प्रमोद प्रेमी यादव और शिल्पी राज का भोजपुरी भक्ति संगीत: "ए हमार सोना मुर्ती भिरी आवS"
भोजपुरी लोक संगीत और भक्ति परंपरा के अनूठे संगम में प्रमोद प्रेमी यादव और शिल्पी राज की जोड़ी ने हमेशा से ही श्रोताओं के मन में एक विशेष स्थान बनाया है। नवरात्रि और देवी उपासना के पावन पर्व पर प्रस्तुत यह विशेष भक्ति गीत "ए हमार सोना मुर्ती भिरी आवS" (A Hamar Sona Murti Bhiri Aaw) माता रानी के प्रति अनन्य प्रेम, विरह, और आर्त पुकार का एक अत्यंत सुंदर और मार्मिक जीवंत उदाहरण है। भोजपुरी लोक संस्कृति में जब कोई भक्त अपनी आराध्य देवी माँ दुर्गा को अपनी गोद में या अपने आँगन में विराजमान होने का निमंत्रण देता है, तो उसकी वाणी में केवल संगीत नहीं, बल्कि एक अगाध समर्पण और वात्सल्य रस प्रवाहित होता है। नवरात्रि के इन पवित्र दिनों में जब संपूर्ण वातावरण दुर्गा सप्तशती के मंत्रों और जयकारों से गूंजता रहता है, तब इस प्रकार के लोक-गीत जन-मानस को झकझोर देते हैं। यह गीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह उस सात्विक भाव का प्रतीक है जहाँ एक साधक अपनी माँ को पुकार-पुकार कर अपने समीप बुलाना चाहता है। इस गीत में आधुनिक संगीत के ताल-मेल के साथ-साथ लोक-संस्कृति की सोंधी खुशबू भी स्पष्ट रूप से महसूस की जा सकती है, जो हर उम्र के श्रोताओं को अपनी ओर आकर्षित करती है।
सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics
स्थाई (मुखड़ा):
ए हमार सोना मुर्ती भिरी आवS...
अखियाँ के तारा तोहरे दरस के प्यासा बा,
निमिया के डाढ़ पर झूलेलि जोतनिया,
जल्दी से आइब तू तs टूटे परछनिया!
ए हमार सोना मुर्ती भिरी आवS...
अंतरा 1:
घटस्थापना कईनी हम तs धियान धके,
नवरत के दिनवा बितता आस लगाके!
भउजी रे बहिनिया सब जोहे ली बतिया,
कब तुहु आईबू ले के सपनो के रतिया?
शेरवा पे हो के सवार जल्दी से आवS,
ए हमार सोना मुर्ती भिरी आवS...
अंतरा 2:
शिल्पी राज के सुरवा में मैया के महिमा,
प्रमोद प्रेमी गावे धरे माँ के महिमा!
झुमरवा बाटे सजले पंडालवा में भारी,
दर्शन खातिर बाटे बइठल दुनिया सारी!
भकतुलक.इन पर पावन गान गावल जावs,
ए हमार सोना मुर्ती भिरी आवS...
गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth
इस पावन भोजपुरी नवरात्रि गीत का शाब्दिक और भावार्थीय दोनों स्तरों पर बहुत गहरा आध्यात्मिक महत्व है। गीत के मुखड़े में गायक प्रमोद प्रेमी यादव माँ भगवती को 'सोना मुर्ती' (स्वर्ण के समान अमूल्य और पवित्र मूर्ति) कहकर संबोधित करते हैं। भक्त का हृदय माँ के दर्शन के लिए इतना व्याकुल है कि उसकी आँखें केवल और केवल देवी के रूप का पान करना चाहती हैं। 'निमिया के डाढ़ पर झूलेलि जोतनिया' इस पंक्ति में पारंपरिक लोक मान्यता का सुंदर चित्रण है, जहाँ माँ दुर्गा को नीम के वृक्ष पर वास करने वाली और ज्योत के रूप में प्रगट होने वाली शक्ति माना गया है।
दूसरे चरण में, घटस्थापना और नौ दिनों की नवरात्रि साधना का प्रसंग आता है। भक्त कहता है कि उसने बड़े ही विधि-विधान से कलश स्थापना की है और निरंतर माँ के ध्यान में लीन है। परिवार के सभी सदस्य (भउजी, बहिनिया) इस प्रतीक्षा में हैं कि कब माँ उनके द्वार पर पग रखेंगी और उनके दुखों का निवारण करेंगी। यह लोक-भावना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय संस्कृति में ईश्वर को केवल एक शक्ति के रूप में नहीं, बल्कि अपने परिवार के सबसे प्रिय सदस्य और पालक के रूप में देखा जाता है।
गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message
इस लोकप्रिय भक्ति गीत की मूल भावना शरणागति, वात्सल्य और तीव्र उत्कंठा (विरह भाव) है। जब तक भक्त अपने आराध्य के समीप नहीं होता, तब तक उसका मन अशांत रहता है। यह गीत श्रोताओं को यह संदेश देता है कि पूजा-पाठ केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें भगवान के प्रति एक आत्मीय पुकार और सच्चा प्रेम होना चाहिए। जब प्रमोद प्रेमी यादव और शिल्पी राज अपनी उर्जावान आवाज़ में इस गीत को गाते हैं, तो वह श्रोताओं के भीतर भक्ति के सोत को जागृत कर देता है।
गीत की जानकारी | Song Information
| गीत का नाम | ए हमार सोना मुर्ती भिरी आवS (A Hamar Sona Murti Bhiri Aaw) |
|---|---|
| मुख्य गायक | प्रमोद प्रेमी यादव (Pramod Premi Yadav) एवं शिल्पी राज (Shilpi Raj) |
| संगीत विधा | भोजपुरी नवरात्रि भक्ति गीत / लोक भजन |
| रिलीज वर्ष | नवरात्रि 2020 |
| भाषा | भोजपुरी एवं हिंदी |
| प्रमुख थीम | देवी दुर्गा की आराधना, माँ का आह्वान और वात्सल्य भाव |
| संबंधित पावन मंच | भक्तिलोक (BhaktiLok) |
गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators
प्रमोद प्रेमी यादव भोजपुरी संगीत जगत के एक ऐसे हस्ताक्षर हैं जिन्होंने अपनी दमदार और सधी हुई आवाज से लाखों दिलों पर राज किया है। उनकी गायकी में ग्रामीण परिवेश की मिठास और ठेठ भोजपुरी लहजा स्पष्ट झलकता है। वहीं, शिल्पी राज वर्तमान समय की सबसे लोकप्रिय और व्यस्त पार्श्वगायिकाओं में से एक हैं, जिनकी सुरीली और तीक्ष्ण आवाज हर श्रेणी के गीतों में प्राण फूंक देती है। इन दोनों की जुगबंदी जब भी किसी लेटेस्ट भक्ति गीत के लिए होती है, तो वह संगीत प्रेमियों के बीच तुरंत वायरल हो जाती है। इस गीत के माध्यम से दोनों कलाकारों ने माता रानी के दरबार में अपनी अनूठी हाजिरी लगाई है जो श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती है।
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| शब्द | सरल अर्थ | संदर्भ |
|---|---|---|
| भिरी आवS | पास आओ / नजदीक आओ | माँ को अपने समीप बुलाने का आग्रह |
| सोना मुर्ती | स्वर्ण के समान मूल्यवान और सुंदर रूप | माता के दिव्य विग्रह के लिए विशेषण |
| निमिया के डाढ़ | नीम के पेड़ की डाली | माँ दुर्गा के वास स्थल का पारंपरिक उल्लेख |
| घटस्थापना | कलश स्थापना | नवरात्रि के पहले दिन की जाने वाली पूजा |
| परछनिया | स्वागत की बेला / आरती उतारना | माँ के आगमन पर खुशी मनाने का अवसर |
गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance
भारतीय लोक परंपरा में नवरात्रि केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह मातृशक्ति के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का महापर्व है। इस प्रकार के भोजपुरी गीत लोक संस्कृति को धर्म से जोड़ने का कार्य करते हैं। जब आम जनमानस अपनी भाषा में देवी की स्तुति करता है, तो वह आध्यात्मिकता को और अधिक सुलभ और सरल बना देता है। इस गीत में नीम के पेड़, कलश स्थापना, और पारिवारिक सहभागिता जैसे तत्व भोजपुरी समाज की गहरी सांस्कृतिक जड़ों को दर्शाते हैं। इसके साथ ही, पावन व्रत कथाओं और पर्वों की श्रृंखला में ऐसे गीत भक्ति के वातावरण को और अधिक जीवंत बनाते हैं, जैसे कि शिव-पार्वती भजन और राम भजन हमारी संस्कृति की अमूल्य थाती हैं।
गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons
- समर्पण का भाव: ईश्वर के प्रति पूर्ण शरणागति ही भक्त का सबसे बड़ा आभूषण है।
- परिवार और समाज की एकता: पर्व और त्यौहार हमें मिलकर खुशियाँ मनाने की प्रेरणा देते हैं, जैसा कि गीत में परिवार के सभी सदस्यों के साथ होने का जिक्र है।
- धैर्य और प्रतीक्षा: किसी भी उच्च प्राप्ति या देवी दर्शन के लिए मन में जो व्याकुलता और संयम चाहिए, वह इस गीत की पंक्तियों में झलकता है।
- अपनी संस्कृति से जुड़ाव: अपनी मातृभाषा और लोक-संगीत के माध्यम से अपनी आस्था को व्यक्त करना हमारी प्राचीन परंपरा का हिस्सा है।
गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing
यह गीत विशेष रूप से शारदीय और चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान अत्यधिक चाव से सुना जाता है। इसके अलावा:
- घर में माता की चौकी या जागरण के आयोजन के समय।
- कलश स्थापना और माता के विसर्जन के पावन अवसरों पर।
- सुबह और संध्या काल की दैनिक पूजा के समय मन को प्रफुल्लित करने के लिए।
- जब भी भक्त का मन माँ के वियोग में उदास हो और वह देवी की ऊर्जा का अनुभव करना चाहे।
एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance
| शीर्षक | ए हमार सोना मुर्ती भिरी आवS (A Hamar Sona Murti Bhiri Aaw) |
|---|---|
| गायक | प्रमोद प्रेमी यादव, शिल्पी राज |
| शैली | भोजपुरी नवरात्रि भक्ति गीत |
| मुख्य विषय | माता दुर्गा का आह्वान और वात्सल्य प्रेम |
| भाषा | भोजपुरी |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्रि, देवी जागरण, माता की पूजा |
| प्रसारण मंच | भक्तिलोक (BhaktiLok.in) - देशभक्ति और सांस्कृतिक गीत संग्रह |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख प्रमाणित लोक परंपराओं, सांस्कृतिक धरोहर और श्रोताओं की पसंद को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य भोजपुरी भक्ति संगीत के उत्कृष्ट पक्षों को पाठकों तक पहुँचाना और सनातन संस्कृति के प्रति रुचि को बढ़ाना है। सभी विवरण पारंपरिक मान्यताओं और संगीत जगत में उपलब्ध जानकारियों पर आधारित हैं।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- भोजपुरी लोक संगीत एवं नवरात्रि परंपराओं के पारंपरिक मौखिक एवं लिखित स्रोत।
- संगीत जगत के आधिकारिक रिलीज और कलाकारों के सार्वजनिक मंचों से प्राप्त विवरण।
- भक्तिलोक (BhaktiLok.in) का सांस्कृतिक और संगीत आधारित पावन अभिलेखागार।
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