Parvati Stotram

ऐसी मार लगाऊं तोहे कान्हा ( Aisi Maar Lagaun Tohe Kanha) - Jhanki Dance Shyam Bhajan - Bhaktilok

78 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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"ऐसी मार लगाऊं तोहे कान्हा" एक अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण श्याम भजन है, जो विशेष रूप से झांकी नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी मधुर लय के लिए जाना जाता है। यह भजन भक्त और भगवान के बीच के उस मधुर 'नटखट' संबंध को दर्शाता है, जहाँ भक्त अपने आराध्य श्री कृष्ण को प्रेम की डोर से बांधने का प्रयास करता है। वैष्णव संप्रदाय में, भगवान को केवल पूजा-अर्चना का विषय नहीं, बल्कि एक सखा, एक प्रियतम और एक शरारती बालक के रूप में देखा जाता है। इस भजन की पंक्तियाँ वृंदावन की कुंज गलियों की उस दिव्य लीला को जीवंत करती हैं, जहाँ राधा-कृष्ण का प्रेम ही सर्वोपरि है। यह भजन न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि जीवात्मा के परमात्मा के प्रति उस अनन्य समर्पण का प्रतीक है, जहाँ भक्त अपने कान्हा को रिझाने के लिए प्रेम भरी 'मार' (लाड़-प्यार) की बात करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

ऐसी मार लगाऊं तोहे कान्हा, कि याद करे तू सारी उमरिया,
ऐसी मार लगाऊं तोहे कान्हा, कि याद करे तू सारी उमरिया।
वृंदावन की कुंज गलिन में, जब तक ना होवे राधे-राधे,
तब तक ना मुरली बजाऊं, ओ मेरे सांवरे ओ मेरे कान्हा।
ऐसी मार लगाऊं तोहे कान्हा...

गोपी-गोपियां सब मिल आई, माखन की मटकी ले आई,
जब तक ना तू माखन खाए, तब तक ना मैं भोग लगाऊं,
ऐसी मार लगाऊं तोहे कान्हा...

राधा रानी के तू है दीवाने, हम भी हैं तेरे प्रेम के दीवाने,
जब तक ना तू दर्शन देवे, तब तक ना मैं घर को जाऊं,
ऐसी मार लगाऊं तोहे कान्हा, कि याद करे तू सारी उमरिया।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा है। यहाँ 'मार' शब्द का अर्थ हिंसा नहीं, बल्कि प्रेम की वह हठ है जो एक भक्त अपने भगवान से करता है। भक्त कहता है कि हे कान्हा! मैं तुम्हें अपने प्रेम और भक्ति से इतना अभिभूत कर दूंगा कि तुम्हें मेरी याद उम्र भर रहेगी। भजन में राधा-कृष्ण के प्रति अनन्य निष्ठा दिखाई गई है। भक्त का मानना है कि बिना 'राधे-राधे' के नाम के, कृष्ण की मुरली भी अधूरी है। यह भजन हमें सिखाता है कि भगवान को पाने का सबसे सरल मार्ग 'प्रेम' है। जब भक्त माखन और भोग के माध्यम से कृष्ण को रिझाता है, तो वह वास्तव में अपने हृदय का प्रेम अर्पित कर रहा होता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • भक्ति का स्वरूप: यह भजन 'सख्य भाव' और 'वात्सल्य भाव' का मिश्रण है।
  • सांस्कृतिक महत्व: झांकी नृत्य में इस भजन का प्रयोग दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।
  • आध्यात्मिक संदेश: राधा के बिना कृष्ण की भक्ति अधूरी है, यह इस भजन का मूल मंत्र है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी मांगलिक अवसर, जन्माष्टमी, या श्री कृष्ण संकीर्तन के दौरान गाया जा सकता है। इसे गाते समय मन में राधा-कृष्ण की छवि का ध्यान करना चाहिए। ताली बजाकर और नृत्य के साथ इसे गाने से भक्ति का आनंद दोगुना हो जाता है।

भजन का नाम आराध्य मुख्य भाव उपयुक्त अवसर
ऐसी मार लगाऊं तोहे कान्हा श्री कृष्ण प्रेम, हठ, समर्पण जन्माष्टमी, झांकी, सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

हाँ, इसे घर पर पूजा या कीर्तन के दौरान पूरी श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।

यहाँ 'मार' का अर्थ लाड़-प्यार और प्रेम की हठ है, न कि कोई शारीरिक प्रहार।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ: यह सामग्री भक्तिलोक के विद्वानों द्वारा वैष्णव परंपराओं और लोक भजनों के आधार पर संकलित की गई है। यह एक "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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