bholenath bhajan lyrics सोमवार विशेष (महादेव शिव व चंद्र देव)

गोरां नी तेरा बुड्ढा लाड़ा लिरिक्स - Bholenath Bhajan

प्रसिद्ध शिव भजन 'गोरां नी तेरा बुड्ढा लाड़ा' के संपूर्ण लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की सुंदर महिमा का आनंद लें।

प्रस्तावना एवं परिचय

शिव की महिमा: बुड्ढा लाड़ा भजन

भगवान शिव की महिमा का गान करें और भक्ति की गहराइयों में प्रवेश करें।

गोरां नी तेरा बुड्ढा लाड़ा लिरिक्स कोई आखे डमरू वाला कोई आखे सप्पा वालाकोई आखे एह रगड़े लोंदा पीवे भंग दा प्यालाबुड्ढा लाड़ा गौरां नी तेरा बुड्ढा लाड़ा बम बम बम बम बैल ते चढ़ के आ गया नी तेरा बुड्ढा लाड़ाओहदा गज गज लमके दाड़ा नी तेरा बुड्ढा लाड़ाबैल ते चढ़ के आ गया नी तेरा......जंज वेख़ के भाजड़ पै गई , दुनिया हक्की बक्की रह गईबम बम बम बम बोल के भोला, बूहे अगे आ गया नी तेरा बुड्ढा लाड़ाबैल ते चढ़ के आ गया नी तेरा......भूत चड़ेलां नचदे गौंदे, शुक्र शनिचर भड़थू पोंदेदो बच्चियां दा टोला गौरां, राशन सारा मुका गया नी तेरा बुड्ढा लाड़ाबैल ते चढ़ के आ गया नी तेरा.........शिव शंकर दी लीला न्यारी, तीन लोक दा मालक भंडारीशिव गौरां दे विआह दी महिमा , कम्मा – शैली गा गया नी तेरा बुड्ढा लाड़ाबैल ते चढ़ के आ गया नी तेरा बुड्ढा लाड़ा......
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भगवान शिव, जिन्हें बुढ़ा लाड़ा के नाम से संबोधित किया गया है, की भव्यता और भक्ति की गहराई का वर्णन किया गया है। शुरुआती पंक्तियों में भक्त भगवान के प्रति अपनी भक्ति और श्रद्धा प्रकट करते हैं। 'कोई आखे डमरू वाला' और 'भंग दा प्याल' जैसे शब्द विभिन्न प्रकार के भक्ति भावनाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह भाव व्यक्त करता है कि भगवान शिव केवल एक deity नहीं हैं, बल्कि वे भक्तों के लिए एक सजीव और सच्चे दोस्त हैं। उनके अवतार से भक्तों के जीवन में आनंद और उल्लास आता है। भजन के मुख्य भाव में शिव की महिमा, उनकी लीला और भक्तों के प्रति उनकी आसक्ति का विस्तार से वर्णन है। उनके आने की प्रतीक्षा में भक्त अपनापन और श्रद्धा के साथ बम बम शिव का जाप करते हैं, जो शिव की शक्ति और कार्य के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

इस भजन में भक्ति का एक अद्भुत रंग है। इसमें भूत-चडेलां, नाचते हुए और खुशियाँ मनाते हुए दिखाए गए हैं, जो भगवान शिव की कृपा से जीवन में आई उत्तेजना और ऊर्जा को दर्शाते हैं। भक्तों के मन में जोश और उमंग भरे शब्द हैं जैसे 'बैल ते चढ़ के आ गया', ये सब संकेत देते हैं कि भगवान शिव न सिर्फ तात्कालिक भावनाओं को साकार करते हैं, बल्कि उनके साथ हर भक्ति की लहर को जोड़ देते हैं। यह भजन भक्तों को याद दिलाता है कि शिव की कृपा से सभी बाधाएँ समाप्त हो जाती हैं और यह भजन उनकी शक्ति और भक्ति का नारा बन जाता है। विशेषकर 'गौरां दी महिमा' पंक्ति यह दर्शाती है कि शिव और पार्वती का विवाह एवं शिव का भौतिक स्वरूप भक्तों की आस्था को संजीवनी प्रदान करता है।

भक्ति मार्ग में इस भजन का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें संपूर्णता का भाव है, जो कि भगवान शिव की अद्वितीयता को दर्शाता है। शिव, जो की त्रिलोक, यानी स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल के स्वामी हैं, की यह लीला भक्तों को यह सिखाती है कि अपार प्रेम और भक्ति से कैसे जीवन का मार्गदर्शन किया जाए। भजन में किए गए जप से मन की शुद्धता होती है और यह भक्तों को मानसिक स्थिरता की ओर ले जाता है। यहां

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

गोरां नी तेरा बुड्ढा लाड़ा भजन शिव पुराण में वर्णित शिव की लीलाओं का संक्षिप्त लेकिन सशक्त रूप है। भगवान शिव का गहन महत्त्व इस भजन में दर्शुम करता है कि वे केवल तात्कालिक समस्या समाधानकर्ता नही हैं, बल्कि भक्ति के मार्ग पर चलने वाला हर भक्त उनके प्रति और अधिक निष्ठावान बन सकता है। शिव की महिमा में बहे पृथ्वी, आकाश और स्थान के सभी तत्वों का समावेश होता है। यही नहीं, यह भजन भक्तों को उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रोत्साहित करता है। शास्त्रों में कहा गया है कि शिव की उपासना से भक्ति मार्ग की साधना सम्पन्न होती है, जिससे भक्त का जीवन सुगम एवं सफल बनता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का श्रवण एवं इसके स्वर का उच्चारण विभिन्न मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक लाभ हेतु अत्यंत beneficial होता है। मानसिक संतुलन को बनाए रखने और नकारात्मक विचारों से मुक्ति पाने में यह भजन सहायक है। यह भक्ति के गीत के रूप में तनाव कम करने और आध्यात्मिक उन्नति को प्राप्त करने का माध्यम बनता है। नियमित रूप से इसे गाने से आत्मा में शांति एवं संतोष का अनुभव होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

गोरां नी तेरा बुड्ढा लाड़ा भजन का जप सुबह जल्दी करना उत्तम होता है। इस दौरान यदि एक दीपक जलाया जाए और भगवान शिव को पुष्प अर्पित किए जाएं, तो भक्ति की अनुभूति अधिक होती है। भक्त को सच्चे भाव से एकाग्र होकर इस भजन का उच्चारण करना चाहिए तथा ध्यान की मुद्रा में बैठना चाहिए जिससे कि आत्मा में शांति का अनुभव हो।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गोरां नी तेरा बुड्ढा लाड़ा भजन का क्या महत्व है?

यह भजन भगवान शिव की महिमा का गुणगान करता है और भक्ति की गहराइयों को प्रकट करता है, जिससे कि जीवन में सकारात्मकता आ सके।

इस भजन का उच्चारण कब करना चाहिए?

सुबह का समय भजन के लिए उत्तम होता है। एक साधारण पूजा और ध्यान के साथ इसका जप करने से आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं।

भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए इस भजन का पाठ कितना प्रभावी है?

भगवान शिव की कृपा पाने के लिए यह भजन अत्यंत प्रभावी है, क्योंकि यह शिव की शक्ति और भक्ति का प्रतीक है, जो भक्तों को कठिनाइयों से निकालने में मदद करता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 19 Oct 2026

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