Parvati Stotram

हार के तेरे दरबार बैठा हू (HAAR KE TERE DARBAAR BAITHA HU) - RAJNI RAJASTHANI SHYAM BHAJAN - Bhaktilok

56 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

"हार के तेरे दरबार बैठा हूँ" - रजनी राजस्थानी द्वारा स्वरबद्ध यह हृदयस्पर्शी श्याम भजन, भक्त और भगवान के बीच के उस अटूट संबंध को दर्शाता है जहाँ भक्त अपनी समस्त सांसारिक पराजयों को स्वीकार कर अंततः अपने आराध्य की शरण में पहुँच जाता है। यह भजन केवल एक गीत नहीं, बल्कि एक साधक की पुकार है जो यह स्वीकार करता है कि संसार में सब कुछ हारने के बाद ही प्रभु के चरणों में वास्तविक विजय प्राप्त होती है। खाटू श्याम जी के प्रति समर्पित यह भजन उन सभी भक्तों के लिए एक संबल है जो जीवन की कठिन परिस्थितियों में स्वयं को अकेला और असहाय महसूस करते हैं।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

हार के तेरे दरबार बैठा हूँ,
बाबा अब तो संभाल ले मुझे।
दुनिया से मैं हार कर आया हूँ,
श्याम अब तो अपना ले मुझे॥

जब-जब भी मैं डगमगाया हूँ,
तूने ही मुझे संभाला है।
इस भंवर में फंसी मेरी नैया,
तूने ही तो किनारा दिखाया है॥
हार के तेरे दरबार बैठा हूँ...

मेरे पास अब कुछ भी नहीं बचा,
बस तेरी यादों का सहारा है।
तू ही मेरी मंजिल, तू ही मेरा रास्ता,
तू ही मेरा सहारा है॥
हार के तेरे दरबार बैठा हूँ...

मेरी गलतियों को तू माफ कर देना,
मैं तो तेरा ही दास हूँ।
अपनी शरण में मुझे रख लेना,
मैं तो तेरा ही विश्वास हूँ॥
हार के तेरे दरबार बैठा हूँ, बाबा अब तो संभाल ले मुझे॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ 'शरणागति' है। भक्त कहता है कि हे प्रभु, मैंने संसार के मोह-माया और संघर्षों में बहुत प्रयास किया, परंतु अंततः मैं हार गया हूँ। यह हार सांसारिक नहीं, बल्कि अहंकार की हार है। जब मनुष्य का अहंकार गल जाता है, तभी वह प्रभु के दरबार में बैठने योग्य होता है। भजन की पंक्तियाँ यह संदेश देती हैं कि प्रभु श्री श्याम अपने भक्तों की पुकार सुनने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। "अब तो संभाल ले मुझे" - यह पंक्ति भक्त की पूर्ण निर्भरता को दर्शाती है। यह भजन सिखाता है कि जीवन में जब कोई रास्ता न दिखे, तो प्रभु के चरणों में समर्पण ही एकमात्र समाधान है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • भक्ति का प्रकार: यह भजन 'दैन्य भाव' और 'शरणागति' की श्रेणी में आता है।
  • आराध्य: यह भजन कलयुग के अवतारी श्री खाटू श्याम जी (बर्बरीक) को समर्पित है।
  • सांत्वना: यह भजन मानसिक तनाव और अवसाद से जूझ रहे भक्तों को शांति प्रदान करता है।
  • सांस्कृतिक प्रभाव: राजस्थानी लोक शैली में होने के कारण यह भजन ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अत्यंत लोकप्रिय है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को एकांत में, संध्या के समय या खाटू श्याम जी के मंदिर में कीर्तन के दौरान गाना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसे गाते समय मन में पूर्ण विश्वास और आंखों में प्रभु के प्रति प्रेम के आंसू होने चाहिए। इसे आप अपने दैनिक पूजा के अंत में भी गा सकते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
दरबार प्रभु का स्थान/मंदिर जहाँ भक्त अपनी अर्जी लगाता है
शरणागति पूर्ण समर्पण स्वयं को प्रभु को सौंप देना
भंवर संसार रूपी चक्र जीवन की कठिनाइयाँ
दास सेवक ईश्वर के प्रति विनम्रता

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम हार के तेरे दरबार बैठा हूँ
गायिका रजनी राजस्थानी
आराध्य श्री खाटू श्याम जी
भाषा हिंदी/राजस्थानी मिश्रित
भाव शरणागति एवं विनय

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. प्रश्न: यह भजन किस देवता को समर्पित है?
    उत्तर: यह भजन श्री खाटू श्याम जी को समर्पित है।
  2. प्रश्न: क्या इस भजन को घर पर गाया जा सकता है?
    उत्तर: हाँ, इसे घर पर पूरी श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।
  3. प्रश्न: 'हार के तेरे दरबार' का क्या अर्थ है?
    उत्तर: इसका अर्थ है कि संसार के सभी प्रयासों से थककर अब मैं केवल आपकी शरण में आया हूँ।
  4. प्रश्न: रजनी राजस्थानी कौन हैं?
    उत्तर: ये एक प्रसिद्ध भजन गायिका हैं जो अपने मधुर श्याम भजनों के लिए जानी जाती हैं।
  5. प्रश्न: क्या यह भजन कीर्तन में गाया जा सकता है?
    उत्तर: हाँ, यह कीर्तन और जागरण के लिए अत्यंत उपयुक्त भजन है।
  6. प्रश्न: इस भजन से क्या लाभ मिलता है?
    उत्तर: इससे मन को शांति मिलती है और प्रभु के प्रति विश्वास बढ़ता है।
  7. प्रश्न: क्या इसे किसी विशेष तिथि पर गाना चाहिए?
    उत्तर: इसे किसी भी दिन गाया जा सकता है, विशेषकर एकादशी के दिन।
  8. प्रश्न: क्या यह भजन मानसिक शांति देता है?
    उत्तर: हाँ, यह भजन मन के विकारों को दूर कर शांति प्रदान करता है।

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। स्रोत एवं संदर्भ: पारंपरिक श्याम भजन संग्रह एवं भक्ति साहित्य।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!