HD VIDEO SONG - खेसारी लाल यादव और प्रियंका सिंह की हिट सांग | Jhuluwa Jhulayi Liyo Re - BhaktiLok
भक्ति और संगीत के संगम में लोक संस्कृति का अनूठा रस घोलने वाले भोजपुरी सिनेमा के प्रख्यात गायक खेसारी लाल यादव और सुरों की मलिका प्रियंका सिंह द्वारा गाया गया यह लोकप्रिय भजन 'झुलुवा झुलाई लियो रे' (Jhuluwa Jhulayi Liyo Re) सनातन भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। लोकगीतों की शैली में रचे गए इस पावन गीत में माँ शक्ति, भगवती दुर्गा और लोक पर्वों के उल्लास के साथ-साथ भगवान के प्रति अनन्य प्रेम, श्रद्धा और समर्पण की भावना को बहुत ही सुंदर ढंग से पिरोया गया है। यह रचना न केवल कानों को तृप्त करती है, बल्कि साधक के मन में भक्ति और उत्सव के भाव को भी प्रज्वलित करती है। कलयुग में नाम संकीर्तन और देवी-देवताओं के प्रति समर्पित ऐसे भावपूर्ण गीत जन-मानस को सकारात्मक ऊर्जा से भर देते हैं। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस लोकप्रिय भजन के बोल, अर्थ, सांस्कृतिक महत्व और गायन की परंपरा पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics
स्थायी (मukhda):
झुलुवा झुलाई लियो रे,मैया झुलाई लियो रे!
निबिया के डाढ़ मैया झुलावन डलवली,
झुलुवा झुलाई लियो रे मैया झुलाई लियो रे!
भक्तन के मनवा हरखाई लियो रे,
झुलुवा झुलाई लियो रे मैया झुलाई लियो रे!
अंतरा 1:
सुनेनी सुमरनिया तोहार हे भवानी,
दौड़े-दौड़े आएल बानी तोहरे दुआरी।
झूमे ला गवनवा अउरी नाचे ला मंडपवा,
दर्शन देई दा हे शेरावाली महतारी!
झुलुवा झुलाई लियो रे मैया झुलाई लियो रे!
अंतरा 2:
खेसारी पुकारे तोहार महिमा अपार,
प्रियंका के सुरवा करे भव से पार।
घर-घर जगे अलख भक्ति के दियाना,
मैया के चरनन में बीते जिनगानी!
झुलुवा झुलाई लियो रे मैया झुलाई लियो रे!
गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth
यह भजन लोक संस्कृति और उच्च कोटि की भक्ति का एक अद्भुत समन्वय है। इसमें भक्त अपनी आराध्य देवी (मैया) के प्रति वात्सल्य और समर्पण का भाव व्यक्त कर रहा है। 'निबिया के डाढ़ मैया झुलावन डलवली' पंक्तियों का अर्थ है कि नीम के पवित्र वृक्ष की डालियों पर मैया का झूला डाला गया है, जो हमारी पारंपरिक लोक आस्था का प्रतीक है जहाँ प्रकृति और देवता एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। गीत के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि जब भक्त सच्चे हृदय से अपनी माता का आह्वान करता है, तो मैया स्वयं आकर उसके जीवन के झूलते हुए विकारों और दुखों को हर लेती हैं और भक्तों के मन को आनंदित कर देती हैं। खेसारी लाल यादव की ऊर्जावान और भावुक गायकी तथा प्रियंका सिंह की सुरीली आवाज इस रचना को और अधिक प्राणवान बना देती है।
गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message
इस गीत की मूल भावना लोक-भक्ति और आनंद (उत्सव) की है। सनातन संस्कृति में चैत्र और शारदीय नवरात्र के अवसरों पर देवी माँ के झूलनोत्सव का विशेष विधान है। यह गीत हमें सिखाता है कि भक्ति केवल रुदन या तपस्या का नाम नहीं है, बल्कि यह उत्सव, आनंद और उल्लास का भी माध्यम है। जब मनुष्य अपने इष्ट के साथ आंतरिक संबंध स्थापित कर लेता है, तो उसका प्रत्येक दिन किसी पर्व की भाँति हो जाता है। यह भजन अहंकार को त्यागकर माता के चरणों में शरण लेने का प्रेरणादायक संदेश देता है।
गीत की जानकारी | Song Information
| गीत का नाम (Song Name) | Jhuluwa Jhulayi Liyo Re (झुलुवा झुलाई लियो रे) |
|---|---|
| मुख्य गायक (Singers) | खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) और प्रियंका सिंह (Priyanka Singh) |
| संगीत शैली (Music Style) | लोक भक्ति गीत / भोजपुरी देवी गीत |
| भाषा (Language) | भोजपुरी / हिंदी |
| विषय एवं थीम (Theme) | देवी माँ की आराधना, झूलनोत्सव और भक्ति |
| संबंधित प्रसंग (Occasion) | नवरात्र, माता का जागरण, और देवी पूजन उत्सव |
गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators
भोजपुरी संगीत जगत में खेसारी लाल यादव और प्रियंका सिंह की जोड़ी ने अनगिनत सुपरहिट भक्ति और लोकगीत दिए हैं। खेसारी लाल यादव की आवाज़ में ठेठ गंवई माटी की खुशबू और लोक संवेदना का अनूठा मेल होता है, वहीं प्रियंका सिंह की शास्त्रीय सुचिता से परिपूर्ण सुरीली आवाज़ श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती है। इस गीत के माध्यम से दोनों कलाकारों ने लोक संस्कृति और देवी उपासना की परंपरा को आधुनिक संगीत के साथ सहेजा है, जिसकी सराहना देश-विदेश में बसे भोजपुरी भाषी और सनातन प्रेमी करते हैं।
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| शब्द (Word) | सरल अर्थ (Meaning) | संदर्भ (Context) |
|---|---|---|
| झुलुवा | झूला | देवी माँ के स्वागत हेतु डाला गया झूला |
| निबिया | नीम का पेड़ | माता शीतला और दुर्गा का प्रिय वृक्ष |
| डाढ़ | डाल या टहनी | पेड़ की मजबूत टहनी |
| सुमरनिया | स्मरण / पुकार | माता का ध्यान करना |
| हरखाई | आनंदित करना / खुश करना | भक्तों के मन का प्रसन्न होना |
गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance
सनातन संस्कृति में प्रकृति और परमात्मा का अटूट संबंध रहा है। नीम के पेड़ के नीचे मैया का झूला डालना इस बात का प्रतीक है कि दिव्य शक्तियां कण-कण में और प्रकृति की गोद में निवास करती हैं। इस प्रकार के लोकगीत हमारी संस्कृति को जीवित रखते हैं और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं। जब ऐसे गीत मंदिर परिसरों या घरों में बजते हैं, तो पूरा वातावरण सकारात्मक, ऊर्जावान और पवित्र हो जाता है। यह भजन साधक को श्री आरती और अन्य पारंपरिक स्तोत्रों की भांति ही मानसिक शांति प्रदान करता है।
गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons
यह गीत हमें यह सिखाता है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयां क्यों न आएं, ईश्वर या अपनी आराध्य शक्ति पर अटूट विश्वास बनाए रखना चाहिए। जिस प्रकार भक्त अपनी मैया को पुकारकर आनंदित होता है, उसी प्रकार हमें भी अपने कर्मों के साथ-साथ भगवद् स्मरण को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। सच्चा आनंद बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि भीतर की भक्ति और संतोष में निहित है।
गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing
यह गीत विशेष रूप से शारदीय और चैत्र नवरात्र के नौ दिनों के दौरान अत्यंत चाव से सुना जाता है। इसके अतिरिक्त, माता के जागरण, कन्या पूजन, मुंडन संस्कार, और किसी भी मांगलिक उत्सव के अवसर पर इस प्रकार के पावन देवी गीतों को बजाने और गाने की पुरानी परंपरा रही है। यह घर के वातावरण को मांगलिक और चैतन्य बनाता है।
एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance
| श्रेणी (Category) | भोजपुरी भक्ति गीत / देवी गीत |
|---|---|
| मुख्य कलाकार | खेसारी लाल यादव, प्रियंका सिंह |
| प्रमुख भाव | उल्लास, प्रेम, शरणागति |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्र, देवी पूजन, जागरण |
| संबंधित पाठ | श्री पार्वती स्तोत्र एवं देवी कवच |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
"झुलुवा झुलाई लियो रे" गीत के गायक कौन हैं?
इस लोकप्रिय भजन के मुख्य गायक प्रसिद्ध भोजपुरी कलाकार खेसारी लाल यादव और पार्श्वगायिका प्रियंका सिंह हैं।
यह गीत मुख्य रूप से किस अवसर पर गाया या सुना जाता है?
यह गीत मुख्य रूप से नवरात्र के पावन दिनों, माता के जागरण और देवी पूजन के विभिन्न उत्सवों पर सुना जाता है।
इस गीत का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?
इस गीत का मुख्य संदेश माता के प्रति अनन्य प्रेम, प्रकृति के सानिध्य में भक्ति का आनंद और जीवन में सकारात्मकता बनाए रखना है।
क्या ऐसे लोकगीत हमारी सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा हैं?
हाँ, ऐसे लोकगीत हमारी प्राचीन संस्कृति, लोक परंपराओं और पर्वों के उल्लास को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस गीत में किस पेड़ का विशेष उल्लेख मिलता है?
गीत में 'निबिया' यानी नीम के पेड़ का उल्लेख मिलता है, जिसे सनातन परंपरा में देवी का निवास स्थान माना जाता है।
क्या इस प्रकार के भजन मानसिक शांति प्रदान करते हैं?
बिल्कुल, भक्ति संगीत सुनने से मन का तनाव कम होता है और अंतर्मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
इस गीत को और कहाँ सुना जा सकता है?
यह गीत विभिन्न डिजिटल संगीत प्लेटफार्मों और यूट्यूब पर उपलब्ध है जहाँ भक्त इसे श्रद्धा के साथ सुन सकते हैं।
क्या ऐसे गीतों से बच्चों को संस्कृति से जोड़ा जा सकता है?
हाँ, मधुर धुनों और लोक शैली वाले ये गीत युवा पीढ़ी और बच्चों को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने का एक सहज माध्यम हैं।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह सामग्री Bhaktilok के संपादकीय मानकों के अनुरूप तैयार की गई है ताकि पाठकों को प्रामाणिक, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और उपयोगी जानकारी मिल सके। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- पारंपरिक लोकगीत एवं भोजपुरी संगीत परंपरा
- सनातन देवी उपासना एवं नवरात्र उत्सव परंपरा
- भक्ति संगीत संग्रह एवं लोक साहित्य संदर्भ
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें