सनातन धर्म की समृद्ध संकीर्तन परंपरा में बाबा खाटू श्याम जी की महिमा अनुपम है। कलयुग के साक्षात अवतारी भगवान श्री खाटू श्याम जी को समर्पित भजन "बाबा अब तो बुला लो ना द्वार" (Baba Ab To Bula Na Dwar) भक्तों के हृदय में विरह और अनन्य शरणागति का भाव जाग्रत करता है। सुप्रसिद्ध भजन गायक अंकित शर्मा द्वारा अत्यंत मधुर और भावपूर्ण स्वर में गाए गए इस भजन में एक व्याकुल जीवात्मा की अपने आराध्य से मिलने की तड़प को दर्शाया गया है। जब संसार के सारे सहारे टूट जाते हैं, तब भक्त हारकर उस 'हारे के सहारे' के द्वार पर अपनी अर्जी लगाता है। यह भजन केवल एक गीत नहीं, बल्कि एक साधक की अंतरात्मा की पुकार है जो सीधे श्याम प्रभु के चरणों तक पहुँचती है। इस लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और इसके पीछे छिपे दार्शनिक संदेशों का गहन विश्लेषण करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
॥ बाबा अब तो बुला लो ना द्वार ॥
(स्थायी / मुखड़ा)
बाबा अब तो बुला लो ना द्वार,
तरस रहे देखने को नैन हमारे।
बाबा अब तो बुला लो ना द्वार,
तरस रहे देखने को नैन हमारे।
हारे का सहारा बाबा श्याम तू हमारा,
आजा आजा ओ लीले के सवार,
तरस रहे देखने को नैन हमारे।
बाबा अब तो बुला लो ना द्वार...
(अंतरा - १)
सुना है मैंने तूने लाखों को तारा,
जो भी गया तेरे दर पे मिला उसे सहारा।
मेरी भी नैया पार लगा दो ना सरकार,
तरस रहे देखने को नैन हमारे।
बाबा अब तो बुला लो ना द्वार...
(अंतरा - २)
दुनिया ने ठुकराया मैं तो आया तेरे द्वार,
अब तो दया की दृष्टि कर दो लखदातार।
तेरे बिना मेरा कोई न संसार,
तरस रहे देखने को नैन हमारे।
बाबा अब तो बुला लो ना द्वार...
(अंतरा - ३)
अंकित की पुकार सुन लो ओ शीश के दानी,
चरणों में रख लो मुझे ओ कल्याणी।
कर दो कृपा अब तो ओ पालनहार,
तरस रहे देखने को नैन हमारे।
बाबा अब तो बुला लो ना द्वार,
तरस रहे देखने को नैन हमारे।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन भक्ति मार्ग के 'आरती' और 'विनय' भाव का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसमें भक्त अपने आराध्य बाबा श्याम से अत्यंत करुण स्वर में प्रार्थना कर रहा है कि हे प्रभु, अब मुझे अपने पावन धाम खाटू में बुला लीजिए। मेरे नेत्र आपके दिव्य दर्शनों के लिए अत्यंत व्याकुल और लालायित हैं।
भजन के प्रथम भाग में भक्त भगवान को 'हारे का सहारा' और 'लीले का सवार' कहकर पुकारता है। महाभारत काल की कथा के अनुसार, जब बर्बरीक (खाटू श्याम जी) ने युद्ध में हारने वाले पक्ष का साथ देने का प्रण लिया था, तब भगवान श्री कृष्ण ने उनकी इस भावना और महान बलिदान से प्रसन्न होकर उन्हें कलयुग में अपने नाम 'श्याम' से पूजे जाने का वरदान दिया। भक्त इसी पौराणिक संदर्भ को स्मरण करते हुए कहता है कि जब मैं इस संसार से पूरी तरह हार चुका हूँ, तब केवल आप ही मेरे एकमात्र संबल हैं।
आगे के अंतराओं में भक्त अपनी दीनता और संसार की निष्ठुरता का वर्णन करता है। वह कहता है कि इस भौतिक संसार ने उसे ठुकरा दिया है और अब उसके पास बाबा श्याम के चरणों के अतिरिक्त कोई अन्य शरण स्थली नहीं बची है। वह प्रभु से अपनी जीवन रूपी नैया को भवसागर से पार लगाने की याचना करता है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
इस भजन की लोकप्रियता और इसका आध्यात्मिक प्रभाव असाधारण है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- अनन्य शरणागति (Complete Surrender): यह भजन भक्त को सिखाता है कि जब मनुष्य अपने अहंकार को त्यागकर पूर्ण रूप से ईश्वर के चरणों में समर्पित हो जाता है, तभी उसे वास्तविक शांति और ईश्वरीय कृपा प्राप्त होती है।
- विरह भक्ति का प्रकटीकरण: वैष्णव संप्रदाय में विरह भक्ति को सर्वोच्च माना गया है। भगवान से दूर रहने की व्याकुलता ही आत्मा को परमात्मा के निकट लाती है। यह भजन इसी विरह भाव को जागृत करता है।
- कलयुग में नाम संकीर्तन की महिमा: शास्त्रों में वर्णित है कि कलयुग में केवल नाम स्मरण और कीर्तन से ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है। यह भजन अत्यंत सरल शब्दों में प्रभु नाम की महिमा का गान करता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
यद्यपि ईश्वर की आराधना के लिए प्रत्येक क्षण शुभ है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर अत्यंत फलदायी माने गए हैं:
- एकादशी तिथि (Gyaras): खाटू श्याम जी की पूजा में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन श्याम भक्त निर्जला या फलाहार व्रत रखते हैं और रात्रि जागरण में इस भजन का गायन करते हैं।
- संध्या आरती के समय: प्रतिदिन संध्याकाल में घर के मंदिर या देवालय में धूप-दीप प्रज्वलित कर शांत मन से इस भजन को सुनने या गाने से मानसिक तनाव दूर होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- फाल्गुन मेला उत्सव: राजस्थान के खाटू धाम में आयोजित होने वाले वार्षिक फाल्गुन मेले के दौरान इस भजन का सामूहिक संकीर्तन भक्तों को भाव-विभोर कर देता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन साक्षात भगवान श्री कृष्ण के कलयुगी अवतार बाबा खाटू श्याम जी को समर्पित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक ही कलयुग में खाटू श्याम के रूप में पूजे जाते हैं। उन्होंने धर्म की स्थापना के लिए महाभारत युद्ध के समय अपना शीश दान कर दिया था। भगवान श्री कृष्ण ने उनके इस परम त्याग से अभिभूत होकर उन्हें अपनी शक्तियां और अपना नाम 'श्याम' प्रदान किया।
इस भजन को आधुनिक युग में अपनी मधुर आवाज से जन-जन तक पहुँचाने का श्रेय युवा भजन गायक अंकित शर्मा को जाता है। उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति ने इस भजन को देश-विदेश में बसे श्याम भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय बना दिया है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
यह भजन आधुनिक श्याम संकीर्तन परंपरा की एक अमूल्य धरोहर है। राजस्थान की पावन भूमि से शुरू हुई श्याम भक्ति की लहर आज संपूर्ण विश्व में फैल चुकी है। इस भजन की रचना सरल लोकभाषा और खड़ी बोली के मिश्रण से की गई है ताकि साधारण से साधारण भक्त भी इसके भावों को आसानी से समझ सके और प्रभु भक्ति में लीन हो सके। भजन की पृष्ठभूमि भक्तों के उस व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है जहाँ वे सांसारिक दुखों से त्रस्त होकर खाटू धाम की शरण में जाते हैं और वहाँ उन्हें असीम शांति की अनुभूति होती है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और प्रवाहमयी हिंदी है, जिसमें राजस्थानी और ब्रजभाषा के शब्दों का सुंदर पुट देखने को मिलता है। काव्य शैली की दृष्टि से यह एक 'गीतिका' या 'पद' है, जिसे सुगम संगीत के रागों में पिरोया गया है।
भजन में प्रयुक्त रूपक और उपमाएं अत्यंत सजीव हैं। जैसे 'जीवन को नैया' कहना और भगवान को 'खेवनहार' या 'सरकार' के रूप में संबोधित करना भक्त और भगवान के बीच के आत्मीय संबंध को दर्शाता है। इसमें करुण रस और भक्ति रस का अद्भुत समन्वय है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें केवल भक्ति करना ही नहीं सिखाता, बल्कि व्यावहारिक जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण संदेश भी देता है:
- धैर्य और विश्वास: जीवन में चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न आएं, हमें ईश्वर पर अपना विश्वास नहीं खोना चाहिए। 'हारे का सहारा' सदैव हमारे साथ है।
- अहंकार का त्याग: जब भक्त कहता है कि 'दुनिया ने ठुकराया', तो यह इस बात का प्रतीक है कि सांसारिक संबंध नश्वर और स्वार्थ पर आधारित हैं। केवल ईश्वर का प्रेम ही निस्वार्थ और शाश्वत है।
- परमार्थ की भावना: बाबा श्याम की तरह ही हमें भी अपने जीवन में परोपकार और त्याग की भावना को अपनाना चाहिए।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक संदर्भ |
|---|---|---|
| लीले के सवार | नीले रंग के घोड़े पर सवारी करने वाले | बाबा श्याम के प्रिय नीले घोड़े का प्रतीक, जो उनकी दिव्य शक्ति को दर्शाता है। |
| हारे का सहारा | निराश और पराजित लोगों को संबल देने वाले | भगवान कृष्ण द्वारा बर्बरीक को दिया गया वरदान कि वे कलयुग में असहायों के रक्षक बनेंगे। |
| लखदातार | लाखों को देने वाले, परम दानी | बाबा श्याम की असीम उदारता, जो अपने भक्तों की झोली खुशियों से भर देते हैं। |
| शीश के दानी | अपने मस्तक का दान करने वाले | महाभारत काल में धर्म की रक्षा हेतु बर्बरीक द्वारा किए गए शीश दान का ऐतिहासिक संदर्भ। |
| नैया पार लगाना | भवसागर से पार उतारना | संसार रूपी सागर से जीवात्मा को मोक्ष की ओर ले जाना। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"बाबा अब तो बुला लो ना द्वार, तरस रहे देखने को नैन हमारे।"
हे बाबा श्याम! अब मेरी व्याकुलता अपनी चरम सीमा पर है। कृपया मुझे अपने पावन धाम बुला लीजिए। मेरे नेत्र आपके श्रीविग्रह के दर्शन पाने के लिए अत्यंत तरस रहे हैं।
"हारे का सहारा बाबा श्याम तू हमारा, आजा आजा ओ लीले के सवार..."
हे नीले घोड़े पर सवार होकर आने वाले प्रभु! जब संपूर्ण संसार ने मेरा साथ छोड़ दिया है, तब आप ही मेरे एकमात्र रक्षक हैं। हे दयालु देव, शीघ्र आकर मुझे दर्शन दीजिए।
"सुना है मैंने तूने लाखों को तारा, जो भी गया तेरे दर पे मिला उसे सहारा।"
मैंने संतों और भक्तों के मुख से सुना है कि आपने करोड़ों पतितों और दुखियों का उद्धार किया है। जो कोई भी सच्चे मन से आपकी शरण में आया, उसे कभी खाली हाथ नहीं लौटना पड़ा।
"दुनिया ने ठुकराया मैं तो आया तेरे द्वार, अब तो दया की दृष्टि कर दो लखदातार।"
इस स्वार्थी संसार ने मुझे ठुकरा दिया है और मेरे आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाई है। अब मैं सब कुछ छोड़कर आपके द्वार पर आ गया हूँ। हे परम दानी लखदातार! अब मुझ पर अपनी करुणामयी कृपा दृष्टि डालिए।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
श्याम साधना के समय इस भजन के साथ निम्नलिखित मंत्रों और श्लोकों का संपुट लगाने से साधना अत्यंत प्रभावशाली हो जाती है:
॥ श्री श्याम मंत्र ॥
"ॐ श्री श्याम देवाय नमः"
अर्थ: हम भगवान श्री श्याम देव को सादर नमन करते हैं और उनकी शरण ग्रहण करते हैं।
श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से जो परम गोपनीय वचन कहे थे, वही भाव इस भजन में भी परिलक्षित होता है:
"सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामी मा शुचः॥"
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विवरण क्षेत्र | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| भजन का नाम | बाबा अब तो बुला लो ना द्वार (Baba Ab To Bula Na Dwar) |
| समर्पित देवता | भगवान श्री खाटू श्याम जी (कलयुगावतार बर्बरीक) |
| मुख्य गायक | अंकित शर्मा (Ankit Sharma) |
| भजन का मुख्य भाव | विनय, करुणा, विरह और पूर्ण शरणागति (Bhakti & Surrender) |
| भाषा | सरल हिंदी (खड़ी बोली एवं राजस्थानी पुट) |
| उपयुक्त अवसर | एकादशी, द्वादशी, संध्या आरती, श्याम संकीर्तन, फाल्गुन मेला |
| मुख्य संदेश | संसार की नश्वरता और ईश्वर की शाश्वत शरण |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख भक्तिलोक के विद्वान संपादकों और सनातन धर्म के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार की गई एक संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इस आलेख को तैयार करने में पारंपरिक हिंदू ग्रंथों, महाभारत की कथाओं, स्कंद पुराण के कौमारिका खंड और खाटू धाम की प्रामाणिक संकीर्तन परंपराओं का संदर्भ लिया गया है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध, प्रामाणिक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध जानकारी पहुँचाना है ताकि वे अपनी भक्ति यात्रा को और अधिक सुदृढ़ बना सकें।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- स्कंद पुराण: कौमारिका खंड (बर्बरीक की कथा और शीश दान का प्रसंग)।
- महा
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