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तेरी अंखिया हैं जादू भरी बिहारी मैं तो कब से खड़ी लिरिक्स भजन (Teri Akhiyan Hain Jaadubhari Lyrics in Hiindi) - Khatu Shyam Bhajan - Bhaktilok

122 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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तेरी अंखिया हैं जादू भरी बिहारी मैं तो कब से खड़ी लिरिक्स भजन परिचय

श्री बांके बिहारी और खाटू श्याम बाबा के चरणों में समर्पित यह अत्यंत ही भावपूर्ण और हृदयस्पर्शी भजन 'तेरी अंखिया हैं जादू भरी बिहारी मैं तो कब से खड़ी' भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है। ब्रज भूमि के बांके बिहारी और सीकर के खाटू श्याम बाबा को समर्पित यह संकीर्तन साधक के भीतर अनन्य प्रेम, विरह, और समर्पण के भाव को जागृत करता है। जब एक भक्त अपने आराध्य के सम्मुख निहारता है, तो उसकी आँखें केवल दर्शन की प्यासी होती हैं। यह भजन इसी आंतरिक छटपटाहट, अनन्य भक्ति और भगवान की मोहनी मूरत के प्रति पूर्ण समर्पण को व्यक्त करता है। इस भजन का गायन विशेष रूप से एकादशी, जन्मोत्माष्टमी, होली और साप्ताहिक सत्संग के अवसरों पर किया जाता है। इसे स्मरण करने से भक्त का मन संसार से विरक्त होकर भगवान के चरणों में लीन हो जाता है और आध्यात्मिक आनंद की प्राप्ति होती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थाई (मखड़ा):
तेरी अंखिया हैं जादू भरी बिहारी, मैं तो कब से खड़ी ॥
सुनलो मेरे श्याम सलोना, तुमने ही मुझ पर कर दिया टोना।
मेरी अंखियां तुम्ही से लड़ी, बिहारी मैं तो कब से खड़ी ॥

अंतरा 1:
तुम सा ठाकुर और ना पाया, तुमसे ही मैंने नेहा लगाया।
मैं तो तेरे ही द्वार पे पड़ी, बिहारी मैं तो कब से खड़ी ॥

अंतरा 2:
कृपा करो हरिदास के स्वामी, बांके बिहारी अन्तर्यामी।
मेरी टूटे ना भजन की लड़ी, बिहारी मैं तो कब से खड़ी ॥

अन्य लोकप्रिय पंक्तियाँ (संसरण):
श्याम सवेरे देखु तुझको कितना सुंदर रूप है लिरिक्स भजन...
तेरी बाँसुरी की धुन पर, सुध-बुध बैठी हूँ मैं बिसराए।
दर्शन दे दो ओ बांके बिहारी, नैन मेरे तुम्हें ही बुलाए ॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस पावन भजन के माध्यम से भक्त और भगवान के बीच के अगाध प्रेम को दर्शाया गया है। भक्त अपने आराध्य श्री बांके बिहारी जी से कहता है कि हे प्रभु! आपकी ये नेत्रहीन और मोहनी आँखें जादू से भरी हुई हैं, जिन्होंने मेरे मन को मोह लिया है। मैं बहुत लंबे समय से आपके दर्शन की आस में आपके द्वार पर खड़ी हूँ। भक्त कहता है कि हे मेरे श्याम सलोने! आपने मुझ पर अपनी कृपा का ऐसा जादू कर दिया है कि अब मेरी नजरें संसार से हटकर केवल और केवल आप ही पर टिक गई हैं।

आगे भक्त अपनी निष्ठा व्यक्त करते हुए कहता है कि मैंने संसार में बहुत खोजा, लेकिन आपके जैसा कृपालु और सुंदर ठाकुर (स्वामी) कहीं नहीं मिला। मैंने अपना सम्पूर्ण स्नेह (नेहा) केवल आपसे ही जोड़ लिया है। अब चाहे जो हो जाए, मैं आपके ही द्वार पर शरण लिए पड़ी हूँ। अंत में स्वामी हरिदास जी के आराध्य बांके बिहारी से यह प्रार्थना की जाती है कि हे अंतर्यामी प्रभु! मुझ पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखिए और मेरे जप-तप और भजन की यह पवित्र माला कभी टूटने न पाए। यह भजन जीव की परमात्मा के प्रति अनन्य पुकार है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल शब्दों का संकलन नहीं है, बल्कि यह माधुर्य भक्ति (Madhurya Bhakti) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां भक्त अपने इष्ट को प्रियतम के रूप में देखता है। बांके बिहारी और खाटू श्याम जी के दरबार में इस भजन का विशेष महत्व है। इसके माध्यम से साधक अपने अहंकार का त्याग कर भगवान के चरणों में पूर्ण रूप से समर्पित होने का संदेश प्राप्त करता है। इस भजन को नियमित रूप से स्मरण करने से मानसिक शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त में, संध्याकालीन बेला में, अथवा किसी भी धार्मिक अनुष्ठान और सत्संग के दौरान गाया जा सकता है। इसे गाते समय शुद्ध उच्चारण और आंतरिक भाव का होना अत्यंत आवश्यक है। ढोलक, मंजीरा और हारमोनियम के साथ इस भजन का संकीर्तन करने से वातावरण पूर्णतः पवित्र और भक्तिमय हो जाता है। आप श्री बांके बिहारी चालीसा के पाठ के उपरांत भी इस भजन को गा सकते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के मुख्य आराध्य श्री बांके बिहारी (श्री कृष्ण) हैं, जिनका मुख्य मंदिर वृंदावन में स्थित है और इन्हें खाटू श्याम बाबा के रूप में भी राजस्थान में पूजा जाता है। इस भजन में स्वामी हरिदास जी का भी स्मरण किया जाता है, जिन्होंने बांके बिहारी के विग्रह को प्रकट किया था और निधिवन की पवित्र भूमि पर उनकी उपासना की थी।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन पारंपरिक ब्रज लोक संस्कृति और आधुनिक संकीर्तन परंपरा का एक सुंदर संगम है। इसे विभिन्न लोक गायकों और कलाकारों द्वारा समय-समय पर अपने अनूठे अंदाज में गाया गया है। इसकी रचना ब्रज भाषा के सहज शब्दों और लोकगीतों की शैली पर आधारित है, जो सीधे श्रोता के हृदय को स्पर्श करती है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल हिंदी, ब्रज भाषा और अवधी के मिश्रण से युक्त है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग किया गया है। 'जादू भरी अंखियां', 'टोना करना', और 'भजन की लड़ी' जैसे मुहावरों और प्रतीकों के माध्यम से काव्य रस को अत्यंत गहरा बनाया गया है.

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • अनन्य भक्ति: भगवान से प्रेम केवल दिखावे का नहीं, बल्कि हृदय की गहराइयों से होना चाहिए।
  • धैर्य और प्रतीक्षा: ईश्वर की प्राप्ति के लिए साधक को धैर्य के साथ उनके द्वार पर डटे रहना चाहिए।
  • शरणागति: अपनी समस्त चिंताओं को प्रभु के चरणों में अर्पित कर देना ही सच्ची भक्ति है।
  • निरंतरता: भजन और स्मरण की माला कभी खंडित नहीं होनी चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ
अंखिया हैं जादू भरी मोहनी और आकर्षित करने वाली आँखें भगवान के सौंदर्य का वर्णन
टोना करना प्रेम के वशीभूत कर लेना भक्त के मन को मोह लेना
नेहा लगाना प्रेम करना या अनुराग रखना भगवान से अटूट संबंध
हरिदास के स्वामी स्वामी हरिदास जी के आराध्य बांके बिहारी निधिवन की परंपरा

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"तेरी अंखिया हैं जादू भरी बिहारी मैं तो कब से खड़ी..."
यहाँ भक्त कहता है कि हे बांके बिहारी! आपकी यह नशीली और जादुई आँखें ऐसी हैं कि जो भी इन्हें देख ले, वह सुध-बुध खो बैठता है। मैं बहुत समय से आपके दर्शन की अभिलाषा लिए खड़ी हूँ।

"सुनलो मेरे श्याम सलोना, तुमने ही मुझ पर कर दिया टोना..."
हे सांवरे सलोने! मेरी पुकार सुनो। आपने अपनी तिरछी नजरों से मुझ पर ऐसा प्रेम का जादू कर दिया है कि अब मुझे संसार की कोई सुध नहीं है।

"कृपा करो हरिदास के स्वामी, बांके बिहारी अन्तर्यामी..."
हे स्वामी हरिदास के प्रिय बांके बिहारी! आप सबके मन की बात जानने वाले अन्तर्यामी हैं, मुझ पर अपनी कृपा बनाए रखिए ताकि मेरे भजन की डोरी कभी न टूटे।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के स्मरण के साथ निम्नलिखित महामंत्र का भी जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:

"श्री बांके बिहारी लाल की जय!"

तथा भगवान श्रीकृष्ण के मूल मंत्र "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का स्मरण करने से भजन का फल कई गुना बढ़ जाता है। आप चाहें तो अन्य हरि भजन संग्रह का भी पाठ कर सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम तेरी अंखिया हैं जादू भरी बिहारी मैं तो कब से खड़ी
आराध्य देवता श्री बांके बिहारी / खाटू श्याम बाबा
रचना परंपरा पारंपरिक ब्रज भक्ति संगीत
भाषा हिंदी / ब्रज भाषा
मुख्य भाव प्रेम, विरह और समर्पण (माधुर्य भाव)
उपयुक्त अवसर सत्संग, एकादशी, कीर्तन, जागरण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन मुख्य रूप से श्री बांके बिहारी (वृंदावन के भगवान श्रीकृष्ण) और खाटू श्याम बाबा को समर्पित है।

इस भजन को आप प्रातः कालीन पूजा, संध्या आरती, साप्ताहिक सत्संग, एकादशी जागरण या किसी भी भक्तिमय उत्सव के दौरान गा सकते हैं।

"हरिदास के स्वामी" श्री बांके बिहारी जी को कहा गया है, क्योंकि स्वामी हरिदास जी ने ही अपनी साधना और संगीत से वृंदावन में बांके बिहारी के विग्रह को प्रकट किया था।

इस भजन का मुख्य भाव अनन्य प्रेम, विरह, और अपने इष्ट के प्रति पूर्ण शरणागति (समर्पण) है।

हाँ, चूँकि खाटू श्याम बाबा को भी श्री कृष्ण का ही रूप माना जाता है, इसलिए श्याम भक्त इस भजन को बड़े प्रेम से गाते हैं।

भजन के स्थायी और अंतरा को बार-बार बोलकर और संगीत की धुन के साथ गुनगुनाकर इसे आसानी से याद किया जा सकता है।

इसके श्रवण से चित्त शांत होता है, मानसिक तनाव दूर होता है और ईश्वर के प्रति भक्ति और विश्वास मजबूत होता है।

हाँ, ईश्वर की भक्ति में भाव मुख्य है, इसलिए आप इसे केवल ताली बजाकर या मानसिक रूप से भी गुनगुना सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में प्रस्तुत भजन के बोल, अर्थ और सांस्कृतिक संदर्भ पारंपरिक वैष्णव भक्ति परंपरा और लोकसाहित्य पर आधारित हैं। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध और उच्च कोटि की devotional सामग्री उपलब्ध कराना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • ब्रज की लोकगाथाएं एवं संकीर्तन परंपरा
  • श्री बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन की प्राकट्य कथाएं
  • भक्ति रसामृत सिंधु एवं पारंपरिक भजन संग्रह
  • खाटू श्याम संकीर्तन साहित्य एवं पत्रिकाएं

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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