Chhath Puja Geet

जागो री मेरी माँ अब खोलो ये अँखियाँ भजन लिरिक्स (Jaago Ri Maiya Ab Kholo Ye Aankhiya Lyrics in Hindi) - Shreya Ghoshal Bhor Devi Bhajan - Bhaktilok

224 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

प्रस्तावना एवं परिचय

भक्ति की पुकार: माँ का जागरण

इस भजन के माध्यम से माँ की कृपा की याचना करें और भक्ति से अपनी आराधना का संचार करें।

जागो री मेरी माँ अब खोलो ये अँखियाँ थाल सजा के पूजा किया, आयी है सारी सखियाँ साथ साथ नमन है, साथ साथ है वंदन जागो री मेरी माँ अब खोलो ये अँखियाँ हो देखो बोल रहे पंछी, kilol करे बालक बिचारो को दूध, पिलाने लगी गयीया सौराल की लाली बिखरने लगी नभ पे उठो अब जागो, भोर भाई मैया जागो री मैया, जागो री मैया ओ मैया मोरी मैं पूजारण तेरी मां लिरिक्स आज तेरा जगराता मां भजन लिरिक्स खिल गयी कलियाँ, कुमुदनी कमल दाल शिव जी के मंदिर में चढाने लगा जल संख घरे घंटे नगाड़ें, मृदंग पर माँ तेरे आँगन में नाचे सभी झूम कर आरती उतारे तेरी, छवि को निहारे जाग जाग अँखियाँ, अब खोल भी दे मैया जागो री मोरी मैयाओ, मैया मोरी सारा जग द्वारे, खड़ा है महारानी भक्तों से आँगन भरा है माता रानी चरणों में सेवक खड़े हैं कर जोड़े वेद मे स्तुति आनंद मे हिलोरी आंबे जगदम्बे है, मैया शेरोंवाली सबको आशीष दीजे जग की खेवैया जागो री मैयाओ, मैया मोरी जागो री मोरी मैया, जागो री मैयाओ, मैया मोरी जागो री मैया ओ मैया मोरी
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में माँ देवी की जागरण की प्रेरणा दी गई है, जिसमें भक्त माता की आँखें खोलने की प्रार्थना कर रहे हैं ताकि उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जा सके। 'जागो री मेरी माँ' इस वाक्य में भक्त की आतुरता स्पष्ट है, जैसे माता का जागरण ही उनके जीवन में सुख और समृद्धि ला सकता है। भक्तिन की सभी सखियाँ भी इस भक्ति के अवसर पर आकर पूजा में भाग लेती हैं, जिससे संजीवनी प्रम की महत्ता और बढ़ जाती है। साथ ही, पंछियों के बोलने और बच्चों के खिलखिलाने की बातें जीवन की खुशी और भोलेपन का प्रतीक हैं। माँ का आँगन हर्षोल्लास से भरा होता है, जो हमें शांति और आनंद की अनुभूति कराता है।

भजन में माता की उपासना के माध्यम से एक भावात्मक गहराई झलकती है। भक्तों का समर्पण एवं प्रेम इस भक्ति के माध्यम से प्रकट होता है। 'ऊठो अब जागो' की संकल्पना में न केवल माता की जागृति की प्रार्थना है, बल्कि यह अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की इच्छा भी दर्शाती है। यह भजन भक्त को माँ के प्रति अपनी अनन्य निष्ठा का अहसास कराता है। भक्त जन एकत्र होकर माँ की आरती करते हैं, साथ ही वे उसकी दिव्यता का वर्णन करते हैं और उसकी छवि को निहारते हैं, जिससे आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है।

यह भजन भक्ति मार्ग के महत्वपूर्ण पहलुओं को उजागर करता है, जिसमें अद्वितीय विश्वास, भक्ति और समर्पण की भावना निहित है। देवी माता यहाँ केवल अनुपस्थित नहीं हैं, बल्कि भक्तों के आँगन में खड़ी होकर आशीर्वाद देती हैं। भक्तों की आराधना और माता के प्रति उनका प्रेम इस भजन की आत्मा है। इससे यह संदेश मिलता है कि सच्ची भक्ति बिना किसी स्वार्थ के होती है, जहाँ भक्त को केवल माँ के दर्शन और कृपा की आवश्यकता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय पौराणिकता के संदर्भ में देवी पूजा की महान परंपरा को दर्शाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि देवी माँ शक्ति का प्रतीक हैं और भक्तों के सभी संकटों का समाधान करती हैं। देवी दुर्गा, जो भारतीय संस्कृति में मातृ शक्ति की अवतार मानी जाती हैं, उनकी आराधना के समय इस प्रकार के जागरण भजन गाए जाते हैं। इससे भक्तों में आस्था और उत्साह का संचार होता है। भक्तों का यह संगठित होकर देवी माता की आरती करना पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ है, जैसे कि देवी भागवत में देवी की महिमा का वर्णन मिलता है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का पाठ मानसिक संतुलन, शांति, और सकारात्मक उद्दीपन लाने में सहायक है। नियमित रूप से इसे गाने से भक्तों को उत्साह, प्रेम, और आवश्यकता अनुसार ध्यान लगाने की शक्ति मिलती है। यह एक समर्पित साधना है जो आत्मिक ऊर्जा को जागृत करने में मदद करती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह के समय करना सर्वश्रेष्ठ होता है, विशेषकर जब दिन की शुरुआत हो रही हो। पूजा करते समय दीप जलाना, फूल और भोग अर्पित करना चाहिए। उपासक को शांत मन और श्रद्धा के साथ बैठकर ध्यान लगाना चाहिए, जिससे माँ की कृपा जल्दी प्राप्त हो सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का महत्व क्या है?

यह भजन माँ देवी की जागरूकता और आशीर्वाद की प्राप्ति की प्रार्थना करता है, जिससे भक्तों के संदेह और कठिनाइयों का दूर होता है।

क्या इस भजन का पाठ विशेष अवसरों पर किया जा सकता है?

हाँ, नवरात्रि, दिवाली, जैसे पवित्र अवसरों पर इस भजन का पाठ विशेष रूप से किया जाता है।

किस प्रकार की भावना इस भजन में व्यक्त की गई है?

इस भजन में प्रेम, निष्ठा, और भक्ति की भावना व्यक्त की गई है, जो माँ के प्रति अपार श्रद्धा और समर्पण को दर्शाता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!