Holi Bhajan

किसके संग खेलु कान्हा होली (Kiske Sang Khelu Kanha Holi ) - Holi Bhajan - Bhaktilok

51 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

प्रस्तावना एवं परिचय

कृष्ण की संगति में होली का आनंद

कान्हा के संग होली खेलने का आनंद सबको भाता है, इससे प्रेम और भक्ति की भावना जागृत होती है।

किसके संग खेलु कान्हा होली किसके संग खेलु कान्हा होली गोपियाँ गईं हंसिआएं, बुंदेलों से भेँव हीं गा ली, किसके संग खेलु कान्हा होली किसके संग खेलु कान्हा होली। कान्हा संग तू सखी आगें, तीरे तीर चलि कि किसके संग, आगोसा बखुश राम जब लियानी। किसके संग खेलु कान्हा होली किसके संग खेलु कान्हा होली। कोना देखी न रंग मैं, किसके संग खेलु कान्हा होली, तू जाणु सखी रे तेरो संग, बधन में ही आन रटि कि किसके संग खेलु कान्हा होली। किसके संग खेलु कान्हा होली, किसके संग खेलु कान्हा होली।
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय भगवान श्री कृष्ण के साथ होली खेलने का आनंद है। इसमें गोकुल की गोपियों द्वारा श्री कृष्ण को संबोधित करते हुए कहा जा रहा है कि वे किसके साथ होली खेलें। चारों ओर बिखरे रंग और बधाइयाँ उनके दिल की गहराइयों में नृत्य कर रही हैं। होली का यह त्यौहार केवल रंगों का खेल नहीं है, बल्कि यह प्रेम, भक्ति और एकता का प्रतीक है। यह हमें इस बात का अहसास कराता है कि जब हम कृष्ण के साथ होते हैं, तब जीवन का रंग-रूप भी बदल जाता है। गोपियाँ कृष्ण की दिव्यता और उनके संग की अनुपम मिठास का अनुभव कर रही हैं, जिसे वे अपने मनोभावों से व्यक्त कर रहीं हैं।

भावार्थ की दृष्टि से, यह भजन भक्ति और प्रेम का उत्कर्ष है। इसमें गोपियाँ अपनी खुशी और उल्लास को व्यक्त कर रही हैं, जो कि श्री कृष्ण के संग अनुभव करती हैं। यहाँ वे कहती हैं कि वे किसके संग खेलें, क्योंकि कृष्ण का संग ही उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण है। होली का रंग श्री कृष्ण का प्रेम है, जिसका वे अनुभव करती हैं। उनका यह प्रश्न दरअसल एक साधना और वह प्रेम के अनुभव को दर्शाता है, जो केवल भगवान की संगति में संभव होता है। भावनात्‍मक रूप से, यह भजन हमें यह सिखाता है कि प्रेम से भरा जीवन ही पूर्णता का अनुभव कराता है।

इस भजन में कृष्ण के प्रति अभिन्न प्रेम का दर्शन होता है। ‘किसके संग खेलु कान्हा होली’ का नारा यही दर्शाता है कि कृष्ण भक्ति मार्ग में व्यक्ति को अपने अस्तित्व को चरणों में सहर्ष समर्पित करने की प्रेरणा देता है। धार्मिक दृष्टि से, प्यार और भक्ति के इस रंग में डूबकर भक्त अपने व्यक्तिगत अहंकार को समाप्त कर देते हैं। यह भजन हमें उस बंधन का अहसास कराता है, जो भक्त और भगवान के बीच होता है। यद्यपि होली रंगों का पर्व है, परंतु जब हम कृष्ण के संग इसे मनाते हैं, तो यह सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक समर्पण का एक प्रतीक बन जाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

किसके संग खेलु कान्हा होली, हिंदू धर्म में गहरे अर्थों में बसी एक पंक्ति है। यह हमें स्मरण कराती है कि भगवान कृष्ण की लीलाएँ और उनके हलके फुल्के खेल न केवल केवल पौराणिक कथाओं में, बल्कि हमारे जीवन में भी गूंजते हैं। महाभारत और भागवत पुराण में कृष्ण के कई रंग-बिरंगे स्वरूप दिखाई देते हैं। होली का पर्व विशेष रूप से कृष्ण के जीवन से जुड़ा हुआ है, जहाँ वे गोपियों के साथ मनोज्ञता से भरे रंगों में खेलते हैं। यह भजन कृष्ण प्रेम की भावना को उजागर करने के साथ-साथ भक्तों को उनके सौंदर्य और दिव्यता की अनुभूति भी कराता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। ‘किसके संग खेलु कान्हा होली’ का गायन मानसिक शांति और आंतरिक संतुलन लाने में सहायक होता है। इसकी साधना से भक्त का मन प्रफुल्लित होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कृष्ण भक्ति से जुड़कर व्यक्ति भौतिक और आध्यात्मिक स्तर पर उन्नति कर सकता है। यह भजन मन की अशांति को दूर करते हुए प्रेम और सहिष्णुता का संचार करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह या शाम के समय किया जा सकता है। ध्यान की स्थिति में बैठकर, मुंह में सच्चे भाव से श्री कृष्ण का ध्यान करें। धूप और दीप जलाना, फूलों का अर्पण करना इस भजन की साधना का अंश हो सकता है। ध्यान की अवस्था में हृदय में प्रेम और श्रद्धा का भाव होना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन कब और किसके लिए गाया जाता है?

इस भजन को होली के पर्व पर विशेष रूप से गाया जाता है, जब भक्त अपने प्रिय कृष्ण के संग खुशियों और रंगों के खेल में लिप्त होते हैं।

कृष्ण के साथ होली खेलने का महत्त्व क्या है?

कृष्ण के साथ होली खेलने का महत्त्व यह है कि यह प्रेम, एकता, और भक्ति का सटीक प्रतीक है, जो जीवन को खुशी और संतोष से भर देता है।

इस भजन का मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर है?

इस भजन का गायन मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने में सहायक होता है, क्योंकि यह खुशी, सुकून और सकारात्मकता के भावों को जागृत करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!