Sai Baba

मोह माया को त्याग कर | Moh Maya Ko Tyag kar ! New Sai Baba Bhajan ! Om Sai Ram ! Sai Bhakti Song - BhaktiLok

127 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:
नवीनतम भक्ति गीत एवं साईं भजन

मोह माया को त्याग कर | Moh Maya Ko Tyag kar ! New Sai Baba Bhajan ! Om Sai Ram ! Sai Bhakti Song

श्रेणी: Latest Bhakti Song | Sai Baba | Ram Bhajan

कलियुग में श्रद्धा और सबुरी के प्रतीक शिरडी के दाता भगवान श्री साईं बाबा की महिमा अपरंपार है। "मोह माया को त्याग कर" यह पावन साईं भजन आधुनिक मानव जीवन की सबसे बड़ी उलझन—अहंकार, तृष्णा और सांसारिक आसक्ति—पर सीधा प्रहार करता है। साईं बाबा के चरणों में शरण लेने का मार्ग ही वास्तविक मुक्ति का द्वार है। श्री साईं बाबा ने अपने संपूर्ण जीवनकाल में मानवमात्र को यही संदेश दिया कि यह भौतिक संसार एक क्षणभंगुर स्वप्न मात्र है, और जीव जब तक मोह-माया के बंधनों में जकड़ा रहता है, तब तक उसे आत्मिक शांति की प्राप्ति नहीं हो सकती। इस भजन की कर्णप्रिय धुन, मार्मिक शब्द और आध्यात्मिक स्वर लहरी श्रोता के मन को प्रपंचों से मुक्त कर भक्ति और वैराग्य के दिव्य लोक में ले जाती है। चाहे प्रातःकालीन ध्यान हो, संध्या वंदन हो अथवा साप्ताहिक गुरुवार का सत्संग, इस भजन का श्रवण और गायन साधक के अंतःकरण को पावन और ऊर्जावान बना देता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics


(स्थाई / मुखड़ा)

मोह माया को त्याग कर, तू साईं चरण चित्त ला लगा,
शिरडी वाले बाबा की तू, दिल से महिमा गा लगा!
ओम साईं राम, ओ साईं राम, सबका मालिक एक है नाम!

(अंतरा 1)

माया के इस मेले में तू, क्यों भूला अपनी पहचान?
झूठा है यह सारा जग, झूठी इसकी शान-शौकत आन!
दो दिन की है जिंदगी मुसाफिर, क्यों करता अभिमान?
साईं की चौखट पर आकर, पा ले तू वरदान!
ओम साईं राम, ओ साईं राम, सबका मालिक एक है नाम!

(अंतरा 2)

जो भी शिरडी आया बाबा, खाली हाथ न लौटा कभी,
उदी और चरणामृत से, मिटी जीवन की हर शबी!
श्रद्धा और सबुरी जिसके, मन में बस जाती सदा,
उसके जीवन की हर बाधा, पल में दूर भगाता खुदा!
ओम साईं राम, ओ साईं राम, सबका मालिक एक है नाम!

(अंतिम चरण / समापन)

दीन दुखियों के दाता तू ही, सबका है रखवाला,
तेरे दर पर जलता साईं, प्रेम का हरदम प्याला!
मोह माया को त्याग कर, साईं शरण में आ जा तू,
जन्म-मरण के बंधन से, अब तो मुक्ति पा जा तू!
ओम साईं राम, ओ साईं राम, सबका मालिक एक है नाम!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth


यह भजन मनुष्य को उसकी वास्तविक आध्यात्मिक स्थिति का बोध कराता है। संसार में रहते हुए व्यक्ति अक्सर धन, ऐश्वर्य, पद और पारिवारिक संबंधों की मोह-माया में इस प्रकार उलझ जाता है कि वह अपने मूल उद्देश्य—परमात्मा की प्राप्ति और आत्म-साक्षात्कार—को भूल बैठता है। भजन का मुखड़ा स्पष्ट रूप से आह्वान करता है कि सांसारिक प्रपंचों और भ्रमों को त्यागकर अपना मन केवल श्री साईं बाबा के पावन चरणों में लगाना चाहिए। शिरडी के सम्राट साईं बाबा का नाम ही इस कलियुग में नौका को भवसागर से पार लगाने वाला महामंत्र है।

प्रथम अंतरे में रचनाकार ने मानव को चेताया है कि यह संसार एक मेला है जहाँ सब कुछ नश्वर है। मनुष्य झूठी प्रतिष्ठा और धन के अहंकार में अपना अमूल्य जीवन व्यर्थ गंवा देता है। इसके विपरीत, साईं बाबा के दर पर आने वाले हर प्राणी को सच्चा मानसिक सुकून और आध्यात्मिक संपदा मिलती है। द्वितीय अंतरा शिरडी की पवित्र परंपरा—उदी (भभूत), चरणामृत और 'श्रद्धा व सबुरी' (विश्वास और धैर्य)—की महिमा का बखान करता है। जो भक्त बाबा के इन दो मूल मंत्रों को अपने जीवन में उतार लेता है, उसके समस्त कष्ट स्वतः समाप्त हो जाते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance


  • ✨ दिव्य प्रेरणा: यह भजन श्रोता को भौतिकतावाद से ऊपर उठकर आध्यात्मिकता की ओर मोड़ने का सशक्त माध्यम है।
  • ✨ साईं दर्शन का सार: शिरडी वाले बाबा के सार्वभौमिक संदेश 'सबका मालिक एक है' और 'श्रद्धा-सबुरी' को केंद्र में रखकर रचा गया है।
  • ✨ शांत एवं मधुर लय: भजन की धुन अत्यंत शांत और हृदयग्राही है, जिसे मानसिक तनाव के समय सुनकर तुरंत शांति मिलती है।
  • ✨ राम और साईं का समन्वय: भारतीय भक्ति परंपरा में साईं बाबा को राम, कृष्ण और शिव का ही स्वरूप माना गया है, जैसा कि इस शैली के राम भजन और साईं बाबा Ashtothram में भी देखा जाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing


इस भजन का गायन और श्रवण किसी भी पवित्र समय किया जा सकता है, परंतु विशेष अवसरों पर इसका प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है:

गुरुवार का विशेष दिन

साईं बाबा को समर्पित गुरुवार के दिन संध्या आरती के समय इस भजन का सामूहिक गान अत्यंत फलदायी माना जाता है।

प्रातःकालीन ध्यान (Morning Meditation)

ब्रह्ममुहूर्त में या सुबह उठकर स्नान के पश्चात इसे सुनने से पूरा दिन सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक स्थिरता बनी रहती है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings


शब्द / पद सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
मोह माया सांसारिक आसक्ति और भ्रम वह अवास्तविक आवरण जो आत्मा को परमात्मा से दूर रखता है।
श्रद्धा और सबुरी विश्वास और धैर्य साईं बाबा द्वारा बताए गए मुक्ति के दो सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ।
उदी पवित्र भभूत (राख) बाबा के आशीर्वाद का प्रतीक जो सभी रोगों और कष्टों को दूर करती है।
सबका मालिक एक ईश्वर की एकता संपूर्ण सृष्टि का संचालक केवल एक ही सर्वोच्च शक्ति है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint


यह भजन मुख्य रूप से शिरडी के संत शिरोमणि श्री साईं बाबा को समर्पित है। साईं बाबा ने अपने जीवनकाल में हिंदू, मुस्लिम और सभी धर्मों के भेदभाव को मिटाकर मानवता का संदेश दिया। उनके उपदेश अद्वैत वेदांत और सूफीवाद का सुंदर समन्वय हैं। जिस प्रकार तुलसीदास जी ने रामचरितमानस की चौपाइयों के माध्यम से मर्यादा पुरुषोत्तम राम का आदर्श प्रस्तुत किया, उसी प्रकार साईं बाबा ने अपने जीवन और चमत्कारों के माध्यम से भक्तों को प्रेम, सेवा और त्याग की राह दिखाई।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons


अहंकार का त्याग

धन, बल और पद का घमंड क्षणभंगुर है। सच्चे मार्ग पर चलने के लिए अहंकार का त्याग अनिवार्य है।

अटूट विश्वास (श्रद्धा)

जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर और गुरु के चरणों में अटूट विश्वास बनाए रखना चाहिए।

धैर्य (सबुरी)

प्रत्येक संकट के समय धैर्य रखना ही सच्चे भक्त की सबसे बड़ी पहचान है। समय आने पर बाबा सब ठीक करते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information


भजन का नाम मोह माया को त्याग कर (Moh Maya Ko Tyag kar Sai Bhajan)
समर्पित देवता श्री शिरडी साईं बाबा
संगीत शैली नवीनतम भक्ति गीत / साईं भजन (Latest Bhakti Song)
भाषा सरल हिंदी एवं ब्रज-अवधि मिश्रित बोल
मुख्य भाव वैराग्य, शरणागति, भक्ति और समर्पण
उपयुक्त अवसर गुरुवार व्रत, साईं संध्या, दैनिक पूजा एवं सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)


यह भजन शिरडी के महान संत एवं जगतपिता के रूप में पूजे जाने वाले श्री शिरडी साईं बाबा को समर्पित है।

इस भजन को प्रातः काल ध्यान के समय या प्रत्येक गुरुवार को साईं संध्या एवं पूजा के दौरान सुनना अत्यंत फलदायी और शांतिदायक होता है।

साईं बाबा ने मुख्य रूप से 'श्रद्धा' (विश्वास) और 'सबुरी' (धैर्य) का संदेश दिया है तथा "सबका मालिक एक है" के सिद्धांत के जरिए धार्मिक एकता का पाठ पढ़ाया है।

यह भजन सिखाता है कि हमें सांसारिक ऐश्वर्य और अहंकार के पीछे भागने के बजाय ईश्वर की भक्ति और मानव सेवा में अपना जीवन समर्पित करना चाहिए।

संबंधित भजन एवं लेख | Related Bhajans & Articles


श्री हनुमान चालीसा

संकट मोचन हनुमान जी की महिमा और संपूर्ण चालीसा पाठ का विस्तृत भावार्थ।

पूरी जानकारी पढ़ें →

शिव तांडव स्तोत्र

महादेव शिव की स्तुति और उनके प्रचंड तांडव स्त्रोत का पावन श्लोकबद्ध पाठ।

पूरी जानकारी पढ़ें →

श्रीमद्भागवत गीता ज्ञान

भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए कर्मयोग और धर्म के शाश्वत संदेश।

पूरी जानकारी पढ़ें →

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह आलेख Bhaktilok.in के उच्च गुणवत्ता वाले सनातन साहित्य और भक्ति गीत वास्तुकला मानकों के अनुसार तैयार किया गया है। इसमें पाठकों की आध्यात्मिक जिज्ञासा को शांत करने के लिए प्रामाणिक शब्दों, सरल हिंदी भावार्थ और सांस्कृतिक संदर्भों का समावेश किया गया है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री — अद्यतन वर्ष: 2026 | स्रोत एवं संदर्भ: श्री साईं सच्चरित्र, पारंपरिक भजन संग्रह एवं लोक संत वाणी।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!