Hanuman Chalisa ( New Version) | Latest हनुमान चालीसा (सीताराम ) by Ankush Ji Maharaj | FUll HD - BhaktiLok
सनातन संस्कृति और भक्ति परंपरा में कलयुग के प्रत्यक्ष देवता संकटमोचन महाबली हनुमान जी की स्तुति का सर्वप्रमुख और अत्यंत लोकप्रिय माध्यम श्री हनुमान चालीसा है। महाकवि गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित चालीसा की यह अद्भुत और दिव्य प्रस्तुति—"Hanuman Chalisa ( New Version) | Latest हनुमान चालीसा (सीताराम ) by Ankush Ji Maharaj"—भक्तों के अंतःकरण को पावन और ऊर्जावान बनाने वाली एक अत्यंत मधुर रचना है। अंकुश जी महाराज की सुमधुर वाणी और अनूठे संगीत संयोजन से सजी यह नवीनतम हनुमान चालीसा श्रोताओं को भगवान श्री राम और माता सीता के चरणों से जोड़ती है। इस भजन में 'सीताराम' संकीर्तन की मिठास और हनुमान जी के प्रति अगाध समर्पण का ऐसा संगम देखने को मिलता है, जो मन के सभी विकारों को दूर कर परम शांति और अभय प्रदान करता है।
भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित यह भजन मर्यादा पुरुषोत्तम के पावन चरित्र का स्मरण कराता है। गोस्वामी तुलसीदास जी के सिद्धांतों के अनुसार, राम का नाम स्वयं राम से भी अधिक सामर्थ्यवान है। इस भजन की लय और शब्द भक्त को सीधे साकेत धाम और किष्किंधा की पावन चेतना से जोड़ते हैं। भजन का प्रमुख भाव शरणागति का है। जब जीव समस्त सांसारिक प्रपंचों से थककर भगवान राम और संकटमोचन हनुमान के चरणों में शरण लेता है, तो उसे जीवन के हर क्षेत्र में विजय और परम अभय की प्राप्ति होती है। राम नाम और हनुमान नाम की पावन ध्वनि से संपूर्ण वातावरण शुद्ध हो जाता है और अंतःकरण में धर्म, सत्य और सेवा के प्रति निष्ठा दृढ़ होती है।
सम्पूर्ण चालीसा पाठ | Complete Hanuman Chalisa Lyrics
दोहा
श्री गुरु चरण सरोज रज निज मन मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल सुकुसु जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहि हरहु कलेस बिकार।।
चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर।।
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
महावीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।।
कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुंचित केसा।।
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। कांधे मुंज जनेऊ साजै।।
संकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बन्दन।।
बिद्यावान गुणी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।।
सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा। बिकट रूप धरि लंका जरावा।।
भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचन्द्र के काज संवारे।।
लाय संजीवन लखन जियाए। श्री रघुबीर हरषि उर लाएँ।।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
सहस बदलन तुम्तरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।।
जम कुबेर दिक्पाल जहाँ ते। कवि कोबिद कहि सके कहाँ ते।।
तुम सुग्रीवहि कीन्ह उपकारारा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
तुम्रो मन्त्र बिभीषन माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना।।
युग सहस्र योजन पर भानू। लिल्यो ताहि मधुर फल जानू।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गए अचरज नाहीं।।
दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुमरे तेते।।
राम दुवारे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना।।
आपन तेज सम्हारौ आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै।।
भूत पिशाच निकट नहीं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।।
नासै रोग हरै सब पीड़ा। जपत निरंतर हनुमान बीड़ा।।
संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा।।
और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै।।
चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।।
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्ारे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।।
तुम्हरे भजन राम को पावै। जन्म जन्म के दुख बिसरावै।।
अंत काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरै। सर्व सुसंख हनुमान से सर्व सुख करै।।
संकट कटै मिटै सब पीड़ा। जो सुमिरै हनुमंत बलबीरा।।
जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करो गुरुदेव की नाईं।।
जो शत बार पाठ कर कोई। छूटहि बन्दी महा सुख होई।।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महं डेरा।।
दोहा
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।
चालीसा का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Meaning & Bhavarth
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित हनुमान चालीसा के प्रत्येक शब्द में गूढ़ आध्यात्मिक रहस्य छिपे हैं। अंकुश जी महाराज की इस आधुनिक भजन प्रस्तुति (Hanuman Chalisa New Version) में इन पारंपरिक अर्थों को संगीत और भक्ति के साथ जीवंत किया गया है। चालीसा की शुरुआत गुरु चरणों की वंदना से होती है, जो यह सिखाती है कि बिना सद्गुरु की कृपा के आत्मज्ञान या भगवान की प्राप्ति संभव नहीं है। मन रूपी दर्पण को साफ करने के बाद भक्त अपनी अल्प बुद्धि का स्मरण करते हुए पवनपुत्र हनुमान का आह्वान करता है।
चौपाइयों में हनुमान जी के अतुलनीय बल, ज्ञान, और भगवान राम के प्रति उनकी अनन्य निष्ठा का वर्णन है। "राम काज करिबे को आतुर" पंक्ति यह दर्शाती है कि एक सच्चे भक्त की प्राथमिकता हमेशा प्रभु सेवा होनी चाहिए। लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और विभीषण को लंका का राज दिलाना हनुमान जी के पराक्रम और शरणागत-वत्सल स्वभाव को प्रकट करता है। चालीसा के अंत में माता सीता द्वारा दिए गए वरदान "अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता" का उल्लेख है, जो यह स्पष्ट करता है कि हनुमान जी अपने भक्तों को समस्त भौतिक और आध्यात्मिक संपदा प्रदान करने में समर्थ हैं।
भजन एवं चालीसा की मुख्य विशेषताएं | Highlights & Significance
- आधुनिक संगीत संयोजन: अंकुश जी महाराज ने पारंपरिक शब्दों को आज की युवा पीढ़ी के अनुकूल मधुर संगीत और 'सीताराम' धुन के साथ प्रस्तुत किया है।
- मानसिक शांति और संबल: इस चालीसा के श्रवण मात्र से भय, तनाव, चिंता और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
- राम-भक्ति की प्रधानता: चालीसा का यह संस्करण विशेष रूप से राम और सीता के प्रति हनुमान जी के समर्पण को केंद्र में रखता है।
- संकट मोचन स्वरूप: जीवन की किसी भी बड़ी से बड़ी बाधा या संकट से उबरने के लिए यह चालीसा अचूक औषधि मानी जाती है।
पाठ एवं श्रवण का समय व विधि | When & How to Recite
श्री हनुमान चालीसा का पाठ किसी भी समय और परिस्थिति में किया जा सकता है, परंतु इसके सर्वोत्तम आध्यात्मिक फल प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित नियमों का पालन करना लाभकारी होता है:
- शुभ समय: ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः काल 4:00 से 6:00 बजे) या संध्या काल (गोविन्द बेला) में पाठ करना अत्यंत फलदायी है। मंगलवार और शनिवार के दिन विशेष अनुष्ठान के रूप में इसे सुनना और पढ़ना चाहिए।
- पवित्रता: स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें और हनुमान जी के चित्र या विग्रह के समक्ष दीप प्रज्वलित करें।
- संकल्प: यदि आप किसी विशेष संकट से मुक्ति के लिए पाठ कर रहे हैं, तो चालीसा के प्रारंभ में संकल्प लें और निरंतर 40 दिनों तक 11 या 21 पाठ करें।
अंकुश जी महाराज और उनकी गायन शैली | Artist Introduction
भक्ति संगीत की दुनिया में अंकुश जी महाराज एक जाना-माना नाम हैं। उनकी आवाज में एक अनूठी गहराई, ओज और पवित्रता है जो श्रोताओं को तुरंत मंत्रमुग्ध कर देती है। पारंपरिक भजनों को आधुनिक वाद्ययंत्रों और ऊर्जावान धुनों के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेषता है। उनके द्वारा गाई गई यह 'New Version Hanuman Chalisa' विशेष रूप से युवाओं के बीच बहुत लोकप्रिय हो रही है, जिससे नई पीढ़ी अपनी प्राचीन संस्कृति और धार्मिक धरोहर से जुड़ रही है। अन्य लोकप्रिय स्तोत्रों के बारे में जानने के लिए आप शिव तांडव स्तोत्र और दुर्गा चालीसा के लेख भी पढ़ सकते हैं।
कठिन शब्दों के अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / पद | सरल अर्थ | संदर्भ / प्रसंग |
|---|---|---|
| मुकुरु | दर्पण या आईना | मन रूपी दर्पण को शुद्ध करना |
| बजरंगी | जिसका शरीर वज्र के समान कठोर हो | महावीर हनुमान का विशेष नाम |
| अष्ट सिद्धि नौ निधि | आठ प्रकार की सिद्धियां और नौ प्रकार की निधियां | माता सीता द्वारा प्रदत्त वरदान |
| संजीवन | मृत्युतुल्य कष्टों को दूर करने वाली बूटी | लक्ष्मण जी के प्राण रक्षा प्रसंग |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन / रचना नाम | Hanuman Chalisa (New Version) | सीताराम भजन |
|---|---|
| गायक / कलाकार | अंकुश जी महाराज (Ankush Ji Maharaj) |
| मूल रचयिता | महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी |
| प्रमुख आराध्य | संकटमोचन श्री हनुमान जी एवं मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम |
| भाषा | अवधी / हिंदी |
| मुख्य भाव | शरणागति, भक्ति, वीरता और मानसिक शांति |
| उपयुक्त अवसर | दैनिक पूजा, मंगलवार व्रत, संकट निवारण एवं सत्संग |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ | Editorial Review & Sources
यह आलेख सनातन परंपरा, गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस एवं हनुमान चालीसा के मूल सिद्धांतों पर आधारित है। इसे पाठकों की सुविधा और प्रामाणिकता को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
प्रमुख संदर्भ ग्रंथ: श्री रामचरितमानस (गीता प्रेस गोरखपुर), हनुमान बाहुक, विनय पत्रिका तथा पारंपरिक संकीर्तन संग्रह।
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