसे गुनगुनाने से घर में सकारात्मकता आती है।
  • एकादशी एवं शुक्ल पक्ष: देवशयनी एकादशी, खाटू श्याम दर्शन यात्रा, या फाल्गुन मेले के दौरान इस भजन का संकीर्तन विशेष आनंद देता है।
  • साप्ताहिक सत्संग: घरों में होने वाले हरिनाम संकीर्तन और कीर्तन संध्या के समय इसे सामूहिक रूप से गाया जा सकता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्री कृष्ण के विभिन्न स्वरूपों—श्री बांके बिहारी (मथुरा-वृंदावन), खाटू श्याम जी (राजस्थान) और गोवर्धन धारी कृष्ण को समर्पित है। सनातन परंपरा में भगवान श्री कृष्ण को जगतगुरु, प्रेम के प्रतीक और संकटमोचन के रूप में पूजा जाता है। इस भजन के रचयिता और गायक अमित कालरा 'मीतू' ने अपनी soulful गायकी के माध्यम से श्याम प्रेमियों के बीच इसे अमर कर दिया है। भगवान श्री कृष्ण के अनन्य भक्त और श्री बांके बिहारी चालीसा के पाठकों के लिए यह भजन मानसिक एकाग्रता का उत्तम साधन है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भजन सम्राट अमित कालरा 'मीतू' द्वारा गाए गए इस भजन की पृष्ठभूमि श्याम भक्तों की भावनाओं से जुड़ी हुई है। कलयुग के धनी बाबा श्याम और वृंदावन के बांके बिहारी लाल के दरबार में जब भक्त अपनी फरियाद लेकर पहुंचते हैं, तो उनके अंतर्मन की जो पुकार होती है, उसे ही गीत के शब्दों में ढाला गया है। संगीतकारों ने इसमें बांसुरी (Flute) और ढोलक-मंजीरे के पारंपरिक वाद्ययंत्रों का बहुत ही सुंदर सम्मिश्रण किया है, जो राजस्थानी और बृजवासी लोक संगीत की मिठास का अहसास कराता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सहज और आम जनमानस की समझ में आने वाली हिंदी एवं बृज-मिश्रित खड़ी बोली है। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है जैसे 'करुणा के सागर', 'संकट हरण बिहारी'। शब्दों का चयन इतना भावुक है कि बिना किसी कठिन संस्कृत व्याकरण के भी यह सीधे श्रोता के दिल में उतर जाता है। काव्य शैली मुक्तक और गीतात्मक (Lyrical) है, जिसे आसानी से ताल और सुर के साथ गाया जा सकता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • अहंकार का त्याग: मनुष्य को अपनी ताकत और धन पर घमंड न करके हमेशा भगवान पर भरोसा रखना चाहिए।
  • दीनता और समर्पण: ईश्वर के दरबार में कोई भी छोटा या बड़ा नहीं होता, केवल सच्ची पुकार सुनी जाती है।
  • विपत्ति में धैर्य: कठिन समय में भगवान को याद करना और उनकी शरण में रहना ही वास्तविक पुरुषार्थ है।
  • नाम स्मरण: कलयुग में केवल प्रभु का नाम ही नाव को पार लगा सकता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / मुहावरा सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
बनवारी वन (वृंदावन) में विहार करने वाले श्री कृष्ण का एक प्रिय नाम
गिरधारी गोवर्धन पर्वत को धारण करने वाले भगवान श्री कृष्ण की लीला का प्रतीक
लाज इज्जत, मान-मर्यादा, प्रतिष्ठा भक्त की प्रतिष्ठा की रक्षा करना
निर्धन की पूँजी गरीब की एकमात्र संपत्ति भक्ति और प्रभु का नाम ही भक्त की असली पूँजी है
खेवैया नाव चलाने वाला, नैया पार लगाने वाला संसार रूपी भवसागर से पार उतारने वाले भगवान
तंदुल चावल के दाने सुदामा द्वारा भगवान को भेंट किए गए तंदुल का प्रेम प्रसंग

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"बनवारी गिरधारी, अब राखो लाज हमारी..."
यहाँ गायक विनती कर रहा है कि हे वृंदावन के स्वामी और गोवर्धन धारी! अब केवल आप ही मेरी मान-मर्यादा बचा सकते हैं, क्योंकि संसार में मेरे पास ऐसा कोई बल नहीं है जो मुझे संकट से निकाल सके।

"लाज निर्धन की पूँजी, सुन लो बंसी वाले मुरारी..."
जैसे एक गरीब के लिए उसकी छोटी सी पूंजी ही उसका सब कुछ होती है, वैसे ही हे बांसुरी बजाने वाले मुरारी! मेरी भक्ति और मेरा भरोसा ही मेरी एकमात्र पूंजी है, कृपया इसकी रक्षा करें।

"द्रौपदी की लाज बचाई, गज की टेर सुनी थी..."
भक्त भगवान को उनके अतीत के पराक्रम और करुणा की याद दिलाता है कि हे प्रभु! आपने भरी सभा में द्रौपदी की लाज बचाई थी और ग्राह (मगरमच्छ) द्वारा पकड़े जाने पर गजेंद्र हाथी की पुकार सुनकर उसे बचाया था। वही करुणा आज मुझ पर भी बरसाइए।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के भाव को पुष्ट करने के लिए निम्नलिखित श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक का स्मरण करना अत्यंत फलदायी है:

"अनन्याश्चिन्तयन्तो मां యే जनाः पर्युपासते।
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥"

अर्थात: जो अनन्य भक्तजन मेरा निरंतर चिंतन करते हुए निष्काम भाव से मेरी उपासना करते हैं, उन नित्य-निरंतर मेरे में जुड़े हुए योगक्षेम (आवश्यकता की पूर्ति और रक्षा) का मैं स्वयं वाहन करता हूँ।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य
भजन का नाम बनवारी गिरधारी अब राखो लाज हमारी (Banwari Girdhari Ab Rakho Laaj Hamari)
गायक / कलाकार अमित कालरा 'मीतू' (Amit Kalra Meetu)
मुख्य आराध्य भगवान श्री कृष्ण, खाटू श्याम जी, बांके बिहारी
भाषा हिंदी एवं बृज-मिश्रित लोक भाषा
मुख्य भाव (Bhava) शरणागति, विनय, विरह और अनन्य प्रेम
श्रेणी / लेबल श्याम भजन, हरि भजन, हरि भजन संग्रह
उपयुक्त अवसर एकादशी, श्याम संकीर्तन, दैनिक पूजा, जागरण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह प्रसिद्ध भावुक भजन लोकप्रिय भजन गायक अमित कालरा 'मीतू' (Amit Kalra Meetu) द्वारा गाया गया है।

इस भजन का मुख्य संदेश ईश्वर के प्रति पूर्ण शरणागति (Surrender) और यह विश्वास रखना है कि संकट के समय भगवान अपने सच्चे भक्तों की लाज अवश्य बचाते हैं।

हाँ, यह भजन खाटू श्याम जी और वृंदावन के बांके बिहारी दोनों के भक्तों के बीच समान रूप से लोकप्रिय है क्योंकि श्याम बाबा को भी भगवान श्री कृष्ण का ही कलयुगवतार माना जाता है।

इसका अर्थ है कि एक साधारण या गरीब भक्त के पास संसार दिखाने के लिए धन-दौलत भले न हो, किंतु प्रभु के प्रति उसकी सच्ची भक्ति और प्रेम ही उसकी सबसे बड़ी और अमूल्य संपत्ति होती है।

इस भजन में द्रौपदी की सभा में चीरहरण के समय लाज बचाने, गजेंद्र हाथी की टेर सुनने और सुदामा की तंदुल (चावल) की झोली प्रेम से स्वीकार करने की पौराणिक घटनाओं का उल्लेख है।

इसे सुबह की पूजा के समय, एकादशी के व्रत पर, या जब भी मन अशांत हो, एकांत में बैठकर शांति से सुनने पर विशेष मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा मिलती है।

यह भजन मूल रूप से देवनागरी (हिंदी) लिपि में उपलब्ध है, जिसे आसानी से अंग्रेजी (Roman Hindi) या अन्य भारतीय लिपियों में भी पढ़ा जा सकता है।

निश्चित रूप से! यह एक अत्यंत लोकप्रिय संकीर्तन भजन है जिसे ढोलक, मंजीरे और हारमोनियम के साथ समूह में बहुत ही भाव के साथ गाया जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तिलोक (BhaktiLok) के संपादकीय मंडल द्वारा सनातन धर्म की भक्ति परंपरा, संत साहित्य और संगीत श्रवण के मानकों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध और प्रामाणिक भजन लिरिक्स के साथ-साथ उसका गहरा आध्यात्मिक भावार्थ प्रदान करना है।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भगवद्गीता - गीताप्रेस गोरखपुर (अध्याय 9, श्लोक 22)
  • सनातन भक्ति संगीत एवं संकीर्तन परंपरा
  • खाटू श्याम जी एवं बांके बिहारी मंदिर की कथाएं
  • अमित कालरा 'मीतू' द्वारा प्रस्तुत लोकप्रिय भजन रिकॉर्डिंग एवं संदर्भ

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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