Parvati Stotram

नैया है मझदार श्याम इसे पार लगा जाओ (Naiya Hai Majhdhar) - Raj Pareek Shree Bhajan - Bhaktilok

66 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

प्रस्तावना एवं परिचय

श्याम कृपा से नैया पार लगाने का भजन

इस भजन की भक्ति में अपनी नैया को सुदृढ़ करते हुए श्याम से पार लगाने की प्रार्थना करें।

नैया है मझदार श्याम इसे पार लगा जाओ श्री से हरि जैसे तुम आए हो, बार-बार हरि तुम मेरे श्याम गोपियाँ राधा संग बैठी हैं, मन में तेरी याद आदि से अंत तक सुख का सम्राज्य है यहाँ आहे घेरती हैं अंधीयारी, जल में है लहर गहरी प्यारे श्याम ये दीननाथ है उद्धार करो ध्यान में रखना, नैया है मझदार श्याम इसे पार लगा जाओ कृपा करो ये मुसीबत डर से, संसार प्रवास में जो नहीं नीरवता है श्याम से गोपियाँ राधा संग बैठी हैं, मन में तेरी याद आदि से अंत तक सुख का सम्राज्य है यहाँ
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'नैया है मझदार श्याम इसे पार लगा जाओ' में गहरी संकट में फंसे जीव की सहायता करने की सहृदय प्रार्थना की गई है। 'नैया' का प्रतीकात्‍मक अर्थ जीवन यात्रा और 'मझदार' का अर्थ उन कठिनाईयों से है जिनमें इंसान लड़ता है। श्याम के प्रति भक्त की भक्ति और विश्वास स्पष्ट है, जहाँ वे पाठक या श्रोता से आशा रखते हैं कि श्याम उनकी नैया को सुखपूर्वक पार लगाएंगे। इस भजन के हर एक बोल में श्याम की कृपा का महत्व है, जिससे भक्त अपने संदेहों और दुखों को दूर करने की कोशिश करते हैं।

भावात्मक दृष्टिकोण से, यह भजन भक्त की मानसिक स्थिति का विस्तृत चित्रण करता है। नैया का प्रतीक मानव जीवन का संघर्ष है जो समय-समय पर भयानक ज्वालाओं से घिरा होता है। भक्त श्याम से प्रार्थना करते हैं कि उनके सानिध्य में रहकर वे सब कुछ सह सकते हैं। उत्तरदायित्व और भक्ति के बल पर, श्याम की कृपा से भक्ति मार्ग में आगे बढ़ना संभव है। यह भजन न केवल संकट के समय, बल्कि जीवन के हर मोड़ पर श्याम की याद दिलाता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग की गहराई को दर्शाया गया है, जहाँ भक्त अपना सबकुछ श्याम को समर्पित करते हैं। श्याम का चित्रण एक सर्वशक्तिमान के रूप में है, जो न केवल भक्त की नैया को पार लगाता है, बल्कि जीवन की कठिनाइयों से भी उबारता है। सच्चे भक्ति में विनम्रता, श्रद्धा, और शांति का अनुभव किया जा सकता है। भजन, भक्ति और प्रेम का एक आदर्श उदाहरण है, जो हमें सिखाता है कि सच्चा प्रेम श्याम से किस प्रकार जीवन को मार्गदर्शित करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय धार्मिकता में भक्ति की महानता को प्रदान करता है। 'श्री श्याम' का संदर्भ न केवल कृष्ण के प्रति असीम श्रद्धा है, बल्कि यह हर भक्त की आशा का प्रतीक है। पुराणों में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं जहाँ भगवान ने अपने भक्तों की कठिनाइयों का समाधान किया है। जैसे कि भागवत पुराण में, कृष्ण ने गोकुलवासियों को संकटों से उबारा। इस भजन के माध्यम से भक्त अपनी समस्याओं में बल पाते हैं और अपने मन में शांति का अनुभव करते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक बल की वृद्धि होती है। यह न केवल भक्त को दृढ़ बनाता है, बल्कि मन की चिंताओं को भी दूर करता है। श्याम की कृपा से भक्त जीवन में संतोष और खुशी का अनुभव कर सकते हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह या संध्या समय करना अत्यधिक लाभकारी होता है। एक दीप जलाएँ और अपने मन को श्याम के प्रति समर्पित करें। जाप करते समय एक शांत और ध्यान लगाकर बैठने का प्रयास करें। सच्चे मन से, भाव से भक्ति करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का क्या महत्व है?

इस भजन का महत्व जीवन की सभी कठिनाइयों को पार लगाने की प्रार्थना करना है। भक्त भगवान श्याम से संकट में मदद की उम्मीद रखते हैं।

भजन का सही समय क्या है?

इस भजन का जाप सुबह या शाम में करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, खासकर जब आप शांत वातावरण में हो।

क्या इस भजन का जाप नियमित रूप से करना चाहिए?

हाँ, नियमित जाप से मानसिक शांति और आध्यात्मिक विकास होता है। यह कठिनाई में होने पर विशेष रूप से सहायक होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!