Wo Hai Jag Se Bemisaal | Lakhbir Singh Lakkha | Pyara Saja Hai Tera Dwar Bhawani
प्रकाशित तिथि: 2026 | श्रेणी: भजन, देवी स्तुति, नवरात्रि संकीर्तन
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "Wo Hai Jag Se Bemisaal" जिसे प्रसिद्ध भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा (Lakhbir Singh Lakkha) ने अपनी मधुर एवं ओजस्वी वाणी में गाया है, माँ जगदम्बा की असीम कृपा और महिमा का अद्भुत गान है। 'प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी' एल्बम का यह लोकप्रिय भजन माता रानी के दरबार की अलौकिक सुंदरता और उनकी शरणागत वत्सलता को दर्शाता है। सनातन धर्म में संकीर्तन और देवी भागवती के नाम का स्मरण कलयुग में भवसागर से पार उतरने का सबसे सरल और श्रेष्ठ मार्ग माना गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में माँ भवानी के प्रति अनन्य प्रेम, अटूट विश्वास और पूर्ण समर्पण का भाव समाहित है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
मुखड़ा (Refrain):
ओ है जग से बेमिसाल, मेरी मैया का दरबार,
सजा है ऐसा प्यारा दरबार भवानी...
ओ है जग से बेमिसाल, मेरी मैया का दरबार!
अंतरा 1:
ऊंचे पर्वतों पे मैया तेरा धाम है,
झुकते हैं देवता भी जिस को प्रणाम है।
चरणों में आके जो भी शीश झुकाता है,
झोली वो भर के अपने घर को जाता है।
मैया की महिमा है अपरंपार भवानी,
ओ है जग से बेमिसाल, मेरी मैया का दरबार!
अंतरा 2:
लाल चुनरिया मैया तेरे अंग सोहे रे,
मुखड़ा तुम्हारा देख चांद मन मोहे रे।
हाथों में खप्पर और त्रिशूल विराजे रे,
शेरों पे होके सवार मैया मेरी साजे रे।
भक्तों की सुनती है पुकार भवानी,
ओ है जग से बेमिसाल, मेरी मैया का दरबार!
अंतरा 3:
लक्खा भी गुण गाए तेरे चरण कमल में,
डूब गया मन मेरा मैया तेरी लगन में।
कृपा की कोर से जो हमको निहारती,
बिगड़ी हुई तकदीर मैया तू ही संवारती।
सबके दुखों को लेती है टाल भवानी,
ओ है जग से बेमिसाल, मेरी मैया का दरबार!
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
लखबीर सिंह लक्खा द्वारा गाये गए इस लोकप्रिय भजन "Wo Hai Jag Se Bemisaal" का भावार्थ भक्तों के अंतर्मन को आध्यात्मिकता से भर देता है। भजन के मुखड़े में माँ भवानी के दरबार की अद्वितीय सुंदरता का वर्णन किया गया है। भौतिक संसार की सभी वस्तुएं और स्थान अपनी सुंदरता खो सकते हैं, परंतु माँ जगदंबे का दरबार इस संपूर्ण सृष्टि में सबसे अनूठा, पवित्र और अलौकिक है।
पहले अंतरे में कवि वर्णन करता है कि माँ का धाम कैलाश या ऊंचे पर्वतों पर स्थित है, जहाँ स्वयं त्रिदेव और अन्य देवता भी नमन करने आते हैं। जो भी साधक सच्चे हृदय से माँ के चरणों में शीश झुकाता है, उसकी झोली कभी खाली नहीं रहती। दूसरे अंतरे में माँ के दिव्य स्वरूप का चित्रण है—लाल चुनरी, मुखड़े की चंद्र समान कांति, हाथों में त्रिशूल-खप्पर और सिंह की सवारी करती हुई माँ अपने भक्तों के सभी संकटों का हरण कर लेती हैं। अंतिम अंतरे में गायक लक्खा जी स्वयं को माँ के चरणों में समर्पित करते हुए कहते हैं कि हे मैया! तेरी एक कृपा दृष्टि हमारी बिगड़ी हुई तकदीर को संवारने के लिए पर्याप्त है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- देवी शक्ति की उपासना: यह भजन आदिशक्ति माँ दुर्गा, पार्वती और भवानी के स्वरूप का गुणगान करता है।
- भक्ति रस प्रधान: लखबीर सिंह लक्खा की पारंपरिक और ऊर्जावान शैली श्रोताओं में भक्ति और उत्साह का संचार करती है।
- शरणागति का संदेश: यह सिखाता है कि समस्त चिंताओं को त्यागकर माँ के चरणों में शरण लेने से मनुष्य भवसागर से तर जाता है।
- सार्वजनिक उत्सवों में उपयोग: नवरात्रि, जागरण, चौकी और माता के भंडारों में यह भजन अनिवार्य रूप से गाया व सुना जाता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
माता रानी के इस दिव्य भजन को प्रातःकाल स्नान के पश्चात या संध्या बेला में दीप प्रज्वलित करके सुनना अत्यंत फलदायी माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में विशेष रूप से जब माँ दुर्गा के पंडालों या घरों में घटस्थापना की जाती है, तब इस भजन का श्रवण वातावरण को पूरी तरह से पवित्र और ऊर्जावान बना देता है। इसे सच्चे भाव, ताली की थाप और सामूहिक संकीर्तन के साथ गाने से विशेष मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity & Saint
इस भजन की मुख्य आराध्य देवी माँ दुर्गा / भगवती भवानी हैं, जिन्हें प्रकृति, शक्ति और ब्रह्मांड की आदि जननी माना जाता है। इस रचना को स्वरबद्ध और लोकप्रिय बनाने वाले प्रसिद्ध गायक श्री लखबीर सिंह लक्खा जी हैं, जिन्होंने अपने संपूर्ण जीवन को माता रानी और श्री कृष्ण के भजनों के प्रचार-प्रसार में समर्पित कर दिया है। उनकी गायकी की शैली जन-जन के हृदय तक भक्ति का संदेश पहुँचाती है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / पदावली | सरल हिंदी अर्थ | संदर्भ / भाव |
|---|---|---|
| बेमिसाल | जिसकी कोई तुलना न हो, अद्वितीय | माता के दरबार की अलौकिकता दर्शाने हेतु |
| भवानी | माता पार्वती या दुर्गा | संसार को उत्पन्न करने वाली और पालनहार |
| अपरंपार | जिसकी कोई सीमा न हो, असीम | माता की महिमा और शक्ति की विशालता |
| खप्पर | माता का पारंपरिक शस्त्र या पात्र | दुष्टों का संहार करने वाला दिव्य अस्त्र |
| तकदीर | भाग्य, किस्मत | माता की कृपा से जीवन का संवरना |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | Wo Hai Jag Se Bemisaal (Pyara Saja Hai Tera Dwar Bhawani) |
|---|---|
| मुख्य गायक | लखबीर सिंह लक्खा (Lakhbir Singh Lakkha) |
| आराध्य देवी | माँ दुर्गा / भवानी / जगदम्बा |
| भाषा | हिंदी / ब्रज मिश्रित लोक भाषा |
| संगीत शैली | भक्ति संकीर्तन / देवी जागरण गीत |
| मुख्य विषय | माता की महिमा, शरणागति और कृपा |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण, संध्या आरती |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: "Wo Hai Jag Se Bemisaal" भजन के गायक कौन हैं?
उत्तर: इस प्रसिद्ध भजन को लोकप्रिय भजन सम्राट श्री लखबीर सिंह लक्खा जी ने अपनी ओजस्वी और मधुर वाणी में गाया है।
प्रश्न 2: यह भजन किस देवी-देवता को समर्पित है?
उत्तर: यह भजन आदिशक्ति जगत जननी माँ दुर्गा (भवानी) को समर्पित है।
प्रश्न 3: इस भजन को किस अवसर पर सबसे अधिक गाया जाता है?
उत्तर: इसे मुख्य रूप से शारदीय और चैत्र नवरात्रि, माता के जागरण, चौकी और मंगलवार या शुक्रवार की पूजा के दौरान गाया जाता है।
प्रश्न 4: इस भजन को सुनने से क्या आध्यात्मिक लाभ मिलता है?
उत्तर: इसके श्रवण से मन को असीम शांति मिलती है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और माँ भवानी के प्रति अटूट विश्वास एवं भक्ति जागृत होती है।
प्रश्न 5: क्या इस भजन को घर पर दैनिक पूजा के समय गा सकते हैं?
उत्तर: हाँ, संध्या आरती या प्रातःकालीन पूजन के समय इस भजन को सुनना और गाना अत्यंत शुभ और आनंददायक होता है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह सामग्री भक्तलोक (Bhaktilok.in) के संपादकीय मंडल द्वारा सनातन धर्म की पारंपरिक लोक-भक्ति और संगीत परंपरा को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के रूप में प्रस्तुत की गई है। इसका उद्देश्य पाठकों को सटीक लिरिक्स, शुद्ध भावार्थ और आध्यात्मिक प्रेरणा प्रदान करना है।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें