Punjabi Devi Bhajan

बोले कोयलिया भोरे भोरे लिरिक्स (Bole Koyaliya Bhore Bhor Lyrics in Hindi) - Rani Thakur Devigeet nimiya ke gachhiya - Bhaktilok

349 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

प्रस्तावना एवं परिचय

देवी भक्ति: कोयलिया की मधुर पुकार

इस भजन में देवी दुर्गा की महिमा और उनकी अनुकंपा का बखान किया गया है, जो भक्तों को प्रेरित करता है।

बोले कोयलिया भोरे भोरे लिरिक्स (Bole Koyaliya Bhore Bhor Lyrics in Hindi) - जय जय माँ जय जय माँजय जय माँ जय जय माँनिमिया के गछिया कोयलकरे लगानी शोरवा होकी जाग भवानी ना.......2हो की जाग भवानी नाभइले सागरो अजोरवाकी जाग भवानी नाभइले सागरो अजोरवाकी जाग भवानी नानिमिया के गछिया कोयलकरे लगानी शोरवा होकी जाग भवानी ना.......2हो की जाग भवानी नाभइले सागरो अजोरवाकी जाग भवानी नाजय जय मैया जय जय मांजय जय मैया जय जय मांभइले सागरो अजोरवाकी जाग भवानी ना......2भईले बिहान जबलेभैरो संग शेर होआज कहे मैया काइलेबांडु तू डेर होजय जय माँ जय जय माँजय जय माँ जय जय माँभइले सागरो अजोरवाकी जाग भवानी ना......2भईले बिहान जबलेभैरो संग शेर होआज कहे मैया काइलेबांडु तू डेर होमंडूर उपरवा उंडी उंडीकी बोलता हो मोरवा होकी जाग भवानी ना......2मंडूर उपरवा उंडी उंडीकी बोलता हो मोरवा होकी जाग भवानी नाहो की जाग भवानी नाभइले सागरो अजोरवाकी जाग भवानी ना.......2जय जय माँ जय जय माँपुरुबा से लौके लागलसूरज के लाली घर घर मेंसाजे लागल पूजा के थालीजय जय माँ जय जय माँजय जय माँ जय जय माँपुरुबा से लौके लागलसूरज के लाली घर घर मेंसाजे लागल पूजा के थालीसाधु साज लगे ऐले तोहरगोनव हो की जाग भवानी ना......2साधु साज लगे ऐले तोहरगोनव हो की जाग भवानी नासाधु साज लगे ऐले तोहरगोनव हो की जाग भवानी नाहो की जाग भवानी नाभइले सागरो अजोरवाकी जाग भवानी ना.......2जाग ये मैया करिमंदिर की सफाईभक्तन आवे लागलेकरि ला पुजैयाजय जय माँ जय जय माँजय जय माँ जय जय माँजाग ये मैया करिमंदिर की सफाईभक्तन आवे लागलेकरि ला पुजैयाकी जाग भवानी ना......2हो की जाग भवानी नाभइले सागरो अजोरवाकी जाग भवानी नाभइले सागरो अजोरवाकी जाग भवानी ना.......2
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह भजन देवी के प्रति भक्ति का अटूट अनुग्रह व्यक्त करता है। 'जाग भवानी' की पुकार में भक्त देवी की जागृति और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करते हैं। यह संदेश स्पष्ट करता है कि जब धरती पर अंधकार और कठिनाइयाँ बढ़ती हैं, तब देवी की कृपा से सब कुछ उज्ज्वल हो जाता है। विशेषत: 'भइले सागरो अजोर' पंक्ति, यह बात स्पष्ट रूप से बताती है कि जब देवी प्रकट होती हैं, तो हर अंधकार का निवारण होता है। इस भजन में कोयल की मधुर आवाज से देवी का आह्वान किया गया है, जो प्राकृतिक सौंदर्य और प्रेम का प्रतीक है।

इस भजन में सूर्योदय के समय कोयल की आवाज से देवी की शक्ति का जिक्र किया गया है। 'कोयलकरे लगानी शोरवा हो' पंक्ति में भक्त देवी को गूंजती हुई आवाज से बुलाते हैं। यहां कोयल का सन्देश प्रेम, उल्लास और जीवन की नयी शुरुआत का प्रतीक है। भक्तों की भावनाएँ इस भजन में गहराई से उभरती हैं, जहां वे देवी से प्रार्थना करते हैं कि वे उनके मन का शुद्धिकरण करें और उनके जीवन को आनंदित करें। यह भजन मन, आत्मा और प्रकृति के एकत्व को दर्शाता है।

भक्ति मार्ग का यह प्रतीक जीवित तरीके से श्रद्धा एवं समर्पण का परिचायक है। भजन में 'साधु साज लगे' जैसी पंक्तियों के माध्यम से साधु संतों की भूमिका को रेखांकित किया गया है। भक्त जो आनंदित होते हैं, वे देवी की उपासना को सजीव रूप में पाते हैं। इस भजन द्वारा यह सिखाया जाता है कि भक्ति की सरलता और श्रद्धा की गहराई में ही सच्चा आध्यात्मिक अनुभव निहित है। इसमें देवी के प्रति गहरी आस्था प्रकट होती है, जिससे भक्तों को अध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय पौराणिक कथाओं और देवी दुर्गा की महिमा से भरा है। 'कोयलिया' जैसे प्रतीकों का उपयोग भक्तों की श्रद्धा को मजबूती प्रदान करता है। देवी दुर्गा को विभिन्न पौराणिक ग्रंथों में संकट मोचन एवं शक्ति के रूप में पूजा जाता है। देवी दुर्गा का स्वरूप काली, भवानी और शक्तिपुष्पा के रूप में विभाजित है, और सभी में सृष्टि की ऊर्जा निहित है। यह भजन भक्तों के मन में देवी की उपस्थिति का अनुभव कराता है, जो कठिनाइयों का सामना करने में उनका मार्गदर्शन करती हैं।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का पाठ मानसिक शांति और आध्यात्मिक संवर्धन का साधन है। इसकी संगीतात्मकता और शब्दों के माध्यम से भक्त स्वयं को देवी के प्रति जोड़ते हैं, जिससे उन्हें सकारात्मक ऊर्जा और उद्देश्य का अनुभव होता है। भक्ति के इस प्रकार से सामान्य तनाव कम करने में मदद मिलती है और मन की स्थिरता बढ़ती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का आदर्श समय सुबह का होता है, जब सूर्य की पहली किरणें धरती पर आकर प्रकाश बिखेरती हैं। दीया जलाकर और फूलों का भोग लगाकर देवी की पूजा करना चाहिए। यह भजन भक्तों को मानसिक और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है तथा साधना के समय ध्यान और श्रद्धा से इसे गुनगुनाने का प्रयास करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन 'बोले कोयलिया भोरे भोरे' में देवी का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन में देवी का संदेश भक्तों के प्रति सुरक्षा, आशीर्वाद, और जीवन की कठिनाइयों से उबरने की प्रेरणा है। यह भक्तों को देवी की जागृति के प्रति जागरूक करता है।

कौनसी देवी का आह्वान इस भजन में किया गया है?

इस भजन में मुख्यतः देवी दुर्गा का आह्वान किया गया है, जिन्हें भारतीय संस्कृति में शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है।

भजन का पाठ करने के लाभ क्या हैं?

भजन का पाठ करने से मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति, और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। यह भक्ति के माध्यम से रोग और समस्याओं से बचने का उपाय है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!