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Bholenath Bhajan

Dekho Nandi Pe Hoke Sawaar Lyrics | देखो नंदी पे होके सवार - बम भोला शिव भजन

215 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🙏 देखो नंदी पे होके सवार – चला है मेरा बम भोला

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें।

(Dekho Nandi Pe Hoke Sawaar, Chala Hai Mera Bam Bhola) – Shiv Bhajan 2026

भोले के दर्शन की आस ॥

📝 भजन विवरण

🎤 गायक/लेखक: पारंपरिक / जगदेव एवं सुनीता (युगल गायन)
🏷️ श्रेणी: शिव भजन / बम भोला भजन
📍 भाव: भक्ति, श्रद्धा, शिव के दर्शन की व्याकुलता

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

देखो नंदी पे होके सवार,
चला है मेरा बम भोला।
देखो नंदी पे होके सवार,
चला है मेरा बम भोला।।

॥ अंतरा १ ॥

नाग काला हो नाग काला,
नाग काला गले में लिये धार,
चला है मेरा बम भोला।
देखो नंदी पे होके सवार,
चला है मेरा बम भोला।।

॥ अंतरा २ ॥

हाथों में त्रिशूल, ओढ़े मृगछाला जी,
माथे पे चंदा है बड़ा ही निराला जी।
और जटाओं में, और जटाओं में,
और जटाओं में गंगा की धार,
चला है मेरा बम भोला।
देखो नंदी पे होके सवार,
चला है मेरा बम भोला।।

॥ अंतरा ३ ॥

धूणा मसानों में भोले का लगे जी,
भोले के संग टोला भूतों का सजे जी।
गोला भांग का, ओ गोला भांग का,
गोला भांग का चढ़ाके दो-दो चार,
चला है मेरा बम भोला।
देखो नंदी पे होके सवार,
चला है मेरा बम भोला।।

॥ अंतरा ४ ॥

भक्तों पे कृपा करें हैं भोले नाथ जी,
करे सुनीता तुझपे है विश्वास जी।
कहे जगदेव, ओ कहे जगदेव,
कहे जगदेव सुन लो पुकार,
चला है मेरा बम भोला।
देखो नंदी पे होके सवार,
चला है मेरा बम भोला।।

देखो नंदी पे होके सवार,
चला है मेरा बम भोला।।

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन भोले शंकर के दिव्य स्वरूप का वर्णन करता है। "देखो नंदी पे होके सवार, चला है मेरा बम भोला" – भक्त अपने आराध्य भगवान शिव को नंदी पर सवार होकर आते हुए देख रहा है। यह दृश्य भक्त के हृदय में अपार श्रद्धा और उल्लास भर देता है।

पहले अंतरे में, शिव के गले में काले नाग की माला का वर्णन है – जो उनके संहारक और रक्षक दोनों स्वरूपों का प्रतीक है। दूसरे अंतरे में उनके त्रिशूल, मृगछाला, माथे पर चंद्रमा और जटाओं में गंगा की धार का चित्रण है – यह सब शिव के सौम्य एवं भयंकर दोनों रूपों को एक साथ दर्शाता है।

तीसरे अंतरे में शिव के भूत-प्रेतों के साथ मसानों में निवास का वर्णन है, जहाँ उनकी उपासना में धूणा जलता है और भांग-गोला चढ़ता है। अंत में, भक्त जगदेव और सुनीता के माध्यम से भोले से पुकार की गई है कि वे भक्तों पर कृपा बनाए रखें।

यह भजन सिखाता है कि भोले शंकर सरलता से प्रसन्न होने वाले हैं – बस सच्चे मन से पुकारने की देर है। वे अपने भक्तों की हर पुकार सुनते हैं और उन पर कृपा की वर्षा करते हैं।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

नंदी पर सवार भोला: नंदी शिव के वाहन हैं और भक्ति के प्रतीक हैं। नंदी पर सवार शिव का यह रूप भक्तों को दर्शाता है कि वे सदैव अपने भक्तों की रक्षा के लिए तत्पर हैं।

शिव के आभूषण: गले में नाग, माथे पर चंद्रमा, जटाओं में गंगा – यह सब शिव के वैराग्य और ब्रह्मांडीय स्वरूप के प्रतीक हैं। वे सरलता में भी सबसे विलक्षण हैं।

भूत-प्रेतों का साथ: शिव को भूतों का नाथ कहा जाता है। यह इस बात का प्रतीक है कि वे सभी प्राणियों के रक्षक हैं – चाहे वे किसी भी योनि में हों।

भांग और धूणा: शिव की उपासना में भांग, धतूरा और धूणा का विशेष महत्व है। यह भक्ति की सरलता और आत्मसमर्पण को दर्शाता है, जहाँ बाहरी आडंबरों की नहीं, बस सच्चे मन की जरूरत होती है।

💖 भोले की भक्ति का महासागर

🎯 संदेश

भगवान शिव को भोला कहा जाता है क्योंकि वे सरलता से प्रसन्न हो जाते हैं। इस भजन का संदेश है कि सच्चे मन से पुकारने पर भोले अपने भक्तों की हर पुकार सुनते हैं और उनका जीवन सफल बनाते हैं।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन उन सभी भक्तों के लिए प्रेरणा है जो जीवन की कठिनाइयों में घिरे हैं। नंदी पर सवार भोले का यह रूप आशा और विश्वास का प्रतीक है कि वे हर संकट में अपने भक्तों के साथ खड़े हैं।

🙏 ॐ नमः शिवाय ।। हर हर महादेव !!

॥ भोले की कृपा से सब सुख हो प्राप्त ॥
॥ हर हर भोले, नमः शिवाय ।।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

देवादिदेव महादेव को समर्पित यह भजन "Dekho Nandi Pe Hoke Sawaar Lyrics | देखो नंदी पे होके सवार - बम भोला शिव भजन" भगवान शिव के कल्याणकारी और वैराग्यपूर्ण रूप का सजीव चित्रण करता है। शिव का अर्थ ही कल्याण है। इस भजन के शब्दों के माध्यम से साधक शिव की अनंत चेतना, भस्म आरती, डमरू की ध्वनि और ध्यानमग्न मुद्रा का ध्यान करता है।

शिव भक्ति का मूल सिद्धांत यही है कि जगत की प्रत्येक नश्वर वस्तु का अंत शिव में ही होना है। यह भजन भक्त को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा देता है। शिव का नाम पंचमहाभूतों को नियंत्रित करने वाली परम शक्ति का प्रतीक है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव अत्यंत भोले हैं और साधारण जल तथा बेलपत्र अर्पण करने मात्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। इस शिव भजन का संकीर्तन करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और कुंडली के ग्रहों के दोष शांत होते हैं।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। नियमित शिव भजन और पंचाक्षरी मंत्र (ॐ नमः शिवाय) के जप से तनाव का नाश होता है, अवसाद दूर होता है और अंतर्मन में अपूर्व शांति का उदय होता है। यह आरोग्य और दीर्घायु प्रदान करने में भी सहायक है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

शिव संकीर्तन के लिए प्रदोष काल (संध्या समय) अथवा सोमवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता है। उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशासन पर बैठकर शिवजी का ध्यान करते हुए भजन गाएं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करने की सरल विधि क्या है?

शुद्ध जल, बेलपत्र, धतूरा अर्पित करते हुए श्रद्धापूर्वक शिव मंत्र अथवा भजनों का संकीर्तन करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

शिव भजनों के लिए कौन सा दिन विशेष है?

सोमवार, प्रदोष व्रत की तिथि और महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की उपासना और भजन संकीर्तन के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

क्या शिव जी की उपासना से कुंडली के दोष दूर होते हैं?

हाँ, भगवान शिव (महाकाल) की आराधना से कालसर्प दोष, राहु-केतु दोष और शनि जनित कष्टों का निवारण होता है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 01 Sep 2026

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