Parvati Stotram

ना माँ का नाम लिया (Naa Maa Ka Naam Liya) - Latest Navrtra Bhajan Mata Jhanki - Bhaktilok

53 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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ना माँ का नाम लिया (Naa Maa Ka Naam Liya) - Latest Navratra Bhajan Mata Jhanki

प्रकाशित तिथि: सितंबर 2022 | श्रेणी: Latest Bhakti Song | स्रोत: Parvati Stotram & Navratra Tradition

सनातन संस्कृति में नवरात्रि का पावन पर्व आदिशक्ति माँ दुर्गा की उपासना, आराधना और उनके अलौकिक स्वरूप के स्मरण का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। इस पावन अवसर पर माता रानी के दरबार में सजी झांकियों और संकीर्तन कार्यक्रमों की धूम पूरे देश में देखने को मिलती है। इसी भक्ति रस से ओत-प्रोत और माँ भगवती के चरणों में पूर्ण शरणागति समर्पित करता हुआ एक अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण भजन है— "ना माँ का नाम लिया (Naa Maa Ka Naam Liya)"। प्रसिद्ध गायक उपेन्द्र राणा और प्रीति चौधरी के मधुर स्वरों में गाया गया तथा इंदरपाल द्वारा रचित यह नवीनतम नवरात्रि भजन भक्तों के अंतःकरण को प्रफुल्लित करने वाला है। इस भजन में माँ दुर्गा, माता पार्वती और आदिशक्ति के विभिन्न रूपों की महिमा का गुणगान करते हुए सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर केवल भगवती के चरणकमलों में ध्यान लगाने की प्रेरणा दी गई है। इस लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल, हिंदी भावार्थ, गायन शैली और इसके आध्यात्मिक महत्व का विस्तृत अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

नवरात्रि विशेष भजन

॥ स्थायी (मुखड़ा) ॥

ना माँ का नाम लिया, ना माँ को याद किया,
संसार के मेले में, दिल को यूँ बाद किया!
कब जागेगी किस्मत मेरी, हे जगदम्बे भवानी,
तेरे चरणों की धूल को, मैंने मस्तक पर धर लिया!

॥ प्रथम अंतरा ॥

सुख के समय में तुझको, इन्सान भूल जाता,
दुख की जब पड़ी आफत, तब दर पे है आता।
अरे मन के अंधे इन्सान, तू होश में अब आ जा,
माँ दुर्गा के चरणों में, अपना शीश झुका जा!
जिसने भी माँ का नाम लिया, उसका बेड़ा पार हुआ,
इस भवसागर से उसका, उद्धार यार हुआ!

॥ द्वितीय अंतरा ॥

शेरों वाली मैया की, झांकी निराली सजी है,
भक्तों की भीड़ देखो, चौखट पे खड़ी है।
ऊपर गगन में देखो, तारे भी झिलमिलाएं,
धरती पे आ के सारे, माँ के गुण गाएं।
उपेंद्र राणा प्रीति गायें, इंदरपाल लिखे गाथा,
संसार में सबसे बड़ी, है जगत की ये माता!

॥ समापन / रिफ्रेन ॥

बोलो साचे दरबार की जय!
शेरोंवाली मैया की जय!
जय माता दी, जय माता दी बोल!
अपने जीवन के सारे, तू पाप धो ले!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह पावन भजन जीवात्मा की उस विडंबना और चेतना को जागृत करता है जिसमें मनुष्य सांसारिक माया-मोह और प्रपंचों में फंसकर अपने परम आराध्य को भूल जाता है। भजन की पंक्तियों का गहरा दार्शनिक और आध्यात्मिक अर्थ निम्नलिखित है:

मुखड़े का भाव

गायक आरंभ में ही मनुष्य की भूल का स्मरण कराते हुए कहता है कि हे मनुष्य! तूने जीवनभर संसार के भौतिक मेलों और दिखावे में रमकर अपनी माता यानी जगदम्बे भवानी को याद तक नहीं किया। परंतु जब जीव को अपनी भूल का अहसास होता है और वह माँ के चरणों की धूल को अपने मस्तक पर धारण करता है, तब उसका सोया हुआ भाग्य जाग जाता है और जीवन धन्य हो जाता है।

अंतरा और संदेश का भाव

भजन के अंतरों में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि मनुष्य अपनी सुख-सुविधाओं में इतना मग्न रहता है कि संकट आने पर ही उसे भगवान या माता की याद आती है। कवि इंदरपाल जी चेतावनी देते हैं कि मन के अंधेपन को छोड़कर तुरंत माँ दुर्गा के दरबार में शीश झुकाना चाहिए। जो भी सच्चे मन से आदिशक्ति का स्मरण करता है, उसका यह भवसागर पार हो जाता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। नवरात्रि की झांकी और मेलों का सजीव वर्णन करते हुए कलाकारों ने यह दर्शाया है कि संपूर्ण सृष्टि माँ के चरणों में नतमस्तक है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

भक्ति संगीत के क्षेत्र में इस प्रकार के आधुनिक नवरात्रि भजन पारंपरिक लोक धुनों और आधुनिक संगीत का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करते हैं। इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • आदिशक्ति की महिमा: भजन सीधे तौर पर माँ दुर्गा के नौ रूपों और उनकी असीम करुणा से जोड़ता है।
  • मानव स्वभाव का यथार्थ चित्रण: सुख में ईश्वर को भूलने और दुःख में स्मरण करने की मानवीय कमजोरी का सुंदर मनोवैज्ञानिक विश्लेषण।
  • नवरात्रि उत्सव का आनंद: झांकी दर्शन, माता के जयकारे और सामूहिक संकीर्तन की संस्कृति को जीवित रखना।
  • शरणागति का मार्ग: अहंकार का त्याग कर माँ के चरणों में समर्पण करना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य बताया गया है।

यदि आप माता रानी के अन्य पावन रूपों और स्तोत्रों के बारे में पढ़ना चाहते हैं, तो हमारे विस्तृत लेख पार्वती स्तोत्र एवं माता के पावन स्वरूप का अध्ययन अवश्य करें।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन का आनंद और आध्यात्मिक लाभ निम्नलिखित अवसरों पर विशेष रूप से लिया जा सकता है:

नवरात्रि के नौ दिन

शारदीय और चैत्र नवरात्रि के दौरान माता की चौकी, जागरण और झांकी सजाते समय इस भजन को विशेष रूप से गाया जाता है।

संध्या कालीन आरती

घर के मंदिर में दीपक प्रज्वलित करने के पश्चात दैनिक पूजा या संध्या वंदन के समय इसे सुनकर मन को शांति मिलती है।

माता के सत्संग

सामूहिक माता के जागरण, कीर्तन मंडली और धार्मिक अनुศาสनों में ताल और ढोलक के साथ इस भजन की प्रस्तुतियां दी जाती हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से माँ दुर्गा (आदिशक्ति भवानी) को समर्पित है। सनातन धर्म में आदिशक्ति को संपूर्ण ब्रह्मांड की जननी, ऊर्जा का स्रोत और पालनकर्ता माना गया है। मार्कण्डेय पुराण के अंतर्गत दुर्गा सप्तशती में माता के विभिन्न रूपों (महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती) का विस्तार से वर्णन मिलता है। इसके साथ ही, भगवान शिव की अर्धांगिनी माता पार्वती के रूप में भी देवी जगत का कल्याण करती हैं। संकीर्तन परंपरा में संतों और गीतकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से इसी परम चेतना को आम जनमानस तक पहुँचाने का पवित्र कार्य किया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

"ना माँ का नाम लिया" भजन आधुनिक भक्ति संगीत उद्योग (Hansa Music) के बैनर तले सितंबर 2022 में रिलीज़ किया गया था। इसके गीतकार इंदरपाल हैं, जिन्होंने बहुत ही सरल और सीधे शब्दों में आम आदमी के जीवन की व्यस्तता और भगवान से उसकी दूरी को शब्दों में पिरोया है। प्रसिद्ध गायक उपेन्द्र राणा और गायिका प्रीति चौधरी ने अपनी ऊर्जावान और सुरीली आवाज से इस भजन में प्राण फूंक दिए हैं। बाल कलाकार श्री जी राघव की स्टारिंग ने इस वीडियो और झांकी को और अधिक आकर्षक बना दिया है। यह रचना समकालीन भक्ति गीतों में एक मील का पत्थर है जो लोगों को अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़े रखती है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा बहुत ही सहज, सरल और आम बोलचाल की हिंदी (खड़ी बोली) है, जिसमें लोक भाषा का मिठास भी घुला हुआ है। काव्य शैली की दृष्टि से इसमें मात्राओं का सटीक अनुशासन और तुकबंदी (Rhyming Scheme) का विशेष ध्यान रखा गया है जैसे— 'लिया-किया', 'आया-लाया', 'सजी है-खड़ी है'। रूपक और प्रतीकों के माध्यम से 'संसार के मेले' को मायावी संसार और 'माँ के चरणों की धूल' को परम शरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यही कारण है कि यह भजन पहली ही बार सुनने वाले के हृदय पर गहरी छाप छोड़ जाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

इस भजन से हमें निम्नलिखित अमूल्य जीवन सीख मिलती हैं:

  • अहंकार का त्याग: सांसारिक ऐश्वर्य और मेलों में खोकर अपने मूल स्रोत (ईश्वर) को न भूलना।
  • नियमित स्मरण: केवल संकट के समय ही नहीं, बल्कि सुख और सामान्य दिनों में भी ईश्वर का सिमरन करना चाहिए।
  • शरणागति का भाव: जीवन की बाधाओं से पार पाने के लिए भगवती के चरणों में पूर्ण समर्पण आवश्यक है।
  • कृतज्ञता (Gratitude): माता द्वारा प्रदत्त इस सुंदर जीवन और श्वासों के लिए हमेशा आभार व्यक्त करना चाहिए।

संसार के चक्र से मुक्ति पाने के लिए सनातन ज्ञान की अन्य शाखाओं जैसे श्री कृष्ण स्तोत्र और भगवद्गीता के उपदेशों का भी निरंतर अध्ययन करना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
जगदम्बे भवानी संपूर्ण जगत की माता (दुर्गा) आदिशक्ति जो ब्रह्मांड की पालना करती हैं।
संसार के मेले भौतिक दुनिया और उसके प्रपंच मायावी आकर्षण जिसमें जीव भटक जाता है।
चरणों की धूल माता के चरणों की रज परम पवित्र आशीर्वाद और अहंकार का नाश।
भवसागर जन्म-मृत्यु का चक्र संसार रूपी सागर जिससे तरना ही मोक्ष है।
बेड़ा पार हुआ कल्याण होना / उद्धार होना जीवन के दुखों का अंत और आध्यात्मिक मुक्ति।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

भजन की पंक्तियों का सूक्ष्म भावार्थ इस प्रकार है:

"ना माँ का नाम लिया, ना माँ को याद किया..."

यहाँ कवि मनुष्य की आत्म-आलोचना प्रस्तुत करता है कि पूरे जीवन सांसारिक सुख-भोग में लिप्त रहकर उसने एक पल भी अपनी आद्या शक्ति का स्मरण नहीं किया, जिससे उसका जीवन व्यर्थ हो गया.

"कब जागेगी किस्मत मेरी, हे जगदम्बे भवानी..."

जब जीव को अपनी गलती का बोध होता है, तब वह व्याकुल होकर जगदम्बा भवानी से अपनी सोई हुई किस्मत जगाने और अपनी शरण में लेने की प्रार्थना करता है.

"जिसने भी माँ का नाम लिया, उसका बेड़ा पार हुआ..."

यह पंक्ति इस अटूट विश्वास को दर्शाती है कि जो कोई भी सच्चे हृदय से माता का नाम जपता है, उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और वह इस संसार सागर से तर जाता है.

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं मंत्र | Related Mantra & Shlok

माता रानी की आराधना के समय निम्नलिखित बीज मंत्रों और श्लोकों का स्मरण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:

॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥

यह नौ अक्षरी महामंत्र माँ दुर्गा का सबसे शक्तिशाली बीज मंत्र है, जिसके जाप से सभी प्रकार की बाधाओं का नाश होता है।

॥ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥

यह श्लोक माता पार्वती और नारायणी के मंगलाचरण के रूप में संपूर्ण सनातन जगत में अत्यंत प्रसिद्ध है। अधिक जानकारी के लिए दैनिक आरती एवं स्तोत्र संग्रह पढ़ें।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम ना माँ का नाम लिया (Naa Maa Ka Naam Liya)
अधिष्ठात्री देवी माँ दुर्गा / आदिशक्ति / भवानी
गायक कलाकार उपेन्द्र राणा (Upendra Rana) एवं प्रीति चौधरी (Preeti Choudhary)
गीतकार इंदरपाल (Inderpal)
संगीत लेबल / कंपनी हंसा म्यूजिक (Hansa Music / Bhakti Bhajan)
कलाकार (Starring) श्री जी राघव (Shree Jee Raghav)
भाषा सरल हिंदी / ब्रज-खड़ी बोली
मुख्य विषय / भाव शरणागति, भक्ति, माता की महिमा, आत्म-चिंतन
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण, संध्या आरती

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

उत्तर: इस पावन नवरात्रि भजन के मुख्य गायक उपेन्द्र राणा (Upendra Rana) और प्रीति चौधरी (Preeti Choudhary) हैं।

उत्तर: इस भजन के सुंदर और भावपूर्ण बोल प्रसिद्ध गीतकार इंदरपाल (Inderpal) द्वारा लिखे गए हैं।

उत्तर: यह भजन 'हंसा म्यूजिक' (Hansa Music) और 'भक्ति भजन' चैनल के माध्यम से रिलीज़ किया गया है।

उत्तर: इसे मुख्य रूप से शारदीय और चैत्र नवरात्रि के दौरान माता की झांकी, जागरण, चौकी और संध्या वंदन के समय गाया जाता है।

उत्तर: भजन का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य को सांसारिक मोह-माया में न फंसकर निरंतर माता रानी का स्मरण करना चाहिए और उनके चरणों में पूर्ण शरणागति रखनी चाहिए।

उत्तर: हाँ, इसे घर पर पूजा के समय या अकेले में सुनने से मन को असीम शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

उत्तर: इस भजन वीडियो में बाल कलाकार श्री जी राघव (Shree Jee Raghav) ने अपनी सुंदर उपस्थिति दर्ज कराई है।

उत्तर: माता रानी की सच्ची आराधना, उनके मंत्रों का जाप, सात्विक आचरण और प्रेमपूर्वक संकीर्तन करना ही उनकी कृपा पाने का सबसे सरल उपाय है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री संप्रदाय, लोक परंपरा और आधुनिक भक्ति संगीत के स्रोतों का अध्ययन करके संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक भजन बोल, हिंदी भावार्थ और सांस्कृतिक महत्व से अवगत कराना है। किसी भी प्रकार की त्रुटि या सुझाव के लिए आप Bhaktilok संपादकीय टीम से संपर्क कर सकते हैं।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन धर्म ग्रंथ एवं मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती संदर्भ)
  • हंसा म्यूजिक ऑफिशियल रिलीज आर्काइव (सितंबर 2022)
  • लोक संकीर्तन एवं नवरात्रि भजन संग्रह परंपरा
  • भक्तलोक धार्मिक एवं सांस्कृतिक अनुसंधान डेटाबेस

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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