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Bholenath Bhajan

भोला भंडारी आया, मोहन तेरी गली में (हरि-हर मिलन) भजन लिरिक्स | Bhola Bhandari Aaya Mohan Teri Gali Mein Hari Har Milan Bhajan Lyrics

146 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🙏 भोला भंडारी आया – मोहन तेरी गली में

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(Bhola Bhandari Aaya – Mohan Teri Gali Mein) – हरि-हर मिलन भजन

🕉️ शंकर जी का ब्रज में आगमन – कान्हा के दर्शन की आतुरता

📝 भजन विवरण

🏷️ श्रेणी: शिव-कृष्ण भजन / हरि-हर मिलन / लोकगीत
🎶 भाव: आस्था, प्रार्थना, उल्लास, एकता
📍 विशेषता: भगवान शिव (भोला भंडारी) का कृष्ण (मोहन) के दर्शन के लिए ब्रज आगमन
📀 प्रचलन: हरि-हर भक्ति में प्रिय, विशेषकर ब्रज क्षेत्र और शिवरात्रि पर

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

है खुशियों की भरमार,
ब्रज की गलियों में।
नाचे-गाए हर इंसान,
ब्रज की गलियों में।
आए शंकर जी भगवान,
ब्रज की गलियों में।
करने कान्हा का दीदार,
ब्रज की गलियों में॥

भोला भंडारी आया,
मोहन तेरी गली में।
मोहन तेरी गली में,
कान्हा तेरी गली में।
इक झलक पाने आया हूँ मैं भी,
इक झलक पाने आया,
मोहन तेरी गली में॥

भोला भंडारी आया,
मोहन तेरी गली में॥

दीदार हो तो जानूँ,
स्वीकार हो तो मानूँ।
विश्वास मुझको लाया है मोहन,
विश्वास मुझको लाया,
मोहन तेरी गली में॥

भोला भंडारी आया,
मोहन तेरी गली में।
मोहन तेरी गली में,
कान्हा तेरी गली में॥

मेरे वंशी वाले श्याम,
मेरे वंशी वाले श्याम।
मेरे वंशी वाले श्याम,
मेरे वंशी वाले श्याम॥

हमने सुना है मोहन,
तुम तो दयानिधि हो।
आशा में लेकर आया हूँ, कृष्णा,
आशा में लेकर आया,
मोहन तेरी गली में॥

भोला भंडारी आया,
मोहन तेरी गली में।
मोहन तेरी गली में,
कान्हा तेरी गली में॥

मैया मुझे दिखा दे,
लाला की एक झलकी।
दर्शन मैं करके जाऊँ, मैया,
दर्शन मैं करके जाऊँ,
मैया तेरी गली में॥

भोला भंडारी आया,
मोहन तेरी गली में।
मोहन तेरी गली में,
कान्हा तेरी गली में॥

मेरे वंशी वाले श्याम,
मेरे वंशी वाले श्याम।
मेरे वंशी वाले श्याम,
मेरे वंशी वाले श्याम॥

मुझको अगर मिली न,
भिक्षा तेरे दर्शन की।
दिल को न चैन आया है, मोहन,
दिल को न चैन आया,
मोहन तेरी गली में॥

भोला भंडारी आया,
मोहन तेरी गली में।
मोहन तेरी गली में,
कान्हा तेरी गली में॥

मेरे वंशी वाले श्याम,
मेरे वंशी वाले श्याम।
मेरे वंशी वाले श्याम,
मेरे वंशी वाले श्याम॥

🎵 रचनाकार : लोक परम्परा / हरि-हर मिलन भजन

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह अद्भुत हरि-हर मिलन भजन भगवान शिव (भोला भंडारी) के ब्रज की गलियों में कृष्ण (मोहन) के दर्शन के लिए आगमन का वर्णन करता है। “भोला भंडारी आया, मोहन तेरी गली में” – शिव स्वयं मोहन की गली में आए हैं। “इक झलक पाने आया हूँ मैं भी” – भक्त भी शिव के साथ खड़ा होकर कहता है कि मैं भी कृष्ण की एक झलक पाने आया हूँ।

प्रस्तावना में – ब्रज की गलियों में खुशियों की भरमार है, हर इंसान नाच-गा रहा है क्योंकि शंकर जी कान्हा के दर्शन करने आए हैं।

पहले अंतरे में – “दीदार हो तो जानूँ, स्वीकार हो तो मानूँ” – भक्त कहता है कि अगर दर्शन होंगे तो मैं जानूंगा, अगर स्वीकार होगा तो मानूंगा। विश्वास ही उसे मोहन की गली में लाया है।

“मेरे वंशी वाले श्याम” – यह जप बार-बार आता है, जो कृष्ण के बाँसुरी वाले रूप का स्मरण है।

दूसरे अंतरे में – भक्त कहता है कि मोहन दयानिधि (दया के भंडार) हैं, इसलिए आशा लेकर आया हूँ। तीसरे अंतरे में – मैया (यशोदा) से लाला (बाल कृष्ण) की एक झलक दिखाने की प्रार्थना।

अंतिम अंतरे में – “मुझको अगर मिली न भिक्षा तेरे दर्शन की, दिल को न चैन आया है” – यदि दर्शन की भिक्षा नहीं मिली तो दिल को चैन नहीं आएगा।

यह भजन शिव और कृष्ण के अद्भुत मिलन और भक्त की उस मिलन को देखने की आतुरता का सजीव चित्रण है। यह बताता है कि देवता भी कृष्ण के दर्शन को तरसते हैं।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

हरि-हर मिलन का भाव: यह भजन हिंदू धर्म के दो सर्वोच्च देवताओं – विष्णु (कृष्ण) और शिव के मिलन का उत्सव है। शिव को कृष्ण का परम भक्त भी माना जाता है।

ब्रज की गलियाँ: बार-बार “ब्रज की गलियों में” और “मोहन तेरी गली में” का उल्लेख ब्रजभूमि की पवित्रता और वहाँ की रस-लीलाओं को दर्शाता है।

दयानिधि मोहन: कृष्ण को दयानिधि कहकर भक्त उनसे दया की भीख माँगता है – दर्शन की भिक्षा।

💖 हरि-हर एकता का प्रतीक

🎯 संदेश

शिव और कृष्ण में कोई भेद नहीं – दोनों एक ही परम सत्ता के स्वरूप हैं। शिव स्वयं कृष्ण के दर्शन को आते हैं, और भक्त को भी उसी आतुरता से कृष्ण को पुकारना चाहिए।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन हरि-हर भक्ति के अद्भुत समन्वय को दर्शाता है। यह भक्तों को याद दिलाता है कि सच्ची भक्ति में कोई द्वैत नहीं – शिव और कृष्ण एक हैं।

🙏 ॐ नमः शिवाय ।। हरे कृष्णा ।। भोला भंडारी आया मोहन तेरी गली में ।।

॥ इति हरि-हर मिलन भजनम् ॥
॥ भोला भंडारी आया, मोहन तेरी गली में – इक झलक पाने आया हूँ मैं भी ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "भोला भंडारी आया, मोहन तेरी गली में (हरि-हर मिलन) भजन लिरिक्स | Bhola Bhandari Aaya Mohan Teri Gali Mein Hari Har Milan Bhajan Lyrics" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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