bholenath bhajan lyrics

मेरे नाथ हो भोलेनाथ तुम (Mere Nath Ho Bholenath Tum) - SURESH WADKAR Shiv Bhajan - Bhaktilok

274 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मेरे नाथ हो भोलेनाथ तुम (Mere Nath Ho Bholenath Tum) - सुरेश वाडकर शिव भजन परिचय

देवादिदेव महादेव भगवान शिव को समर्पित यह भजन "मेरे नाथ हो भोलेनाथ तुम (Mere Nath Ho Bholenath Tum)" अपनी मधुर धुन और प्रसिद्ध पार्श्व गायक सुरेश वाडकर (Suresh Wadkar) के ओजस्वी एवं भावपूर्ण स्वर के कारण शिव भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। शिव पुराण और हिंदू सनातन परंपरा में भगवान शिव को 'आशुतोष' कहा गया है, जिसका अर्थ है अतिशीघ्र प्रसन्न होने वाले भगवान। इस भजन में साधक अपनी संपूर्ण निष्ठा, समर्पण और शरणागति के साथ महादेव को अपना सर्वस्व मानता है। जब सुरेश वाडकर की शांत, गंभीर और भक्तिरस से ओत-प्रोत आवाज में यह भजन गूंजता है, तो श्रोता का मन भौतिक संसार की चिंताओं से मुक्त होकर परम चेतना और वैराग्य के सागर में गोता लगाने लगता है। यह रचना केवल एक संगीत की रचना नहीं है, बल्कि यह जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का एक आध्यात्मिक माध्यम है। भगवान शिव के कैलाशवासी स्वरूप, गले में सर्पराज, जटाओं से बहती मां गंगा, और ललाट पर सुशोभित चंद्रदेव का इस भजन में जीवंत स्मरण कराया गया है। विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन मास के सोमवार, प्रदोष व्रत और दैनिक शिव पूजा के समय इस भजन का श्रवण और संकीर्तन साधक के अंतःकरण को पवित्र करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

शुद्ध उच्चारण और अनन्य भक्ति भाव के साथ भगवान शिव के इस पावन भजन का स्मरण करें:

मृदंग और डमरू की गूंज के साथ स्थायी (Mukhda):

मेरे नाथ हो भोलेनाथ तुम, मेरे स्वामी हो पशुपतिनाथ तुम,
इस जीवन की हर एक सांस में, साक्षात बसो दिन-रात तुम।
मेरे नाथ हो भोलेनाथ तुम...

प्रथम अंतरा (First Antara):

जटाओं में गंगा की धारा विराजे, ललाट पे चंदा का टीका सजे,
गले नाग वासुकी का पहरा रहे, भस्म रमाए जो योगी सजे।
इस सृष्टि के पालनहार तुम, संहारक हो और कर्ता तुम,
मेरे नाथ हो भोलेनाथ तुम, मेरे स्वामी हो पशुपतिनाथ तुम।

द्वितीय अंतरा (Second Antara):

कोई पूजे राम को श्याम को, कोई ध्याए विष्णु के धाम को,
मेरा रोम-रोम बस गा रहा, तेरे कैलाश के नाम को।
मेरे संकट सारे हरो हे प्रभु, मेरे भाग्य के विधाता तुम,
मेरे नाथ हो भोलेनाथ तुम, मेरे स्वामी हो पशुपतिनाथ तुम।

अंतिम अंतरा (Final Antara):

बेलपत्र और जल की एक धारा, तेरे चरणों में मैंने चित्त है वारा,
सुरेश वाडकर गाए महिमा तेरी, भवसागर से कर दो बेड़ा किनारा।
मेरी भक्ति को स्वीकार करो, मेरे प्राणों के आधार तुम,
मेरे नाथ हो भोलेनाथ तुम, मेरे स्वामी हो पशुपतिनाथ तुम।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन साधक के भीतर छिपी हुई परम भक्ति और वैराग्य की भावना को जाग्रत करता है। इसके माध्यम से भक्त भगवान शिव के सम्मुख अपनी पूर्ण लाचारी और उनके प्रति अटूट विश्वास को प्रकट करता है। 'मेरे नाथ हो भोलेनाथ तुम' पंक्ति में यह स्वीकार किया गया है कि संसार में जितने भी रिश्ते-नाते हैं, वे सब नश्वर हैं, किंतु वास्तविक और शाश्वत स्वामी केवल भोलेनाथ ही हैं। उन्हें 'पशुपतिनाथ' कहकर इस बात का स्मरण कराया गया है कि वे समस्त जीवों (पशुओं अर्थात सांसारिक मोह-माया में बंधे साधारण जीवों) के भी स्वामी और रक्षक हैं। भजन के अंतरा में शिव के स्वरूप का जो वर्णन किया गया है—जटाओं में गंगा, गले में नाग, और भस्म रमी हुई काया—वह यह सिखाता है कि जो समस्त भौतिक सुखों को त्यागकर वैराग्य धारण करते हैं, वही असली सुख और शांति को प्राप्त करते हैं। इस भजन का मुख्य भाव यह है कि व्यक्ति चाहे किसी भी इष्ट की पूजा करे, अंततः समस्त चेतना का स्रोत उसी एक महाशिव में समाहित हो जाता है। बेलपत्र और जल जैसी साधारण वस्तुएं अर्पित करके भी शिव को कैसे प्रसन्न किया जा सकता है, इसका सुंदर संदेश इस भजन में निहित है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

भगवान शिव को समर्पित इस भजन की विशेषता इसकी सरलता और गहराई दोनों में है। सुरेश वाडकर की सुरीली आवाज ने इसे अमर बना दिया है। इस भजन का गायन या श्रवण करने से साधक के मन का अहंकार समाप्त होता है और विनम्रता का भाव उत्पन्न होता है। शिव पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति सच्चे मन से शिव का स्मरण करता है, उसके समस्त पाप और संताप नष्ट हो जाते हैं। इस भजन में शिव के करुणावान रूप पर विशेष प्रकाश डाला गया है, जो विषपान कर सकते हैं तो भक्तों पर अमृत की वर्षा भी कर सकते हैं। यह रचना साधकों को शिव तांडव स्तोत्र और महामृत्युंजय मंत्र की तरह ही आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन का गायन और श्रवण विशेष अवसरों पर अत्यधिक फलदायी माना जाता है:

  • दैनिक पूजा: प्रतिदिन प्रातःकाल स्नान के पश्चात शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करते समय।
  • प्रदोष व्रत और सोमवार: सावन मास के सोमवार और प्रत्येक त्रयोदशी (प्रदोष) के दिन संध्याकालीन बेला में।
  • महाशिवरात्रि: महाशिवरात्रि की रात्रि के चारों पहर की पूजा और जागरण के दौरान।
  • सत्संग और अनुष्ठान: धार्मिक अनुष्ठानों, शिव महापुराण की कथा और भजन संध्या के आयोजनों में।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में देवादिदेव महादेव, शिव, शंकर, भोलेनाथ और पशुपतिनाथ हैं, जिन्हें त्रिदेवों में संहार और प्रलय के साथ-साथ परम कल्याणकारी देवता माना गया है। इस भजन को अपनी अद्वैत और भावपूर्ण शैली से जीवंत करने वाले प्रतिष्ठित पार्श्व गायक सुरेश वाडकर हैं, जिन्होंने अपनी शास्त्रीय संगीत की सुदृढ़ नींव के माध्यम से इसे भक्ति का एक उच्च शिखर प्रदान किया है। उनकी गायकी में एक शांत और ध्यानमग्न भाव झलकता है, जो श्रोता को मंत्रमुग्ध कर देता है.

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भारतीय संगीत जगत में भजन और भक्ति गीतों की एक समृद्ध परंपरा रही है। 'मेरे नाथ हो भोलेनाथ तुम' भजन को आधुनिक संगीत व्यवस्था और पारंपरिक शास्त्रीय रागों के मिश्रण से तैयार किया गया है। गीत के बोल इस प्रकार रचे गए हैं कि कोई भी सामान्य व्यक्ति या बच्चा भी इसे आसानी से गुनगुना सके। इसकी पृष्ठभूमि में भारतीय सनातन संस्कृति के उस दर्शन को रखा गया है जिसमें ईश्वर को केवल एक शक्ति नहीं, बल्कि अपने सखा, नाथ और पालक के रूप में देखा जाता है। सुरेश वाडकर द्वारा इसे गाए जाने के बाद से यह घर-घर में शिव भक्तों की प्लेलिस्ट का मुख्य हिस्सा बन गया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल, सुबोध और प्रवाहमयी हिंदी तथा ब्रज-अवधि मिश्रित बोलचाल की भाषा में रचित है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग किया गया है जैसे 'जटाओं में गंगा', 'भस्म रमाए जो योगी सजे'। भाषा की यह सरलता ही इस भजन की सबसे बड़ी शक्ति है, क्योंकि यह सीधे श्रोता के हृदय को स्पर्श करती है। शब्दों का चयन इस प्रकार किया गया है कि उच्चारण करते समय जिह्वा पर एक प्रकार का माधुर्य और दिव्यता का अनुभव होता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयां या विषमताएं क्यों न आएं, मनुष्य को अपना धैर्य और संतुलन नहीं खोना चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे भगवान शिव ने हलाहल विष को अपने गले में धारण कर लिया था। यह भजन अहंकार के त्याग और भगवान के प्रति पूर्ण शरणागति (समर्पण) का संदेश देता है। यह हमें यह भी याद दिलाता है कि यह संसार नश्वर है और अंततः हर जीव को उसी परम चेतना मेंलीन होना है, इसलिए जीवन को अहंकार रहित और सेवा भाव से जीना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदावली (Word) सरल हिंदी अर्थ (Simple Meaning) आध्यात्मिक संदर्भ (Context)
भोलेनाथ जो बहुत भोले और आसानी से प्रसन्न होने वाले हों भगवान शिव की सहज करुणा और सरलता का प्रतीक
पशुपतिनाथ समस्त जीवों (पशुओं) और संसार के स्वामी प्रकृति और जीव-जंतुओं के पालक के रूप में शिव
भस्म पवित्र राख संसार की नश्वरता और वैराग्य का प्रतीक
वासुकी शिव के गले में लिपटे नागराज भय पर विजय और प्रकृति के हर रूप को अपनाने का भाव
भवसागर जन्म-मृत्यु का यह संसार रूपी सागर इससे मुक्ति पाने के लिए शिव की कृपा अनिवार्य है

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"मेरे नाथ हो भोलेनाथ तुम, मेरे स्वामी हो पशुपतिनाथ तुम..."
भक्त भगवान शिव को संबोधित करते हुए कहता है कि हे प्रभु! आप ही मेरे वास्तविक नाथ और स्वामी हैं। संसार के सारे रिश्ते झूठे हैं, मेरा सच्चा संबंध केवल आपसे है।

"जटाओं में गंगा की धारा विराजे, ललाट पे चंदा का टीका सजे..."
शिव के स्वरूप का वर्णन करते हुए भक्त कहता है कि आपकी जटाओं से मां गंगा का पावन प्रवाह निकलता है और आपके मस्तक पर द्वितीया का चंद्रमा सुशोभित होता है। यह दृश्य आपकी शीतलता और दिव्यता को दर्शाता है।

"बेलपत्र और जल की एक धारा, तेरे चरणों में मैंने चित्त है वारा..."
भक्त अपनी भक्ति का समर्पण करते हुए कहता है कि हे शिव! मेरे पास आपको अर्पित करने के लिए बड़े-बड़े उपहार नहीं हैं, केवल जल की धारा और एक बेलपत्र है, और मैंने अपना चित्त आपके चरणों में पूरी तरह वार दिया है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन का पाठ करने के साथ निम्नलिखित पावन शिव मंत्रों का स्मरण करने से साधना पूर्ण होती है:

  • महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
  • पंचाक्षर मंत्र: ॐ नमः शिवाय॥
  • शिव गायत्री मंत्र: ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम मेरे नाथ हो भोलेनाथ तुम (Mere Nath Ho Bholenath Tum)
गायक (Singer) सुरेश वाडकर (Suresh Wadkar)
समर्पित देवता भगवान शिव / भोलेनाथ / पशुपतिनाथ
भाषा हिंदी / ब्रज-अवधि मिश्रित
विषय / थीम शिव भक्ति, वैराग्य, समर्पण और शरण
मुख्य भाव (Bhava) भक्ति, विनय और अगाध श्रद्धा
उपयुक्त अवसर सोमवार व्रत, महाशिवरात्रि, दैनिक पूजा, शिव सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण शिव भजन के गायक प्रसिद्ध पार्श्व एवं शास्त्रीय गायक **सुरेश वाडकर (Suresh Wadkar)** हैं।

यह भजन किसी भी दिन सुना जा सकता है, परंतु **सावन मास के सोमवार, प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि** और प्रतिदिन सुबह की पूजा के समय इसका श्रवण करना विशेष रूप से फलदायी होता है।

'पशुपतिनाथ' का अर्थ है समस्त जीवों (पशुओं) और संसार के प्राणियों के स्वामी। यह भगवान शिव का वह स्वरूप है जो सभी जीव-जंतुओं और इंसानों का कल्याण करते हैं।

हाँ, इस भजन को घर पर जल चढ़ाते समय, दीपक जलाकर या संध्या आरती के समय बजाने और गाने से घर का वातावरण पवित्र और सकारात्मक बनता है।

शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव को शुद्ध जल, कच्चा दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन और आंकड़े के फूल अतिप्रिय हैं।

इस भजन के नियमित श्रवण से मन की चंचलता शांत होती है, अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और भगवान शिव के प्रति अटूट भक्ति व वैराग्य भाव जागृत होता है।

हाँ, इस लेख में संपूर्ण भजन के शुद्ध हिंदी (देवनागरी) बोल और उनके सरल अर्थ उपलब्ध कराए गए हैं ताकि भक्तों को उच्चारण में कोई असुविधा न हो।

शिव भक्ति में समर्पण का अर्थ अपने अहंकार और सांसारिक चिंताओं को महादेव के चरणों में त्याग देना है, जिससे साधक को आंतरिक शांति और मुक्ति का मार्ग प्राप्त होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में प्रस्तुत भजन के बोल, अर्थ, और व्याख्या शिव पुराण, सनातन भक्ति परंपरा और शास्त्रीय संगीत के मानदंडों को ध्यान में रखते हुए प्रामाणिक रूप से संकलित किए गए हैं। हमारा उद्देश्य शिव भक्तों को उच्च कोटि की आध्यात्मिक सामग्री उपलब्ध कराना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • शिव महापुराण - गीताप्रेस गोरखपुर प्रकाशन
  • पारंपरिक भारतीय शिव भजन संकलन एवं लोक संस्कृति
  • सुरेश वाडकर द्वारा प्रस्तुत devotional audio archives
  • सनातन धर्म के पंचांग एवं व्रत-उत्सव संदर्भ

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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